25 करोड़ मांग रहे, 5% भी नहीं खर्च कर पाते

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लखनऊ। लोकसभा में वैसे तो घमासान ही चलता रहता है लेकिन बुधवार को BJP के एक सांसद के प्रस्ताव को पूरे सदन ने मुस्कुराहट के साथ समर्थन किया। BJP सांसद ने सांसद निधि को पांच करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ करने की बात कही थी, जिसका सभी दलों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया। जबकि सरकारी आकड़ों के मुताबिक सांसद सालभर में अपनी एक चौथाई राषि नहीं खर्च पाते हैं।

वर्ष 1993 में हुई थी सांसद निधि की शुरूआत

सांसद निधि पर भले ही सभी सांसद एकमत नजर आए हों लेकिन सांसद निधि बढ़ाने और उसके उपयोग को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। भारत में सांसद क्षेत्रीय विकास निधि की शुरूआत वर्ष 1993-94 में पांच लाख रुपये से हुई थी जो वर्ष 2012 में ही बढ़कर पांच करोड़ प्रति वर्ष हो गई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1993 से 2009 तक भेजे गए समूचे फंड में से 80% का प्रयोग हुआ। वहीं वर्ष 2014-15 में केवल 5.4 प्रतिशत सांसद निधि का ही प्रयोग हो सका। केंद्र सरकार की वेबसाइट एमपीलैड्य के मुताबिक उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सासंदों के लिए 625 करोड़ रुपये मिले है लेकिन खर्च सिर्फ 343.37 करोड़ हुए। बाकी 304.06 करोड़ रुपया जिलों में पड़ा है। यानि सिर्फ 54.94 फीसदी पैसा खर्च हुआ।

मोदी ने 66%, मुलायम ने 53, राहुल ने 54 फीसदी फंड किया खर्च

वेबसाइट के आंकडों के मुताबिक 16वीं लोकसभा में अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसद निधि के तहत 7.50 करोड़ रुपये अलॉट हुए इसमें से 3.23 करोड़ रुपया बाकी पड़ा है यानि 66.65 फीसदी बजट खर्च किया गया। इसी तरह आजमगढ़ सांसद को जारी 7.50 करोड़ में से 3.99 करोड़ रुपयों का ही इस्तेमाल हुआ है। यानि 53.18 फीसदी रुपया अभी जिला स्तर पर पड़ा है। इसी तरह अमेठी से सांसद और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी इसी तरह साढ़े सात करोड़ रुपये मिले उसमें से 4.09 करोड़ का ही इस्तेमाल हुआ। बाकी 3.45 करोड़ रुपये खर्च होने के इंतजार में है। इतना ही नहीं 2014-2015 में तो 223 फीसदी सांसदों ने अपने क्षेत्रों के लिए एक भी पैसा खर्च नहीं किया था। हालांकि कई बार ये भी होता है कि निर्धारित प्रोजेक्ट की लागत ज्यादा होती है, इसलिए वो शुरू किए गए साल में शुरू नहीं हो पाता है।

लोकसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और यदि सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में किसी खेल परियोजना में सांसद निधि से 50 फीसदी का योगदान करते हैं तो सरकार बाकी 50 फीसदी लागत का वहन खुद करेगी। सदस्यों ने उनकी इस बात पर थोड़ा नाराजगी जाहिर की। इस पर भाजपा के ही सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने कहा कि यदि सरकार सांसद निधि की राशि को पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दे तो संसद सदस्य परियोजना का 50 फीसदी खर्च उठाने को तैयार हैं। लगभग सभी दलों के सदस्यों ने उनकी इस बात का मेजें थपथपाकर समर्थन किया।

इस राशि का कैसे होता है इस्तेमाल

केंद्र सरकार यह पैसा सांसदों के अपने इलाके में पानी, सड़क, शिक्षा और स्कूल समेत कई विकाय कार्यों के लिए देती है। सरकार यह पैसा सीधे जिलों को भेजती है। सांसद की प्रस्तावना पर जिले के अधिकारी उस कार्य को किसी एजेंसी से करवाते हैं। इसके तहत केंद्र दो किस्तों में यानी 2.50-2.50 करोड़ करके भेजती है। उनके प्रस्ताव पर जिलस्तरीय अधिकारी और भारत सरकार मिल कर काम करते हैं। इस बजट का इस्तेमाल, पेजय जल, शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, सिंचाई और सड़क निर्माण आदि पर होता है। भारत सरकार ये पैसा सीधे जिले को 2.50-2.50 करोड़ की दो किस्तों में भेजती है।

कैसे-कैसे बढ़ी सांसद निधि

वर्ष 1993-94 में                   5 लाख रुपये

वर्ष 1995 से 98 तक                   1 करोड़

1999-12 तक                  2 करोड़

2012 से अब                                पांच करोड़

क्या था आज का मामला

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और यदि सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में किसी खेल परियोजना में सांसद निधि से 50 फीसदी का योगदान करते हैं तो सरकार बाकी 50 फीसदी लागत का वहन खुद करेगी। सदस्यों ने उनकी इस बात पर थोड़ा नाराजगी जाहिर की। इस पर भाजपा के ही सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने कहा कि यदि सरकार सांसद निधि की राशि को पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दे तो संसद सदस्य परियोजना का 50 फीसदी खर्च उठाने को तैयार हैं। लगभग सभी दलों के सदस्यों ने उनकी इस बात का मेजें थपथपाकर समर्थन किया।

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