बुजुर्गों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

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लखनऊ। राजधानी में रहने वाले बुजुर्गों के लिए खतरे बढ़ते ही जा रहे हैं। अकेले घरों में रहने वाले बुजुर्ग बदमाशों के निशाने पर हैं। काकोरी इलाके में हुई दोहरे हत्याकांड के बाद पुलिस के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

कृष्णानगर के आजादनगर स्थित फौजी कालोनी में रहने वाले बुजुर्ग सेवानिवृत्त रेलवेकर्मी कृष्णदत्त पांडेय की हत्या के बाद काकोरी थाना क्षेत्र के बरावन खुर्द मछली मंडी के पीछे शेखपुरवा निवासी कल्लू नेता (65 वर्ष) और उनकी पत्नी फिरदौस फातिमा (45 वर्ष) के शव सोमवार को उनके ही घर में मिली थे। पुलिस इस दोहरे हत्याकांड में किसी करीबी के ही होने की आशंका जता रही है। इससे पहले भी जिले में बुजुर्गों की हत्या के मामले सामने आ चुके हैं।

‘अपनों’ से रहा है ज्यादा खतरा

एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने राजधानी की बागडोर हाथ में लेते समय में भी बुजुर्गों की सुरक्षा और देखरेख के लिए एक टीम का गठन किया था। घरों में रहने वाले किरायेदारों और नौकरों के स्त्यापन के लिए फॉर्म भी जारी करवाऐ थे, लेकिन यह अभियान भी परवान नहीं चढ़ सका। इन घटनाओं के बारे में एसएसपी राजेश पांडेय कहते हैं, “इन हत्याओं के आरोपी ज्यादातर वही निकलते हैं, जिन पर सबसे ज्यादा परिवार के लोग भरोसा करते हैं। काकोरी के दोहरे हत्याकांड में भी किसी करीबी के ही संलिप्त होने की आशंका है,पुलिस तफ्तीश कर रही है।”  वर्ष 2005 में तत्कालीन एसएसपी नवनीत सिकेरा ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए खाका तैयार किया था। लेकिन उनके जाते ही ये कवायद थानों में सिर्फ बैठकों तक सिमट गई थी।

रिपोर्टर - ज्योति सक्सेना

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