आपकी फसल को कीटों से बचाएंगी ये नीली, पीली पट्टियां

आपकी फसल को कीटों से बचाएंगी ये नीली, पीली पट्टियांस्टिकी ट्रैप

लखनऊ। अक्सर किसान अपनी फसल में लगने वाले कीटों से परेशान रहते हैं, जिसके लिए तरह-तरह के कीटनाशक का इस्तेमाल करते रहते हैं। लेकिन किसान बिना कीटनाशक के इस्तेमाल के विना खर्चे के अपनी फसल को कीटों से बचा सकते हैं। उसके लिए किसन को सिर्फ कुछ नीली, पीली पट्टियों की ज़रूरत पड़ेगी, जिसे स्टिकी ट्रैप कहतै हैं।

आधुनिक कृषि उत्पादन पद्धति में किसी नाशीजीव का नियंत्रण करने के लिए कम से कम रासायनिक छिड़काव करने का सुझाव दिया जाता है तथा यांत्रिक नियंत्रण के साधनों जैसे फेरोमोन ट्रैप (गंधपांस), प्रकाश प्रपंच (लाइट ट्रैप), ब्लू स्टिकी ट्रैप, येल्लो स्टिकी ट्रैप एवं बर्ड पर्चर (चिड़ियों का बैठक) आदि का इस्तेमाल अगर सही समय पर किया जाय तो फसल नुकसान को 40 से 50 प्रतिशत कम किया जा सकता है।

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क्या होता है स्टिकी ट्रैप

स्टिकी ट्रैप दरअसल पतली सी चिपचिपी शीट होती है। यह फसलों की रक्षा बिना किसी रसायन के इस्तेमाल से करती है और रसायन के मुकाबले सस्ती भी रहती है। स्टिकी ट्रैप शीट पर कीट आ कर चिपक जाते हैं जिसके बाद वह फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। स्टिकी ट्रैप कई तरह की रंगीन शीट होती हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए खेत में लगाई जाती है। इससे फसलों पर आक्रमणकारी कीटों से रक्षा हो जाती है और खेत में किस प्रकार के कीटों का प्रकोप चल रहा है इसका सर्वे भी हो जाता है।

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घर पर बनाएं स्टिकी ट्रैप

यह बाजार में भी बनी बनाई आती हैं और इन्हें घर पर भी बनाया जा सकता है। इसे टीन, प्लास्टिक और दफ्ती की शीट से बनाया जा सकता है। अमूमन यह चार रंग के बनाए जाते है, पीला, नीला, सफेद और काला। इसे बनाने के लिए डेढ़ फीट लम्बा और एक फीट चौड़ा कार्ड बोर्ड, हार्ड बोर्ड या इतने ही आकार का टीन का टुकड़ा लें। जिस पर सफेद ग्रीस की पतली सतह लगा दें। इसके अलावा एक बांस और एक डोरी की जरूरत होगी जिस पर इस स्टिकी ट्रैप को टांगा जाएगा।

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इसे बनाने के लिए बोर्ड को लटकाने लायक दो छेद बना ले और उस पर ग्रीस की पतली परत चढ़ा दे। एक एकड़ में लगाने के लिए करीब 10-15 स्टिकी ट्रैप लगाएं। इन ट्रैपों को पौधे से 50-75 सेमी ऊंचाई पर लगाएं। यह ऊंचाई कीटों के उड़ने के रास्ते में आएगी। टीन, हार्ड बोर्ड और प्लास्टिक की शीट साफ करके बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। जबकि दफ्ती और गत्ते से बने ट्रैप एक दो इस्तेमाल के बाद खराब हो जाते हैं। ट्रैप को साफ करने के लिए उसे गर्म पानी से साफ करें और वापस फिर से ग्रीस लाग कर खेत में टांग सकते हैं।

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कैसे काम करता है स्टिकी ट्रैप

हर कीट किसी विशेष रंग की ओर आकर्षित होता है। अब अगर उसी रंग की शीट पर कोई चिपचिपा पदार्थ लगा कर फसल की ऊंचाई से करीब एक फीट और ऊंचे पर टांग दिया जाए तो कीट रंग से आकर्षित होकर इस शीट पर चिपका जाता है।

स्टिकी ट्रैप के रंग

पीला स्टिकी ट्रैप

सफेद मक्खी, ऐफिड और लीफ माइनर जैसे कीटों के लिए बनाया जाता है। यह ज़्यादातर सब्जियों की फसल में लगते हैं।

नीला स्टिकी ट्रैप

नीला रंग थ्रपिस कीट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह कीट धान, फूलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचाता है।

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सफेद स्टिकी ट्रैप

फ्लाई बीटल कीट और बग कीट के लिए इस रंग के स्टीकी ट्रैप का इस्तेमाल किया जाता है। यह कीट मुख्यता फलों और सब्जियों में लगते हैं।

काला स्टिकी ट्रैप

अमेरिकन पिन वर्म के लिए ट्रैप प्रयोग होता है और ज्यादातर टमाटर पर लगने वाले कीटों का हमला रोकने के लिए लगाया जाता है।

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