By Dr SB Misra
प्राकृतिक आपदाओं पर नियंत्रण संभव नहीं, पर उनसे बचाव सीखना आवश्यक है। भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी जैसी प्राकृतिक विपदाओं से बचाव के उपाय विज्ञान सिखाता है। जल संकट एक प्राकृतिक और मानव-जनित आपदा है जिसे मनुष्य ने बढ़ाया है। वायु-जनित आपदाएँ और जलवायु परिवर्तन जीवनशैली में बदलाव की मांग करते हैं। वैश्विक संघर्ष और खाद्यान्न संकट जैसी मानव-जनित विपदाओं का समाधान मनुष्य को स्वयं खोजना होगा।
प्राकृतिक आपदाओं पर नियंत्रण संभव नहीं, पर उनसे बचाव सीखना आवश्यक है। भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी जैसी प्राकृतिक विपदाओं से बचाव के उपाय विज्ञान सिखाता है। जल संकट एक प्राकृतिक और मानव-जनित आपदा है जिसे मनुष्य ने बढ़ाया है। वायु-जनित आपदाएँ और जलवायु परिवर्तन जीवनशैली में बदलाव की मांग करते हैं। वैश्विक संघर्ष और खाद्यान्न संकट जैसी मानव-जनित विपदाओं का समाधान मनुष्य को स्वयं खोजना होगा।
By Dr SB Misra
यह टिप्पणी संसद में बार-बार होने वाले हंगामे और काम ठप होने की आलोचना करती है। इसमें बताया गया है कि कैसे राजनीतिक खींचतान और नारेबाजी के कारण जनता- विशेषकर ग्रामीण आबादी और किसानों से जुड़े मुख्य मुद्दों की अनदेखी हो रही है। यह आलेख वर्तमान संसदीय व्यवहार और आंदोलनों की तुलना अतीत के छात्र आंदोलनों, आपातकाल के दौर और स्वतंत्रता के बाद के दिग्गज नेताओं के उत्कृष्ट संसदीय भाषणों से करता है। हिंसक विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक मांगों के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए, यह इस बात पर ज़ोर देता है कि वास्तविक समस्याओं का समाधान केवल मंत्री या अधिकारी बदलने से नहीं, बल्कि सार्थक चर्चा और व्यवस्था परिवर्तन से ही संभव है, जिसका अंतिम निर्णय देश के परिपक्व मतदाताओं को ही करना है।
यह टिप्पणी संसद में बार-बार होने वाले हंगामे और काम ठप होने की आलोचना करती है। इसमें बताया गया है कि कैसे राजनीतिक खींचतान और नारेबाजी के कारण जनता- विशेषकर ग्रामीण आबादी और किसानों से जुड़े मुख्य मुद्दों की अनदेखी हो रही है। यह आलेख वर्तमान संसदीय व्यवहार और आंदोलनों की तुलना अतीत के छात्र आंदोलनों, आपातकाल के दौर और स्वतंत्रता के बाद के दिग्गज नेताओं के उत्कृष्ट संसदीय भाषणों से करता है। हिंसक विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक मांगों के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए, यह इस बात पर ज़ोर देता है कि वास्तविक समस्याओं का समाधान केवल मंत्री या अधिकारी बदलने से नहीं, बल्कि सार्थक चर्चा और व्यवस्था परिवर्तन से ही संभव है, जिसका अंतिम निर्णय देश के परिपक्व मतदाताओं को ही करना है।
By Dr SB Misra
कॉकरोच जनता पार्टी ने पेपर लीक मामले में मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए एक जोरदार आंदोलन शुरू किया है। इस आंदोलन की विशिष्टता संसद का घेराव करना और जोखिम से भरे तरीके अपनाना है। इसमें हिंसा और विदेशी हस्तक्षेप जैसी चिंताओं को भी उजागर किया गया है। जयप्रकाश नारायण की क्रांति से इसकी तुलना निराधार मानी जा रही है, क्योंकि नेतृत्व और कार्यशैली में स्पष्ट भिन्नताएं हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी ने पेपर लीक मामले में मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए एक जोरदार आंदोलन शुरू किया है। इस आंदोलन की विशिष्टता संसद का घेराव करना और जोखिम से भरे तरीके अपनाना है। इसमें हिंसा और विदेशी हस्तक्षेप जैसी चिंताओं को भी उजागर किया गया है। जयप्रकाश नारायण की क्रांति से इसकी तुलना निराधार मानी जा रही है, क्योंकि नेतृत्व और कार्यशैली में स्पष्ट भिन्नताएं हैं।
By Dr SB Misra
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया से निष्पक्ष, जनहितकारी और जिम्मेदार पत्रकारिता की अपेक्षा की जाती है। लेखक का कहना है कि आज मीडिया नेताओं की बयानबाज़ी, सनसनी और टीआरपी की दौड़ में उलझकर ग्रामीण भारत, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी कर रहा है। मीडिया को आत्ममंथन करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव और राष्ट्र निर्माण की दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया से निष्पक्ष, जनहितकारी और जिम्मेदार पत्रकारिता की अपेक्षा की जाती है। लेखक का कहना है कि आज मीडिया नेताओं की बयानबाज़ी, सनसनी और टीआरपी की दौड़ में उलझकर ग्रामीण भारत, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी कर रहा है। मीडिया को आत्ममंथन करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव और राष्ट्र निर्माण की दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
By Dr SB Misra
यह लेख भारत में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करता है। लेखक का तर्क है कि लंबे समय तक आरक्षण मिलने के बावजूद लक्षित वर्गों का अपेक्षित बौद्धिक और सामाजिक विकास नहीं हो पाया है, बल्कि इससे प्रतिस्पर्धा की भावना और स्वाभिमान कुंठित हुआ है। लेख में महापुरुषों और वैश्विक प्रगति (जैसे चीन, जापान) का उदाहरण देकर जन्म के बजाय योग्यता, कर्म, आर्थिक स्थिति और वैज्ञानिक आधार पर समाज के उत्थान की वकालत की गई है, ताकि राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।
