मीडिया पर हावी नेताओं की लफ्फाज़ी और इस पर धंधेबाज़ों का कब्ज़ा!
मीडिया पर हावी नेताओं की लफ्फाज़ी और इस पर धंधेबाज़ों का कब्ज़ा!

By Dr SB Misra

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया से निष्पक्ष, जनहितकारी और जिम्मेदार पत्रकारिता की अपेक्षा की जाती है। लेखक का कहना है कि आज मीडिया नेताओं की बयानबाज़ी, सनसनी और टीआरपी की दौड़ में उलझकर ग्रामीण भारत, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी कर रहा है। मीडिया को आत्ममंथन करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव और राष्ट्र निर्माण की दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया से निष्पक्ष, जनहितकारी और जिम्मेदार पत्रकारिता की अपेक्षा की जाती है। लेखक का कहना है कि आज मीडिया नेताओं की बयानबाज़ी, सनसनी और टीआरपी की दौड़ में उलझकर ग्रामीण भारत, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी कर रहा है। मीडिया को आत्ममंथन करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव और राष्ट्र निर्माण की दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

आरक्षण से प्रतिस्पर्धा शक्ति होती है कुंठित, स्वाभिमान पर भी उठते हैं सवाल!
आरक्षण से प्रतिस्पर्धा शक्ति होती है कुंठित, स्वाभिमान पर भी उठते हैं सवाल!

By Dr SB Misra

यह लेख भारत में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करता है। लेखक का तर्क है कि लंबे समय तक आरक्षण मिलने के बावजूद लक्षित वर्गों का अपेक्षित बौद्धिक और सामाजिक विकास नहीं हो पाया है, बल्कि इससे प्रतिस्पर्धा की भावना और स्वाभिमान कुंठित हुआ है। लेख में महापुरुषों और वैश्विक प्रगति (जैसे चीन, जापान) का उदाहरण देकर जन्म के बजाय योग्यता, कर्म, आर्थिक स्थिति और वैज्ञानिक आधार पर समाज के उत्थान की वकालत की गई है, ताकि राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।

यह लेख भारत में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करता है। लेखक का तर्क है कि लंबे समय तक आरक्षण मिलने के बावजूद लक्षित वर्गों का अपेक्षित बौद्धिक और सामाजिक विकास नहीं हो पाया है, बल्कि इससे प्रतिस्पर्धा की भावना और स्वाभिमान कुंठित हुआ है। लेख में महापुरुषों और वैश्विक प्रगति (जैसे चीन, जापान) का उदाहरण देकर जन्म के बजाय योग्यता, कर्म, आर्थिक स्थिति और वैज्ञानिक आधार पर समाज के उत्थान की वकालत की गई है, ताकि राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।

एक देश, एक कानून: कितना व्यावहारिक है समान नागरिक संहिता का विचार? कैसे तय होगा इसका स्वरूप?
एक देश, एक कानून: कितना व्यावहारिक है समान नागरिक संहिता का विचार? कैसे तय होगा इसका स्वरूप?

By Dr SB Misra

समान नागरिक संहिता (UCC) पर देश में लंबे समय से बहस जारी है। एक पक्ष इसे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कानून सुनिश्चित करने का माध्यम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर जोर देता है। लेख में विभाजन, पर्सनल लॉ, संविधान की भावना और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों के संदर्भ में UCC के संभावित स्वरूप और उससे जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की गई है।

समान नागरिक संहिता (UCC) पर देश में लंबे समय से बहस जारी है। एक पक्ष इसे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कानून सुनिश्चित करने का माध्यम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर जोर देता है। लेख में विभाजन, पर्सनल लॉ, संविधान की भावना और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों के संदर्भ में UCC के संभावित स्वरूप और उससे जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की गई है।

कांग्रेस और आरएसएस: दो संगठनों की दो यात्राएं, शुरुआत सामाजिक सरोकारों से हुई थी
कांग्रेस और आरएसएस: दो संगठनों की दो यात्राएं, शुरुआत सामाजिक सरोकारों से हुई थी

