बाबरी मस्ज़िद के मुद्दई हाशिम अंसारी का इंतकाल

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लखनऊ। अयोध्या, बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी का आज उनके अयोध्या आवास पर  सुबह 5.30 बजे इंतकाल हो गया। वह 96 वर्ष के थे और कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे।

स्व. अंसारी अपने पीछे एक बेटी और एक बेटे को छोड़ गये हैं। स्व. अंसारी की रामजन्मभूमि बाबरी आंदोलन में अहम भूमिका रही है। वह अपने रहते राम मन्दिर/बाबरी मस्जिद का समाधान चाहते थे लेकिन उससे पहले ही आज वह दुनिया से रुखसत हो गये।

हालांकि बाबरी मस्जिद का यह मुद्दा सबसे ज्यादा 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद सुर्खियों में आया लेकिन स्व. अंसारी पिछले 60 वर्षों से इस केस को लड़ रहे थे। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद के मुद्दई हाशिम अंसारी, इमरजेंसी में जेल भी गए थे। राम जन्मभूमि का मुकदमा 1949 में इन्होंने खुद दायर किया था। वह राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के एक पैरोकार थे और उनकी दुनियाभर में पहचान का यही सबसे बड़ा आधार बना। 

वर्ष 1921 में पैदा हुए हाशिम अंसारी ने 1949 में पहली बार इस मामले में तब मुकदमा दर्ज करवाया था जब विवादित ढांचे के भीतर कथित रूप से मूर्तियां रखी गई थीं।

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