बिल्हौर के अस्तित्व को लेकर बवाल

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कानपुर। लोकसभा में सुशीला रोहतगी, अरुण नेहरू सरीखे लोकसभा सदस्य देने वाली बिल्हौर लोकसभा का अस्तित्व तो 2004 के आम चुनाव से पहले हुए परिसीमन में संकट में पड़ गया लेकिन अब उत्तर प्रदेश की सपा सरकार बिल्हौर का भूगोल बदलकर सत्ता की रोटी सेक रही है।

तहसील के रूप में बचे बिल्हौर को भी अब मिटाया जा रहा है। यहां के डेढ़ सैकड़ा से अधिक गाँवों को अब कन्नौज से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। चुनावी साल में बिल्हौर जल रहा है। वकील से लेकर राजनेता तक और छात्र से लेकर व्यापारी तक सड़क पर उतर आये हैं। 

बावजूद इसके सत्ता का सुख भोग रही मंत्री अरुण कुमारी कोरी समेत अन्य सपाई चुप्पी साधे है। डीएम से लेकर एसडीएम और तहसीलदार से लेकर लेखपाल तक इस जल रहे बिल्हौर की आग से ताप रहे हैं।अलबत्ता सरकार के परिसीमन में भले ही बिल्हौर तहसील को कानपुर से अलग कर दिया जाये लेकिन बिल्हौर की आवाम आगामी चुनाव में सपा को सबक सिखाने के लिए मन बना रही है।

कहीं एनटीपीसी तो निशाना तो नहीं 

बिल्हौर तहसील को मिले पावर प्लांट पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। वकीलों और क्षेत्र की जनता को यह आशंका है की कन्नौज को बिजली देने के लिए बिल्हौर के प्लांट को हड़पने की नियत से सपा सरकार तहसील को कन्नौज जिले में जोड़ना चाहती है। हालांकि सपाई इसे बकवास बता रहे है।

क्या है मामला

कानपुर नगर की सर्वाधिक राजस्व देने वाली बिल्हौर तहसील के साथ कई बार छेड़छाड़ की गई है। कभी कानपुर देहात से जोड़ा गया तो कभी कानपुर नगर में संबद्ध किया गया लेकिन अब इस तहसील के 168 गॉवों को कन्नौज जिले में जोड़ने की कवायद चल रही है। बिल्हौर तहसील को कन्नौज में जोड़ने की भनक लगते ही 27 अप्रैल से बार एशोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह की अगुवाई में आन्दोलन चल रहा है। वकीलों के प्रयास से अब इस आन्दोलन में भाजपा, बसपा, कांग्रेस व्यापारी और छात्र नेता कूद पड़े हैं। आन्दोलन के चलते पिछले 20 दिनों से तहसील का काम काज प्रभावित है। 

रिपोर्टर - सत्येन्द्र मिश्रा

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