By Gaon Connection

यह लेख कांग्रेस और आरएसएस के उद्भव के पीछे की सामाजिक विचारधाराओं को विस्तार से उजागर करता है। इसमें दोनों संगठनों के स्थापनाकाल के उद्देश्य और आज के संदर्भ में उनकी भूमिकाओं को समझाया गया है। पाठक को यह जानने के लिए प्रेरित किया गया है कि विभाजन के समय कौन-कौन से नेता अलग-अलग दिशाओं में चले गए थे।

यह लेख कांग्रेस और आरएसएस के उद्भव के पीछे की सामाजिक विचारधाराओं को विस्तार से उजागर करता है। इसमें दोनों संगठनों के स्थापनाकाल के उद्देश्य और आज के संदर्भ में उनकी भूमिकाओं को समझाया गया है। पाठक को यह जानने के लिए प्रेरित किया गया है कि विभाजन के समय कौन-कौन से नेता अलग-अलग दिशाओं में चले गए थे।

पर्यावरण कैसे सुधरेगा
पर्यावरण कैसे सुधरेगा

By Dr SB Misra

मानव सभ्यता का इतिहास सिखाता है कि प्रकृति का सम्मान करने वाले ही आगे बढ़ते हैं। भारत की प्राचीन परंपरा प्रकृति को जीवन का आधार मानती है। जल, वायु, मिट्टी और वनस्पति जीवन के लिए आवश्यक हैं। जीव विविधता का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है। प्रकृति का सम्मान ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।

मानव सभ्यता का इतिहास सिखाता है कि प्रकृति का सम्मान करने वाले ही आगे बढ़ते हैं। भारत की प्राचीन परंपरा प्रकृति को जीवन का आधार मानती है। जल, वायु, मिट्टी और वनस्पति जीवन के लिए आवश्यक हैं। जीव विविधता का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है। प्रकृति का सम्मान ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।

मेहरबानी ट्रंप की, परेशानी सारी दुनिया की
मेहरबानी ट्रंप की, परेशानी सारी दुनिया की

By Dr SB Misra

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति की कोशिशें विफल रहीं। उन्होंने दुनिया भर में तनाव बढ़ाया है। भारत अपनी पुरानी तटस्थ विदेश नीति पर चल रहा है। यह नीति भारत को सुरक्षित रख रही है। दुनिया के देश अपनी समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारत सरकार स्वतंत्र निर्णय ले रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति की कोशिशें विफल रहीं। उन्होंने दुनिया भर में तनाव बढ़ाया है। भारत अपनी पुरानी तटस्थ विदेश नीति पर चल रहा है। यह नीति भारत को सुरक्षित रख रही है। दुनिया के देश अपनी समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारत सरकार स्वतंत्र निर्णय ले रही है।

जलवायु में अनिश्चितता के परिणाम को सबसे अधिक झेलते हैं ग्रामीण
जलवायु में अनिश्चितता के परिणाम को सबसे अधिक झेलते हैं ग्रामीण

By Dr SB Misra

गांवों में बदलते मौसम का असर गंभीर होता जा रहा है। अत्यधिक गर्मी और अप्रत्याशित वर्षा से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि मजदूरों की दिनचर्या परेशान हो रही है। बच्चों को शुद्ध पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है और बीमार होने पर इलाज का कोई साधन नहीं है।

गांवों में बदलते मौसम का असर गंभीर होता जा रहा है। अत्यधिक गर्मी और अप्रत्याशित वर्षा से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि मजदूरों की दिनचर्या परेशान हो रही है। बच्चों को शुद्ध पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है और बीमार होने पर इलाज का कोई साधन नहीं है।

हड़ताल चक्का जाम और तोड़फोड़ से पीछे जाता है देश
हड़ताल चक्का जाम और तोड़फोड़ से पीछे जाता है देश

