बांदा में विज्ञान का रियलिटी शो

बांदा में विज्ञान का रियलिटी शोgaonconnection

बादां। आने वाले समय में अगर बांदा में बच्चे अपने घरों में खाने-पीने की सामान में मिलावट जांचते, या खुद की अपशिष्ट से खाद बनाते मिलें तो चौंकिएगा मत। ये रियलिटी शो से निकले बच्चे भी हो सकते हैं।

युवाओं की विज्ञान के क्षेत्र में रुचि बढ़ाने, उन्हें अपने आसपास की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जागरूक करने को बांदा  पहला विज्ञान ट्रेनिंग आधारित रिएलिटी शो आयोजित कराया जा रहा है। इस शो का नाम ‘सांइस टैलेंट मास्टर’ रखा गया है। 

प्रमुख आयोजकों में शामिल जिला विज्ञान क्लब के समनवयक शनि कुमार ने बताया कि ऐसा शो पहली बार किया जा रहा है। बच्चों को फिल्म मेंकिग, खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट की जांच, अपशिष्ट प्रंबधन की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें कक्षा आठ से लेकर एमएससी कर रहे बच्चे तक शामिल हैं। 

बादां जिले की रहने वाली आठवीं कक्षा की छात्रा अंजली चंद्रा (16 वर्ष) इस शो में खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट के लिए प्रशिक्षण ले रही हैं। अंजली बताती हैं, “आजकल हर खाने वाली चीज में मिलावट होती है। मिलावट कितनी ज्यादा और कितनी कम है इसका पता मैं लगाती हूं। बाजार में खाने के लिए बिकने वाली कई चीजों को खरीदते और फिर उसे लैब में टेस्ट करके कितने अनुपात में मिलावट है इसे जांचते हैं”। 

उत्तर प्रदेश की काउंसिल ऑफ सांइस एंड टेक्नोलॉजी के विभाग द्वारा जिले में इसे पायलेट प्रोजेक्ट के रुप में चलाया जा रहा है, जिसमें 60 से भी ज्यादा छात्र प्रशिक्षित किए जा रहे हैं। 

रियलिटी शो में तीन सेक्शन बनाए गए हैं। तीनों सेक्शन में 20-20 बच्चों का ग्रुप बनाया गया है सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है। 

बीएससी की छात्रा आरती देवी (21 वर्ष) खाद बनाना सीख रही हैं। वो बताती हैं, “खेतों में प्रयोग होने वाली खाद को किस तरह बनाया जाता है इसकी ट्रेनिंग ले रहे हैं जिन सामानों को नष्ट नहीं किया जा सकता है जैसे प्लास्टिक इन सब का कैसे किसी और काम में प्रयोग कर सकते हैं, ये भी सीख रहे हैं।”  

इस शो की चयन प्रक्रिया के बारे में शनि कुमार बताते हैं, “इसके लिए जिले में पहले प्रचार-प्रसार किया। उसके बाद जिले स्तर पर ऑडिशन कराया गया। जिस क्षेत्र में बच्चे को रुचि है उसमें उस बच्चे का चयन किया।” 

इस रिएलिटी शो में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले बच्चों के लिए एक लाख रुपए का पुरस्कार रखा गया है। शनि बताते हैं, “अगर यह सफल रहा है तो इसे कई जगहों पर शुरु किया जाएगा।”                

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