बुजुर्ग कैदियों को जेल में रखने पर हाईकोर्ट सख्त

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इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने प्रदेशभर की जेलों में बंद 80 साल से ज्यादा की उम्र के सभी शारीरिक रूप से दुर्बल कैदियों की समय पूर्व रिहाई न करने पर दुख जताया है। कोर्ट ने कहा है, एक तरफ जेलों में कैदियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिनको मूलभूत सुविधाएं भी सरकार नहीं दे पा रही है। वहीं, दूसरी तरफ बुजुर्ग कैदियों को जबरदस्ती जेलों में बंद रखा गया है।

कैदियों की रिहाई पर मॉनीटरिंग की बनेगी नीति

इसको लेकर कोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से पूछा है, क्या ऐसे कैदियों की समय पूर्व रिहाई की कोई नीति है। अगर नहीं है तो सरकार ऐसी नीति तैयार करे, ताकि कैदियों की रिहाई की मॉनीटरिंग होती रहे। कोर्ट ने केंद्रीय कारागार नैनी में बंद 87 साल के रामेश्वर की रिहाई के संबंध में बांदा के डीएम को अपनी रिपोर्ट एक हफ्ते में राज्य सरकार को भेजने का निर्देश दिया है। प्रदेश सरकार को एक महीने में रिहायी पर फैसला लेने का आदेश दिया है। यह आदेश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने दिया है।

कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से मांगा जवाब

हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया था कि रामेश्वर को हत्या मामले में 14 दिसंबर 1984 को आजीवन कारावास की सजा हुई। बांदा से इन्हें इलाहाबाद भेजा गया है, जहां कैद है। जेल अधीक्षक नैनी ने बताया, इनका ऑपरेशन हुआ है। वाकर के सहारे चलते हैं। 12 अगस्त 15 को जेल अधीक्षक ने बांदा के डीएम को प्रस्ताव भेजा, लेकिन कोई निर्णय न हो पाने पर रिहायी नहीं हो पाई। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से इस संबंध में सरकारी नीति की जानकारी मांगी। मामले पर अगली सुनवाई 11 मई को होगी।

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