अब चम्बल के युवा सीखेंगे फोटोग्राफी के हुनर, सुनील जाना की याद में खुलेगा फोटोग्राफी स्कूल

Divendra SinghDivendra Singh   24 Jun 2017 7:01 PM GMT

अब चम्बल के युवा सीखेंगे फोटोग्राफी के हुनर, सुनील जाना की याद में खुलेगा फोटोग्राफी स्कूलजल्द ही चंबल में सीखेंगे फोटोग्राफी के गुर।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। डाकुओं की शरणस्थली और पिछड़े बीहड़ी चम्बल इलाके को अब दूसरी वजहों से भी जाना जाएगा। हाल ही चम्बल इलाके में पांच नदियों के संगम पर चम्बल संसद का आयोजन करने वाले शाह आलम यहां देश के महान फोटोग्राफर रहे पदम् श्री-पदम् विभूषण से सम्मानित सुनील जाना की याद में 'सुनील जाना स्कूल ऑफ़ फोटोग्राफी' के नाम से स्कूल खोलेंगे।

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स्कूल में चम्बल के दूरदराज गाँवों के युवाओं व लोगों को फोटोग्राफी के गुर सिखाये जाएंगे। फोटोग्राफी स्कूल का मकसद सुनील जाना को आदरांजलि देने के साथ ही चम्बल की समस्याओं को तस्वीरों के माध्यम से बाहर लाना भी होगा।

झांसी आये अवाम का सिनेमा नाम से देश भर में क्रांतिकारियों से सम्बंधित अहम् दस्तावेजों और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का फेस्टिवल करने वाले एक्टिविस्ट शाह आलम ने महारानी लक्ष्मी बाई किले से इसकी शुरुआत की है। सुनील जाना की पांचवीं बरसी के मौके पर शाह आलम ने बताया, "सुनील जाना ने देश भर में ज़बरदस्त फोटोग्राफी की और हालात दुनिया के सामने लाये। 2012 में उनका निधन हो गया।

सुनील जाना पर ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी ने दो किताबें तक प्रकाशित की हैं। इसके बाद भी सुनील जाना को देश के लिए और खासकर दस्तावेज़ी फोटोग्राफी करने वाले लोग ही नहीं जानते हैं। डेढ़ दशक से अधिक समय से भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन पर काम करते हुए सुनील जाना को दस्तावेजों की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ा। पद्मश्री व पदम् विभूषण से सम्मानित किया जा चुका था।"

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सुनील जाना तीस के दशक से 90 के दशक तक, साठ वर्ष तक वे फ़ोटोग्राफ़ी करते रहे। इन साठ वर्षों में उन्होंने आज़ादी के आंदोलन, किसान-मज़दूरों के संघर्षों, भारत के प्राचीन स्थापत्य से लेकर आज़ाद भारत के तीर्थ कहे जाने वाले उद्योगों, बांधों, कल-कारखानों, रेलवे लाइनों तक के निर्माण को, राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक-वैज्ञानिक शख्सियतों से लेकर देश के विभिन्न आदिवासी समुदायों, दंगों, अकाल, लाशों के ढेर, विद्रोह, विभाजन, विस्थापन से लेकर मनुष्य के श्रम को उन्होंने अपनी तस्वीरों में दर्ज किया।

शाह आलम ने बताया, "समाज-गाँव गिराव में छोटी-छोटी कार्यशालाओ से ही नई पीढ़ी से संवाद करने और उनके सुख- दुख में शामिल होने का बेहतर मौका मिलेगा। शाह आलम के अनुसार चम्बल में फोटग्राफी सिखाने के लिए देश-विदेश के नामी फोटोग्राफर आएंगे।”

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