बच्चे को सिर्फ पंजीरी मिलती है सरैंया गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र पर

बच्चे को सिर्फ पंजीरी मिलती है सरैंया गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र परgaonconnection

लखनऊ। सरैंया गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र पर जब पिछले वर्ष सांसद और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव आईं, तो रातोरात केंद्र पर प्लास्टिक की मेज कुर्सी लगावा दी गई थीं। उनके आने के बाद दो महीने तक केंद्र पर आने वाले बच्चों को दलिया, हलवा और खिचड़ी भी दी गई पर उसके बाद से बच्चों की थाली में सिर्फ पंजीरी ही परोसी जा रही है।

सरैंया गाँव की महिमा (37 वर्ष) अपनी तीन वर्ष की बेटी मुन्नी को गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र भेजती हैं। महिमा बताती हैं, “हम पिछले साल से अपनी बच्ची को आंगनबाड़ी में भेज रहे हैं। पहले खिचड़ी मिलती थी पर अब या तो पंजीरी मिलती है या फिर पंजीरी के लड्डू।’’ सरैंया गाँव के रहने वाले राजू आंगनबाड़ी कार्यकत्री पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि केंद्र पर आई पंजीरी की बोरियों में से कुछ बोरियों को मैडम व्यापारियों को बेच देती हैं, इसलिए बच्चों को कम मात्रा में पंजीरी मिलती है। वहीं केंद्र पर तैनात श्रीमती देवी ने बताया कि बच्चों को पका पकाया खाना देने के लिए हमें विभाग से 2,250 रुपए मिलते थे पर पिछले छह महीने से कोई भी पैसा नहीं मिला है, इसलिए सिर्फ पंजीरी ही देते हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग के मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक बाल विकास परियोजना के तहत प्रदेश में कुल 821 विकास खण्डों के अंतर्गत आने वाले गाँवों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसके तहत सरकार एक लाख 53 हज़ार आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को बांटे जाने वाले पोषाहार पर प्रतिवर्ष 7000 करोड़ रुपए खर्च कर रही है पर धरातल पर यह योजना कारगर नहीं हो पा रही है।

बाराबंकी जिले के लकौड़ा गाँव में भी आंगनबाड़ी केंद्र सुचारू ढंग से नहीं चल पा रही है। गाँव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री महीने में एक बार ही आती हैं और वो भी बहुत कम समय के लिए। कार्यकत्री के ना आने से गाँव की महिलाएं अपने बच्चों को दूसरे गाँव के केंद्र भेज रही हैं। जहां उन्हें सिर्फ पंजीरी ही मिलती है। 

लकौड़ा गाँव की ऊषा सिंह (46 वर्ष) बताती  हैं, ‘’गाँव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं, इसलिए महीने की 25 तारीख को ही अनीता बहनजी (आंगनबाड़ी कार्यकत्री) आती हैं, तभी पोषाहार बांटा जाता है।” प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण करने के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारियों को वाहन की सुविधा उपलब्ध कराती है। इसमें नियमानुसार हर सप्ताह आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण किया जाता है। इसके बावजूद केंद्र पर कार्यकत्रियां अपने मनमुताबिक आती हैं।

प्रदेशभर में ढाई लाख आंगनबाड़ी केंद्र

उत्तर प्रदेश में बाल विकास और पुष्टाहार परियोजना के तहत चल रहे आंगनबाड़ी प्रोग्राम के लिए प्रदेश भर में क़रीब 2.50 लाख आंगनबाड़ी खोले गए हैं, जिसमें आने वाले बच्चों को रोज़ाना पुष्टाहार जैसे मूंग की खिचड़ी, अरहर की खिचड़ी, पोहा-हलवा या दलिया दिया जाता है। इसके लिए आंगनबाड़ी चलाने वाले को हर महीने 3,000 रुपए भी मिलते हैं, पर इसके बावजूद केंद्रों पर केवल पंजीरी ही दी जा रही है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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