चीन-पाकिस्तान की हरकतें भारत विरोधी

चीन-पाकिस्तान की हरकतें भारत विरोधीgaonconnection

हाल ही में चीन के द पीपुल्स डेली ऑनलाइन ने लगभग दर्जनभर तस्वीरें प्रकाशित कीं। इन तस्वीरों में दिखाया गया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और शिनजियांग प्रांत की सीमा पर चीन और पाकिस्तान के सशस्त्र सैनिक संयुक्त रूप से पैदल गश्त कर रहे हैं।

सैनिकों में पाकिस्तान की सीमा पुलिस बल और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के फ्रंटियर रेजीमेंट और पाकिस्तान बॉर्डर पुलिस के सैनिक शामिल हैं। दोनों देशों की इस संयुक्त सैनिक गश्त का कारण यह बताया गया कि 100 से अधिक उइगर मुसलमान इस्लामी स्टेट (आईएसआईएस) में शामिल होने के लिए इस अशांत क्षेत्र से भाग गए हैं लेकिन कश्मीर में इस समय अलगाववादियों द्वारा पैदा किए गए हालात और पाकिस्तान द्वारा उसका समर्थन, आतंकवादी बुरहान वानी के मौत पर पाकिस्तान द्वारा काला दिवस मनाने का फैसला और अब चीन-पाकिस्तान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में संयुक्त सैनिक गश्त, ऊपर बताए गए कारण से भिन्न कुछ और ही संकेत देती दिख रही है।

चूंकि भारत ने चीन सीमा तक अपने टैंक भेजें हैं, जो इस बात का संकेत है कि भारत इस संयुक्त गश्त को सहज रूप में नहीं ले रहा है। फिर भी प्रश्न यह उठता है चीन और पाकिस्तान की इस संयुक्त सैन्य गश्त के निहितार्थ क्या हैं? क्या यह गश्त उन उइगर मुसलमानों की तलाश के लिए की जा रही है जिनके बारे में बताया जा रहा कि वो इस्लामी स्टेट में शामिल हो गए हैं या फिर इसकी असल वजह कुछ और है?

पिछले दिनों आई द न्यू अमेरिका फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है चीन की सरकार द्वारा कुछ मुस्लिम प्रथाओं को प्रतिबंधित करना या उन पर सख्त नियंत्रण लगाना, उइगर मुसलमानों का इस्लामी स्टेट की ओर रुझान का मुख्य कारण बना। ध्यान रहे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के मुसलमानों से कहा था कि वे अपने धर्म का पालन चीन के समाज एवं निर्देश के तहत करें। इन निर्देशों के जरिए ही मुसलमानों को दाढ़ी बढ़ाने, रमजान में रोजे रखने पर रोक लगा दी गयी थी। बताया जा रहा है इसके फलस्वरूप उइगर मुसलमान इस्लामी स्टेट की ओर आकर्षित हुए। चूंकि ऐसा दुनियाभर में हो रहा है, इसलिए यह संभव हो सकता है चीन सरकार की निरंकुशता लम्बे समय से उइगरों के साथ किए जा रहे भेदभाव और शिनजियांग में चीन सरकार द्वारा जनसांख्यिकी असंतुलन की कोशिशोें के परिणामस्वरूप उइगरों का इस्लामी स्टेट के प्रति आकर्षण बढ़ा हो और उन्होंने ऐसा कदम उठाया हो।

उन 100 मुसलमानों की तलाश में चीन और पाकिस्तान के सशस्त्र बलों को संयुक्त रूप से गश्त करनी पड़ रही है, यह तर्क कुछ हजम नहीं हो रहा। सवाल यह उठता है क्या चीन-पाकिस्तान की सेनाओं की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सीमा से सटे इलाकों में गश्त और भारत में कश्मीर में अस्थिरता के उपजे हालातों का एक साथ निर्मित होना एक सामान्य घटना मात्र है या फिर इनके बीच कोई अंतर्सम्बंध भी हो सकते हैं। ऐसा तो नहीं कि चीन और पाकिस्तान वर्तमान समय में कश्मीर में उत्पन्न अस्थिरतापूर्ण हालातों का लाभ उठाना चाहते हैं। हालांकि चीन के सैनिकों की इस क्षेत्र में गतिविधियां लगभग दो वर्षों से लगातार देखी जा सकती हैं, लेकिन संयुक्त गश्त पहली बार दिख रही है। दिक्कत यहां पर है कि पीपुल्स डेली उस पूरे इलाके को चीन पाकिस्तान बॉर्डर कह रहा है जबकि भारत ने यह साफ कर दिया है कि शिनजियांग बॉर्डर वाला क्षेत्र केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आता हैै।

