किसानों के लिए काल बना मार्च का महीना

किसानों के लिए काल बना मार्च का महीनाgaoconnection

लखनऊ। अच्छी खासी लागत से तैयार की गयी टमाटर की फसल मार्च के महीने में अधिक गर्मी पड़ने की वजह से बर्बाद हो गयी। अब किसान टमाटर की खेत में ही दूसरी फसल बो रहे हैं।

लखनऊ ज़िला मुख्यालय से लगभग 35 किमी दूर उन्नाव ज़िले के हसनगंज ब्लॉक के नसरतगंज गाँव के किसान प्रभाशंकर सिंह (55 वर्ष) ने दो बीघे खेत में टमाटर की 2853 किस्म के पौधे लगाए थे, लेकिन ज्यादातर पौधों के तने बीच में ही सूख गए। प्रभाशंकर सिंह बताते हैं, “एक बीघे खेत में साढ़े चार हजार रुपए के तो टमाटर के बीज ही लगे हैं। जुताई, निराई, गुड़ाई मिलाकर एक बीघे में दस से बारह हजार रुपए खर्च हुआ, लेकिन अब लग रहा है एक रुपये भी नहीं मिलेगा।”

वो आगे बताते हैं, “पिछले साल मार्च में इतनी गर्मी नहीं थी तो टमाटर की बहुत अच्छी फसल तैयार हुई थी, लेकिन इस बार इतनी ज्यादा गर्मी पड़ने लगी की टमाटर के पौधे सूख गए।”

प्रभाशंकर सिंह के साथ ही उनके गाँव के दूसरे किसान प्रदीप सिंह की टमाटर की फसल में भी यही रोग लग गया। प्रभाशंकर टमाटर की फसल बर्बाद होने के बाद उसी खेत में करेला की प्राची किस्म लगा रहे हैं। नसरतगंज गाँव के किसान प्रदीप सिंह (50 वर्ष) कहते हैं, “इस बार वैसे कई सब्जियों की खेती में नुकसान उठाना पड़ा, टमाटर की फसल से उम्मीद थी, लेकिन ये भी खराब हो गयी।”

केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीवी प्रबंधन केन्द्र के डॉ. उमेश कुमार टमाटर में होने वाले इस रोग के बारे में बताते हैं, “टमाटर के इस रोग को डैम्पिंग ऑफ या कमरतोड़ कहते हैं, यह एक कवक से फैलने वाला रोग है। यह रोग सभी प्रकार की मिट्टी में हो सकता है। जहां पर मिट्टी गीली होती है, वहां पर टमाटर में ज्यादा संक्रमण होता है। कमरतोड़ से प्रभावित पौधे बीच के तने से सूख जाते हैं, जिससे पौधे कुछ ही दिनों में गिर जाते हैं और वृद्धि रुक जाती है। ये रोग एक पौधे से दूसरे पौधों में फैल जाता है। कई बार तो एक खेत से दूसरे खेत में भी संक्रमण फैल जाता है।”

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