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भारत के एकमात्र संस्कृत अख़बार के सामने अस्तित्व का संकट

भारत के एकमात्र संस्कृत अख़बार के सामने अस्तित्व का संकटgaonconnection

नई दिल्ली (भाषा)। मौजूदा समय में देश का एकमात्र संस्कृत दैनिक होने का दावा करने वाला ‘सुधर्मा' गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है, जिस कारण अख़बार के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। अगले महीने यह अख़बार अपने 46 वर्ष पूरे कर लेगा।

मैसूर से निकलने वाले दैनिक के संपादक ने केंद्र से सहायता मांगी है लेकिन अब भी जवाब मिलना बाकी है। इस अख़बार की अभी 3,000 प्रतियां निकलती हैं। अख़बार के संपादक संपत कुमार ने बताया, ‘‘हम लोगों को मदद चाहिए। इस अख़बार का वार्षिक सदस्यता शुल्क महज 400 रुपए है और प्रतियों की बिक्री में कमी आयी है। हम लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ओर गृह मंत्री राजनाथ सिंह को लिखा है लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।''

अब उन लोगों ने समाचार पत्र में एक अपील प्रकाशित की है जिसमें आम लोगों से चन्दा मांगा गया है। अपील में कहा गया है, ‘‘इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आज के दौर में अख़बारों को जिन्दा रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। हमारे पाठक और शुभचिंतक बिक्री को बढ़ाने और अख़बार के पाठकों की संख्या में वृद्धि को लेकर तमाम तरीके के सुझाव दे रहे हैं और अपने विचार रख रहे हैं।''     

इसमें साथ ही कहा गया, ‘‘हम लोगों ने अख़बार को नया स्वरुप देने और सुधर्मा पत्रिका (अर्धवार्षिक) को निकालने के बारे में सोचा है। इसके लिए हम लोगों को वर्तमान समय के मुद्रण उपकरण और अन्य सामानों की जरुरत पड़ेगी।''

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