कहानीघर : पढ़िए बच्चों की कहानी ‘आउट रे...’

कहानीघर : पढ़िए बच्चों की कहानी ‘आउट रे...’बच्चों की कहानी आउट रे

महेंद्रू घाट छोड़ पर सुशील और इंजीनियरिंग कॉलेज छोड़ पर अमितेस, करीब सवा घन्टा से मोर्चा संभाले हुए था!

हमेशा थर्ड डाउन में उतरने वाला अमितेष, आज कोच के कहने पर ओपनिंग कर रहा था। मुकाबला जोरदार चल रहा था, सेकंड इनिंग्स, तीसरा दिन। उ लोग दो सौ बयालीस पर छोड़ा, एक सेंचुरी भी उसमें। उस समय पांच दिन का होता था।

यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट मे सब कॉलेज अलग अलग खेलता लेकिन सालों भर पटना कॉलेज वाला लड़का सब, वेस्टर्न क्लब सरीफ कॉलोनी से।

कभी कभी, गर्दनीबाग से एक आध प्लेयर भाड़ा पर भी आता था। मैच भी होते रहता था खूब।

स्टेडियम में कोचिंग चलता था। बहुत लड़का वहां से सी के नायडू खेला, एक दो रणजी भी ।

अंदर नाइन्टीन में ऑस्ट्रेलिया खेल आया था सकील!

सफेद शर्ट पर उजला हाफ स्वेटर, वी-गला पर ब्लू कलर का धारी और टेरेलिन का व्हाइट पैंट। कपड़ा वाला जूता, बीडीएम का आयल बैट। सपना था बॉस!

साइकिल से रोज शाम प्रैक्टिस पर जाते थे सब। सर का गाली सुनने का मतलब, इस बार सिलेक्शन पक्का।

पटना कॉलेज टीम में आधा दर्जन केला डेली मिलता था प्रैक्टिस पर, स्पोर्ट्स इंचार्ज स्पेशल करवाये थे, वी सी से कहकर।

अमितेष अच्छा खेल रहा था, अठहत्तर पर था, मैदान पूरा भरा हुआ। हमलोग इकबाल होस्टल के छत्ता पर से देख रहे थे।

कमेंट्री भी पूरा स्पीड पकड़ते हुए...

“ बहुत ही दरसनीय और उम्दा सौट, अमितेष का, और ये चार रन के लिए, अमितेष का निजी स्कोर बेरासी, और कुल स्कोर, एक सौ बयालीस। बहुत ही अच्छा प्रदर्शन बल्लेबाजी का, अमितेष...!

कांटा कांटा का मुकाबला... एक और रन...

आज अमितेष का सेंचुरी की संभावना...

बैट्समैन प्रहार पर प्रहार कर रहे हैं!

अगला गेंद, महेंद्रू छोड़ से, बी एन कॉलेज के अनुभवी ऑफ़सपिनर संजय कुमार पप्पू का....

पप्पू का गेंद, और ये अमितेष का स्क्वायर कट डिफ्फेन्स! वाह ! और एक रण के लिए, अमितेष सन्तानवे पर!

ओवर की आखरी गेंद, देखिये और पप्पू फेंका लोल्लिपोप!

अमितेष का स्वीप, गेंद हवा में, छह तल्ला पार....

अरे!!

ले लोट्टा! आउट रे!

कैच आउट! .....अमितेष सन्तानवे पर, पटना कॉलेज के लिए निराशा, मैं कमेंटेटर प्रेम कुमार, आपको आंखों देखा हाल सुनाते हुए...

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