By Dr SB Misra

लोकतंत्र में विभिन्न तरीकों से अपनी आवाज उठाना आवश्यक है। हड़तालें और आंदोलन समाज की एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन जब ये हिंसा का रूप धर लेते हैं, तो इससे समाज को गंभीर नुकसान होता है। हाल ही में नोएडा में हुई श्रमिकों की हड़ताल और तोड़फोड़ ने व्यवसायों और रोजगार को प्रभावित किया है।

लोकतंत्र में विभिन्न तरीकों से अपनी आवाज उठाना आवश्यक है। हड़तालें और आंदोलन समाज की एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन जब ये हिंसा का रूप धर लेते हैं, तो इससे समाज को गंभीर नुकसान होता है। हाल ही में नोएडा में हुई श्रमिकों की हड़ताल और तोड़फोड़ ने व्यवसायों और रोजगार को प्रभावित किया है।

शिक्षा का असली मकसद: संस्कार, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता
शिक्षा का असली मकसद: संस्कार, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता

By Dr SB Misra

स्वतंत्र भारत में शिक्षण व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक रही है संस्कार और प्रेरणा का अभाव। इसके कारण हम नागरिकों की स्वाभिमान की भावना विकसित नहीं कर पाए। यह सच है कि मैकाले का मकसद क्लर्क तैयार करना ही था और हमें अब भी यही लगा है कि नौकरी पाना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।

स्वतंत्र भारत में शिक्षण व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक रही है संस्कार और प्रेरणा का अभाव। इसके कारण हम नागरिकों की स्वाभिमान की भावना विकसित नहीं कर पाए। यह सच है कि मैकाले का मकसद क्लर्क तैयार करना ही था और हमें अब भी यही लगा है कि नौकरी पाना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।

Samvad: फिरोज़ गाँधी के योगदान को देश ने भुला दिया
Samvad: फिरोज़ गाँधी के योगदान को देश ने भुला दिया

By Dr SB Misra

फिरोज़ गांधी, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, आज भुला दिए गए हैं। वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के दामाद और इंदिरा गांधी के पति थे। उन्होंने संसद में निर्भीकता से अपनी बात रखी और देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। फिरोज गांधी के कार्यों को याद रखना देश के लिए आवश्यक है।

फिरोज़ गांधी, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, आज भुला दिए गए हैं। वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के दामाद और इंदिरा गांधी के पति थे। उन्होंने संसद में निर्भीकता से अपनी बात रखी और देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। फिरोज गांधी के कार्यों को याद रखना देश के लिए आवश्यक है।

यूपी सरकार 12 जुलाई को मनाएगी ‘हरियाली का उत्सव’, पूरे प्रदेश में एक दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे

By Gaon Connection

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गोबर से ग्रीन एनर्जी तैयार करेगी योगी सरकार! हर ज़िले में बनेंगे बायोगैस मॉडल विलेज, आईआईटी दिल्ली देगी तकनीकी सहयोग

By Gaon Connection

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गाँव की अनोखी पहल: साथ भोजन, दूर अकेलापन

By Swati

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बारिश की कमी से खेत सूने! खरीफ़ बुआई 21 फ़ीसदी घटी, जानें धान से तिलहन तक सभी प्रमुख फ़सलों की बुआई कितने फ़ीसदी पिछड़ी

By Umang

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दक्षिण कोरिया की तकनीक से गुजरात के इन ज़िलों में बनेंगे दो रबर डैम, 160 करोड़ आएगी लागत; जानिए पारंपरिक बाँध से क्यों हैं अलग

By Gaon Connection

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खरीफ़ सीज़न में खाद की कमी नहीं होगी, सरकार के पास 163.65 लाख टन भंडार; उत्पादन भी लक्ष्य से अधिक

By Gaon Connection

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मछुआरों और किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! MP में ₹7,430 करोड़ का निवेश, 4 लाख टन बढ़ेगा मछली उत्पादन

By Lata Mishra

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