Read latest updates about "संवाद" - Page 1

  • एलर्जी होने की कोई एक वजह नहीं, कई कारण हो सकते हैं

    एलर्जी वास्तव में हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का ऐसा असर है जिसकी वजह से हमारे शरीर के संपर्क में आने वाले कुछ पदार्थों और रसायनों के प्रति संवेदनशीलता बहुत तेजी से दिखती है और कई बार इस संवेदनशीलता का असर काफी लंबे समय तक दिखायी देता है। जिस पदार्थ या रसायन की वजह से शरीर में एलर्जी होती है...

  • "महादेव का घर खंडहर बनाने से चुनाव हारी भाजपा"?

    उत्तर प्रदेश के गंगा तट पर बसे वाराणसी, या कहें कि बनारस शहर के लगभग हर घर में मंदिर हैं. एक अनुमान के मुताबिक बनारस में कम से कम 23,000 मंदिर होंगे.पिछले कुछ समय से शहर में सरकारी शह पर मंदिर तोड़े जाने की खबरें आ रही हैं. मंदिर बचाओ आंदोलन चलाया जा रहा है. जहाँ कई हिंदू संगठनों से समर्थन प्राप्त...

  • चुनावी नतीजों पर त्वरित टिप्पणी : भाजपा का घर जला खुद के चिराग से

    जब 2014 में नरेन्द्र मोदी चुनाव लड़े तो नारा दिया ''सब का साथ, सब का विकास '। बहुत ही सार्थक अपील थी अचूक अस्त्र की तरह काम कर गई। लेकिन सत्ता में आने के बाद उनका कुनबा उसी पुराने ढर्रे पर चल पड़ा जिस पर चलते चलते ''हम दो हमारे दो' के पड़ाव पर पहुंचे थे। उसके बाद अडवाणी ने जिस तरह सीमित आबादी को...

  • कबाड़ से कलाकारी: सूखी तोरई से बनाइये चमचमाते झूमर या लैंप

    सब्ज़ी बनाने के अलावा तोरई से हम एक खूबसूरत लैंप या झूमर बना सकते हैं. कैसे? बता रहे हैं गुरप्रीत सिंह इन तस्वीरों और वीडियो में..सूखी, पीली पड़ चुकी कुछ तोरियों को इकठ्ठा कर लें इस तरह से तोरई के छिलके उतार लें अब उसके स्लाइसेस काट लें और एक जगह इकठ्ठा कर...

  • मानवाधिकार दिवस पर पढ़िए क्या हैं शरणार्थियों के अधिकार

    हर साल, 10 दिसम्बर ह्यूमन राइट्स डे (मानव अधिकार दिवस) के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन 1947 में संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली ने 'यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स' को लागू किया था। हर देश में, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, विकसित हो या विकासशील, कई ऐसी घटनाएं घटती हैं जिसकी वजह से कई मानव...

  • सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मचारियों के काम और उनकी चुनौतियां

    'यूनाइटेड नेशन्स सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 3' का लक्ष्य है कि साल 2030 तक सामूहिक स्वास्थ्य दायरे को बढ़ाया जाए। इस लक्ष्य को पाने के लिए बेहतर भर्ती, ट्रेनिंग और स्वास्थ्य सेवा में लगे कर्मचारियों को उनके स्थान पर बनाए रखना ज़रूरी है। भारत में ज़्यादातर सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं, ज़मीनी स्तर पर अपनी...

  • जलवायु परिवर्तन सम्मेलन: मेजबान पोलैंड को क्यों है कोयले से इतना प्यार?

    कटोविस (पोलैंड)। कटोविस सम्मेलन की शुरुआत के साथ ही जहां कोयले के प्रयोग को रोकने के लिये दुनिया भर से आये पर्यावरण कार्यकर्ता यहां विरोध करते दिखे वहीं लंदन, बर्लिन और ब्रसेल्स जैसे शहरों में भी दूषित करने वाले ईंधन के इस्तेमाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। लेकिन खुद पोलैंड जो कि इस महत्वपूर्ण...

  • बुलंदशहर हिंसा: भीष्म साहनी के कालजयी उपन्यास 'तमस' की याद दिलाती है…

    बुलंदशहर हिंसा के बाद एक उम्र के लोगों के जेहन में एक उपन्यास और एक सीरियल का एक दृश्य जरुर आया होगा, जिसका नाम था 'तमस'। लेखक भीष्म साहनी ने सिर्फ पांच दिन की कहानी को लेकर इस उपन्यास का ताना-बाना बुना था, जिस पर पहले गोविंद निहलानी ने ओमपुरी, अमरीश पुरी और पंकज कपूर को लेकर दूरदर्शन पर सीरियल...

  • नकारने से नासूर बन जाएगी मौसम परिवर्तन की समस्या

    रमन कांत त्यागी, 24वां कन्वेंशन आॅफ द पार्टीज अर्थात कोप-24 के माध्यम से 2 से 14 दिसम्बर, 2018 तक पोलैण्ड के शहर काटोवाइस में जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्या पर चिंतन हो रहा है। इस बार का चिंतन इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समस्या में सबसे बड़े सहभागी देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड...

  • किसान आंदोलनों की बदलती राजनीतिक समझ

    मीडिया की लाख अनदेखी के बावजूद पिछले हफ्ते दिल्ली में किसान मार्च एक बड़ी हलचल पैदा कर गया। वैसे ये कोई नई घटना नहीं है। किसान पिछले दो-तीन साल से रह रह कर अपनी व्यथा सुना रहे हैं। लेकिन इस बार के किसान प्रदर्शन में नई बात यह थी कि वे संगठित ज्यादा दिखे। चौबीस राज्यों से 200 से ज्यादा किसान संगठनों...

  • मिट्टी, पानी, हवा बचाने के लिए याद आई पुरखों की राह

    सीरीज की पहली ख़बर यहां पढ़ें-जलवायु परिवर्तन और कंपनियों का मायाजाल तोड़ने के लिए पुरानी राह लौट रहे किसान?कुछ मजबूरी और कुछ लालच में किसानों ने विदेशी विधियां अपनाकर पचास साल खेती किया और अपने खेतों की मिट्टी, जमीन के अन्दर का पानी और वातावरण की हवा प्रदूषित कर ली। अन्नदाता की मजबूरी बनी देश की...

  • सर्दियों का मज़ा दोगुना कर देगा: गरमा-गरम पूड़ी के साथ आलू भंटा साग

    जाड़ों में नए आलू आ जाते हैं और साथ ही नरम पालक, चमकीले बैंगनी, हरे या सफ़ेद बैंगन, हरे लाल रसीले टमाटर वग़ैरा अपने रंग बिखेरने लगते हैं। गोभी मटर वग़ैरा तो सर्दियों में बनती ही है पर जो बात लोहे की कढ़ाई में धीमी आँच पर पकी हुई आलू बैंगन पालक की सब्ज़ी में हैं वो किसी और खाने में नहीं। थोड़ी...

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