50 फीसदी लोगो की मौत का कारण तंबाकू

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लखनऊ। तम्बाकू आज के समय में फैल रही अधिकांश बीमारियों के पीछे एक बड़ी वजह है। इस लत का शिकार तेजी से युवा पीढ़ी और खासकर महिलाएं हो रहीं हैं। हमारे देश में 184 लाख लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं, जिसमें 20 प्रतिशत लोग सिगरेट का सेवन करते हैं, जबकि 40 प्रतिशत बीड़ी और 40 प्रतिशत तम्बाकू का प्रयोग गुलमंजन में करते हैं।

रेस्पटरी मेडिसिन विभाग किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त बताते हैं, “धूम्रपान के इस्तेमाल से 500 तम्बाकू में गैस एवं 4000 अन्य रासायनिक पदार्थ निकलते हैं, जिनमें निकोटिन और टार प्रमुख है। विभिन्न शोधों द्वारा पता लगा है कि 580 रासायनिक पदार्थ कैंसरकारी पाए गये हैं।”  विश्वभर में होने वाली मृत्यु में 50 प्रतिशत मौतों का कारण तम्बाकू है, जिसके चलते रक्त संचरण प्रभावित हो जाता है, बल्ड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है, सांस फूलने लगती है और नित्य क्रियाओं में अवरोध आने लगता है।

हमारे देश में महिलाओं की अपेक्षा पुरूष अधिक धूम्रपान करते हैं और इसके चपेट में धूम्रपान न करने वाले लोग भी आते हैं क्योंकि इसका धुंआ 70 प्रतिशत तक आसपास के वातावरण में रह जाता है, जिससे परिवार के लोग और उसके मित्र प्रभावित होते हैं, जिसको हम परोक्ष धूम्रपान कहते हैं। सिगरेट की तुलना में बीड़ी पीना ज्यादा नुकसानदायक होता है। बीड़ी में निकोटीन की मात्रा कम होने के कारण निकोटीन की लत के शिकार लोगों को इसकी आवश्यकता बार बार पड़ती है। 

धूम्रपान के कारण बीमारियां

धूम्रपान से होने वाली प्रमुख बीमारियां हैं, ब्रॅानकाइटिस, एसिडिटी, टीबी, ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक, फॅालिज, नपुंसकता, माइग्रेन सिरर्दद, बालों का जल्दी सफेद होना आदि। तम्बाकू से लगभग 40 तरह के कैंसर होते हैं, जिसमें मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, प्रोस्टेट का कैंसर, पेट का कैंसर, ब्रेन टयूमर आदि है। धूम्रपान से हो रहे विभिन्न कैंसरों में विश्व में मुख का कैंसर सबसे ज्यादा है तम्बाकू से सबसे ज्यादा लोग हृदय रोग से पीड़ित होते हैं और 40 लाख लोग प्रतिवर्ष फेफड़े से संबधित बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं।

धूम्रपान की लत के कारण

बीड़ी या सिगरेट के धुंए में मौजूद निकोटिन व अन्य विषैले तत्व हमारे मस्तिष्क में लगभग 10 से 19 सेकेंड में पहुंच जाते हैं। निकोटिन सर्वप्रथम मस्तिष्क के मध्य भाग को प्रभावित करता है, जिसके कारण निकोटिन के अभिग्राहक सक्रिय हो जाते है और तंत्रिका संचारक का अधिक स्त्राव होने लगता है जो कि हमारे लिए हानिकारक हैं। इसके कारण हमारे विचार में तथा हमारे कार्य में बदलाव होने लगता है जैसे चेतनावस्था में बदलाव, जल्दी उत्तर देना, सूचनाओं को मस्तिष्क तक पहुंचाना, यादाश्त का तेज होना इत्यादि। यह सब केवल कुछ समय के लिए होता है। क्योंकि निकोटिन का कार्यकाल आधे घंटे से दो घंटे के बीच का होता है इसके बाद आपको पुन: इसकी जरूरत महसूस होने लगती है। लोगों में धूम्रपान करने के बहुत से कारण हैं जैसे कि उत्तेजना, इसका स्वाद जानने की इच्छा और चिंता से मुक्ति आदि है ऐसा मानना है कि इससे तनाव भी कम होता है।

रिपोर्टर - दरख्श़ां कदीर सिद्दकी

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