यह लेख भारत में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करता है। लेखक का तर्क है कि लंबे समय तक आरक्षण मिलने के बावजूद लक्षित वर्गों का अपेक्षित बौद्धिक और सामाजिक विकास नहीं हो पाया है, बल्कि इससे प्रतिस्पर्धा की भावना और स्वाभिमान कुंठित हुआ है। लेख में महापुरुषों और वैश्विक प्रगति (जैसे चीन, जापान) का उदाहरण देकर जन्म के बजाय योग्यता, कर्म, आर्थिक स्थिति और वैज्ञानिक आधार पर समाज के उत्थान की वकालत की गई है, ताकि राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।
By Dr SB Misra
समान नागरिक संहिता (UCC) पर देश में लंबे समय से बहस जारी है। एक पक्ष इसे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कानून सुनिश्चित करने का माध्यम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर जोर देता है। लेख में विभाजन, पर्सनल लॉ, संविधान की भावना और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों के संदर्भ में UCC के संभावित स्वरूप और उससे जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की गई है।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर देश में लंबे समय से बहस जारी है। एक पक्ष इसे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कानून सुनिश्चित करने का माध्यम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर जोर देता है। लेख में विभाजन, पर्सनल लॉ, संविधान की भावना और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों के संदर्भ में UCC के संभावित स्वरूप और उससे जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की गई है।
By Gaon Connection
यह लेख कांग्रेस और आरएसएस के उद्भव के पीछे की सामाजिक विचारधाराओं को विस्तार से उजागर करता है। इसमें दोनों संगठनों के स्थापनाकाल के उद्देश्य और आज के संदर्भ में उनकी भूमिकाओं को समझाया गया है। पाठक को यह जानने के लिए प्रेरित किया गया है कि विभाजन के समय कौन-कौन से नेता अलग-अलग दिशाओं में चले गए थे।
यह लेख कांग्रेस और आरएसएस के उद्भव के पीछे की सामाजिक विचारधाराओं को विस्तार से उजागर करता है। इसमें दोनों संगठनों के स्थापनाकाल के उद्देश्य और आज के संदर्भ में उनकी भूमिकाओं को समझाया गया है। पाठक को यह जानने के लिए प्रेरित किया गया है कि विभाजन के समय कौन-कौन से नेता अलग-अलग दिशाओं में चले गए थे।
By Dr SB Misra
मानव सभ्यता का इतिहास सिखाता है कि प्रकृति का सम्मान करने वाले ही आगे बढ़ते हैं। भारत की प्राचीन परंपरा प्रकृति को जीवन का आधार मानती है। जल, वायु, मिट्टी और वनस्पति जीवन के लिए आवश्यक हैं। जीव विविधता का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है। प्रकृति का सम्मान ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।
मानव सभ्यता का इतिहास सिखाता है कि प्रकृति का सम्मान करने वाले ही आगे बढ़ते हैं। भारत की प्राचीन परंपरा प्रकृति को जीवन का आधार मानती है। जल, वायु, मिट्टी और वनस्पति जीवन के लिए आवश्यक हैं। जीव विविधता का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है। प्रकृति का सम्मान ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।
By Dr SB Misra
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति की कोशिशें विफल रहीं। उन्होंने दुनिया भर में तनाव बढ़ाया है। भारत अपनी पुरानी तटस्थ विदेश नीति पर चल रहा है। यह नीति भारत को सुरक्षित रख रही है। दुनिया के देश अपनी समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारत सरकार स्वतंत्र निर्णय ले रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति की कोशिशें विफल रहीं। उन्होंने दुनिया भर में तनाव बढ़ाया है। भारत अपनी पुरानी तटस्थ विदेश नीति पर चल रहा है। यह नीति भारत को सुरक्षित रख रही है। दुनिया के देश अपनी समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारत सरकार स्वतंत्र निर्णय ले रही है।
By Dr SB Misra
गांवों में बदलते मौसम का असर गंभीर होता जा रहा है। अत्यधिक गर्मी और अप्रत्याशित वर्षा से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि मजदूरों की दिनचर्या परेशान हो रही है। बच्चों को शुद्ध पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है और बीमार होने पर इलाज का कोई साधन नहीं है।
गांवों में बदलते मौसम का असर गंभीर होता जा रहा है। अत्यधिक गर्मी और अप्रत्याशित वर्षा से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि मजदूरों की दिनचर्या परेशान हो रही है। बच्चों को शुद्ध पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है और बीमार होने पर इलाज का कोई साधन नहीं है।
By Mansi
By Gaon Connection
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By Mansi
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By Gaon Connection
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