Read latest updates about "संवाद" - Page 1

  • किसान का मर्ज़ खैरात के पेनकिलर से नहीं जाएगा

    किसान प्रोजेक्ट : साठ के दशक में जब देश भुखमरी के कगार पर पहुंच गया तो सरकार को किसान की याद आई और बौनी प्रजाति का मैक्सिकन गेहूं किसान को देकर कहा, यूरिया डालते जाओ और पैदावार बढ़ाते रहो। यह दर्दनिवारक गोली थी, जिसे किसान ने औषधि समझा और यूरिया का भरपूर प्रयोग करता रहा। ये प्रजातियां उसी...

  • आरक्षण में खोट नहीं, उसे लागू करने में खोट है

    संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के लिए 10 साल यानी 1960 तक आरक्षण का प्रावधान किया था। बाद के नेता उनके सुझाव दरकिनार करके आज तक इसे बढ़ाते गए। अम्बेडकर का प्रावधान पर्याप्त था क्योंकि दलितों को संसद या विधान भवन में जाने के लिए कोई डिग्री, कोई योग्यता या क्षमता की आवश्यकता नहीं...

  • There is need to safeguard pluralism and democracy

    The former President of India Pranab Mukherjee has rightly said the other day that pluralism is the soul of India and it has been so for thousands of years. He also defined the concept of pluralism and ''deshbhakti''. However, pluralism is not characteristic of a piece of land called country. It is...

  • अटल बिहारी वाजपेयी पर विशेष : 'हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा'

    अटल जी मेरे खेत की मेड़ पर आए थे नब्बे के दशक में, भारतीय ग्रामीण विद्यालय के ठीक बगल में। पीडब्ल्यूडी और भाजपा के लोगों ने उनके हाथों एक सड़क का उद्घाटन कराया और शिलापट भी लगवाया था। मुझे सूचना नहीं थी इसलिए उपस्थित नहीं था पर किसी ने फोन से पूछा था कि स्कूल के बच्चों को स्वागत में खड़ा कर दें?...

  • जल लुप्तप्राय हो रहा है, नासा ने दी चेतावनी

    हम किसी विषय की गम्भीरता को तभी समझते हैं जब अंग्रेज लोग बोल देते हैं, और आखिरकार अंतरिक्ष विज्ञान सम्बन्धी जानी मानी संस्था नासा ने कह ही दिया कि भारत में 2025 के बाद जल समाप्त होने लगेगा, अब तो गम्भीरता से लेना चाहिए। हमने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया, चर्चाएं हुईं और खतरे की...

  • भारत के किसानों को भी अमेरिका और यूरोप की तर्ज़ पर एक फिक्स आमदनी की गारंटी दी जाए

    आज जबकि खेती से घटती आय के कारण किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है और कृषि ऋण की बकाया राशि को माफ़ किए जाने की मांग ज़ोर पकड़ रही है यह जानना ज़रूरी हो गया है कि अमीर देश अपने कृषि क्षेत्र का ध्यान किस प्रकार रखते हैं।आखिरकार, यदि फसलों की उच्च उत्पादकता ही एकमात्र मापदंड है तो फिर अमेरिका और यूरोपीय संघ...

  • किसान मुक्ति यात्रा और एक फोटोग्राफर की डायरी (भाग-2)  

    पहला भाग यहां पढ़ें-किसान मुक्ति यात्रा और एक फोटोग्राफर की डायरी (भाग-1)सुबह की सिहरन और गिरफ्तारी की तैयारीपौ फटने से पहले का उजाला और घर-बाहर के कामकाज की शुरुआत की वजह से गांव में सवेरा यों भी जल्दी हो जाता है। मगर उजाले से भी पहले सिहरन की वजह से मेरी आंख खुल गई. तमाम लोगों ने सिरहाने की रज़ाई...

  • किसान मुक्ति यात्रा और एक फोटोग्राफर की डायरी (भाग-1)

    मई-जून में मंदसौर में किसानों के आंदोलन की ख़बरें जिस समय आ रही थीं, देश के दूसरे हिस्सों में भी किसान दूध और सब्जियां सड़कों पर फेंककर अपना गुस्सा जता रहे थे। मीडिया के लिए उनकी दिक्कतों को समझने-समझाने से कहीं ज्यादा आसान था, सड़क पर फैले प्याज़-टमाटर की तस्वीरें दिखाना। और यह सब बाकायदा चल ही...

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