भाजपा ने उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष का इस्तीफा मांगा

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देहरादून (भाषा)। उच्चतम न्यायालय द्वारा अरुणाचल प्रदेश के मामले में दिये गये निर्णय से उत्साहित भाजपा ने आज उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर राज्य के लिये दिये गये शीर्ष न्यायालय के फैसले से साफ हो गया है कि अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा होने तक अध्यक्ष सदन के किसी सदस्य को अयोग्य नहीं ठहरा सकते।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने यहां जारी एक बयान में हाल में उच्चतम न्यायालय द्वारा अरुणाचल प्रदेश के संबंध में दिये गये निर्णय को उत्तराखंड के अयोग्य घोषित किये गये विधायकों के लिये रसंजीवनी बताया और कहा कि इससे अरुणाचल के समान उत्तराखंड में भी घड़ी की सुइयां उल्टी पीछे घूम सकती हैं।

उच्चतम न्यायालय के फैसले के परिप्रेक्ष्य में उत्तराखंड के विधायकों के खिलाफ अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल की कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठाते हुए भट्ट ने पूछा कि राज्य विधानसभा के अंदर असंवैधानिक आचरण के लिये अपने खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा होने से पहले वह या उपाध्यक्ष कैसे सदस्यों के निष्कासन की प्रक्रिया शुरु कर सकते हैं।

कुंजवाल पर संवैधानिक नियमों को परे रखते हुए असंतुष्ट विधायकों को अयोग्य घोषित कर येनकेन प्रकारेण हरीश रावत सरकार को बचाने का आरोप लगाते हुए भट्ट ने कहा कि कुंजवाल और उपाध्यक्ष अनुसूया प्रसाद मैखुरी दोनों को तत्काल अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिये। उन्होंने कहा, ''लोकतंत्र की हत्या का जो अपराध उन्होंने (कुंजवाल और मैखुरी) ने किया है, अपना त्यागपत्र देकर वे उसका आंशिक पश्चाताप तो कर सकते हैं।''

राज्य विधानसभा में गत 18 मार्च को विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग को अस्वीकार किये जाने के बाद 26 भाजपा विधायकों और तत्कालीन कांग्रेस के नौ बागी विधायकों ने अध्यक्ष कुंजवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दे दिया था। हालांकि, इसका निपटारा होने से पहले ही अध्यक्ष कुंजवाल ने नौ बागी कांग्रेस विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी थी।

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