'बांके और ईंटों से मारा था मेरे पापा को'

बांके और ईंटों से मारा था मेरे पापा को

हरदीगौरा (बहराइच)। हरदीगौरा गाँव के आरटीआई अधिकारी गुरु प्रसाद शुक्ल की हत्या को लेकर उनके परिवार के लोग पिछले करीब चार महीने से दर-दर भटक रहे हैं। जब हर जगह से उन्हें निराशा मिली तो अब वे न्याय की आस लेकर लखनऊ में महात्मा गांधी पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गये हैं।

जून माह में बहराइच जि़ले के हरदीगौरा ग्राम के प्रधान और उसके साथियों द्वारा आरटीआई कार्यकर्ता गुरु प्रसाद की पीट-पीट कर निर्मम हत्या कर दी गयी थी। महात्मा गांधी पार्क में गांधी मूर्ति के सामने अपने परिवार के साथ धरने पर बैठीं गुरु प्रसाद शुक्ला की पत्नी सुमन शुक्ला बताती हैं, ''उन्होंने ग्राम प्रधान से पंचायत में हुये कामों का लेखा जोखा मांगा था। इस पर प्रधान मारने की धमकी देने लगा था।" गुरुप्रसाद आरटीआई अधिकारी थे और समाज के लिये काम करते थे। उनकी पत्नी आगे बताती हैं, ''हत्या के करीब दो महीने पहले प्रधान ने लोगों से उन्हें मरवाया था। तब भी काफी चोट आई थी। उस बारे में थाने में शिकायत भी की थी लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया।"

पास में ही बैठा उनका करीब 15 वर्ष का बेटा विजय कुमार अपने पिता की हत्या वाले दिन की पूरी घटना के बारे में बताते हुये कहता है, ''पापा सो रहे थे, सुबह चार बजे आकर करीब 20-25 लोग उन्हें बांके से और ईंटों से मारा था। जब वो जोर-जोर से चिल्लाने लगे तब हम लोगों को पता चला कि पापा को कोई मार रहा है।"

अनशन पर मौजूद समाज सेविका उर्वशी के अनुसार ये अकेला ऐसा मामला नहीं हैं जब किसी आरटीआई अधिकारी की हत्या की गयी है। बल्कि अब तक करीब 60 आरटीआई अधिकारियों की हत्या की जा चुकी है। हालांकि गुरुप्रसाद की हत्या के जुर्म में उनके हत्यारे दफा 302 के तहत इस समय जेल में हैं, लेकिन उनके परिवार वाले एफआईआर में जितने लोगों के नाम हैं उन पर रासुका लगाने की मांग कर रहेे हैं। इसके अलावा वे 25 लाख रुपए का मुआवजा, लोहिया आवास, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, परिवार की सुरक्षा, मृतक की सभी आरटीआई सूचनाओं को सूचना आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने, मृतक की लंबित शिकायतों का निपटारा समयबद्ध रूप से करने, उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के आयुक्तों द्वारा सूचना दिलाने में देरी के मामले की जांच कराने, केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा मृतक की शिकायतों के मामलों के निपटारे में देरी करने के मामले की जांच कराने की मांग कर रहे हैं। वो इससे पहले इन्हीं मांगों को लेकर जिलाधिकारी बहराइच के कार्यालय परिसर में धरना दे चुके हैं। लेकिन वहां से सिर्फ आश्वासन ही मिला, हुआ अभी तक कुछ नहीं।

गुरुप्रसाद को 18 अप्रैल को येश्वर्याज सेवा संस्थान द्वारा लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय आरटीआई सेमिनार में उनके सामाजिक योगदानों के लिए 'विष्णुदत्त मिश्रा मेमोरियल आरटीआई रत्न सम्मान 2015' से सम्मानित किया गया था। उर्वशी ने बताया कि पीड़ित परिवार ने बीते अगस्त माह में समाजसेवी संजय शर्मा, तनवीर अहमद सिद्दीकी, हरपाल सिंह, राम स्वरूप यादव, होमेंद्र और अब्दुल्ला सिद्दीकी आदि समाजसेवियों की उपस्थिति में बहराइच के जिलाधिकारी द्वारा मांगे पूरी कराने के आश्वासन के बाद धरने को उस समय रोक दिया गया था किन्तु जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद भी अभी तक पीडि़त परिवार की कोई भी मांग पूरी नहीं हुई है।

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