दरअसल भारत-चीन के बीच अक्साईचिन को लेकर लगभग 4000 किमी लंबी सीमा पर विवाद है। सीमा रेखा की अस्पष्टता का फायदा उठाते हुए अनेक अवसरों पर चीन की पीपुल्स आर्मी के सैनिक भारतीय सीमा में प्रवेश कर यह जताने का प्रयास करते रहे हैं कि वह इलाका चीन का है। अभी कुछ समय पहले ही अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में बताया गया था भारत से सटी सीमा पर चीन अपनी सैन्य मौजूदगी में तेजी ला रहा है। शायद संयुक्त गश्त उक्त चीनी तैयारियों का अगला कदम हो? यदि वर्ष 2014 और 2015 में हुई चीनी घुसपैठ सम्बंधी घटनाओं पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि चीन ने भारतीय सीमा में 2014 में 334 बार और 2015 से अब लगभग 150 बार घुसपैठ की है।

इससे पहले या बाद की कुछ अन्य अनगिनत घटनाएं हैं जो चीन की दबंगई को व्यक्त करती हैं। चीन का भारत सीमा के अन्दर लद्दाख  क्षेत्र के पास चट्टान पर अपना नाम लिखना, चीनी हेलीकॉप्टर का भारतीय वायु क्षेत्र में डेढ़ किमी अंदर तक प्रवेश करना, लद्दाख के दौलतबेग ओल्डी क्षेत्र में चीनी सैनिकों का टेंट लगाना आदि। ये समस्त गतिविधियां पीपल्स आर्मी ने अकेले संपन्न कीं, पाकिस्तानी सेना उसके साथ नहीं दिखी। इसलिए अब यदि दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त गतिविधि में दिख रही है, तो इसके गम्भीर निहितार्थ भी हो सकते हैं।

इस गतिविधि का एक कारण तो भारत-रूस व भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास हो सकता है जो इसी वर्ष अगस्त एवं सितम्बर माह में होना है। उसे देखते हुए चीन यह प्रदर्शित करना चाहता है पाकिस्तान के साथ मिलकर उसे काउंटर करने की ताकत रखता है। भारतीय सेना के इस युद्धाभ्यास से भारत, रूस और अमेरिका के बीच संतुलन कायम होने की सम्भावना बढ़ी है, यह चीन के लिए अखरने वाला पक्ष है। कारण यह है कि अब चीन इस निष्कर्ष पर पहुंच चुका है कि रूस अब भारत के साथ नहीं है। भारतीय सेना के सूत्रों के अनुसार रूस के साथ युद्धाभ्यास ‘इंद्र-2016’ 22 अगस्त से 1 सितंबर तक (सर्गीयेवस्की में) चलेगा जिसकी थीम है- ‘ज्वाइंट ग्रुप ऑफ फोर्सेज अंडर यूएन मेनडेट टू कैरीऑउट ऑप्स फॉर एलीमिनेशन ऑफ इंटरनेशनल टेररिस्ट’ होगी। इस अभ्यास के पांच चरणों में चौथा और पांचवा चरण बेहद अहम होगा जिसमें युद्धभूमि में दुश्मन से मुकाबला करने की रणनीति और किसी भी परिस्थिति में दुश्मन को नेस्तनाबूद करने की फौजी तैयारियों पर जोर दिया जाएगा। सितम्बर में अमेरिका के साथ युद्धाभ्यास होगा जिसमें दोनों देशों की सेनाएं काउंटर टेररिज्म और पहाड़ी इलाकों में आतंकियों के खिलाफ लड़ाई पर साझा अभ्यास करेंगी। यही वजह है कि वह भारत को उकसाना चाहता है।

फिलहाल भारत-चीन सीमा के पास भारतीय सेना की ओर से युद्धक टैंकों की तैनाती की चीनी मीडिया ने आलोचना की है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए भारत-चीन सीमा के पास लगभग 100 टैंक तैनात किए जाने की खबर पर लोगों का ध्यान गया है, क्योंकि ज्यादा चीनी कंपनियां भारत में अपना निवेश बढ़ाने के बारे में सोच रही हैं। इसमें कहा गया है कि हालांकि यह बात उलझाने वाली है कि चीन की सीमा के पास टैंक तैनात करके भी भारत चीनी निवेश हासिल करना चाहता है। 

दरअसल चीन दोहरा खेल रहा है। एक तरफ वह स्वयं पाकिस्तान के साथ मिलकर पीओके में भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहता है और दूसरी तरफ वह भारत की काउंटरिंग पावर को आर्थिक नुकसान की धमकी देकर कमजोर करना चाहता है। यही वजह है कि ग्लोबल टाइम्स को यह बताना पड़ गया है कि वर्ष 2015 में भारत में चीनी निवेश छह गुना बढ़कर 87 करोड़ डॉलर हो गया है। लेकिन पूर्वी लद्दाख में भारत ने लगभग 100 टैंक तैनात कर चीन को यह संदेश दे दिया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण  और आक्रामक सैन्य गतिविधियों के जरिए चीन जो हरकतें कर रहा है, भारत ने अब उस पर अपने परम्परागत नजरिए एवं व्यवहार में परिवर्तन लाना शुरू कर दिया है।

(लेखक राजनीतिक व आर्थिक विषयों के जानकार हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)  

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