चुनाव से ठंडा पड़ा स्कूलों का चूल्हा

चुनाव से ठंडा पड़ा स्कूलों का चूल्हा

गोण्डा/रायबरेली/शाहजहांपुर/बलरामपुर। दुर्जनपुर प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पिछले दो महीनों से मिड डे मील नहीं मिल रहा क्योंकि स्कूल में राशन और कनवर्जन कॉस्ट दोनों ही नहीं आई है और ये अव्यवस्था, चुनाव के चलते हो रही है।

गोण्डा जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दक्षिण दिशा में हलधरमउ ब्लॉक के दुर्जनपुर प्राथमिक विद्यालय में चुनाव के कारण स्कूल में न तो राशन आ पाया है न मास्टरजी स्कूल में समय दे पा रहे हैं, जिसका नतीजा ये है कि स्कूल का चूल्हा ठंडा पड़ा है और बच्चों को खाली पेट स्कूल से लौटना पड़ रहा है। 

स्कूल की अध्यापिका रश्मि सिंह बताती हैं, ''इधर चुनाव में सब व्यस्त हैं प्रधान ने दो महीने पहले 35 किलो चावल भेजा था उसके बाद से कुछ नहीं आया और अब इस महीने भी नहीं आएगा क्योंकि वो प्रधानी चुनाव में व्यस्त हैं।"

ये हाल केवल गोण्डा जिले का नहीं बल्कि बलरामपुर, रायबरेली, शाहजहांपुर का भी हैं जहां मिड डे मील व्यवस्था चुनाव के चलते बेपटरी हो गई है। रायबरेली जिले में लगभग 2700 प्राथमिक स्कूल हैं जिसमें करीब सवा तीन लाख बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन चुनाव के चलते लगभग 1200 स्कूलों का चूल्हा बुझ गया है क्योंकि वहां एक महीने से न राशन है और न खाना बनाने वाले का ध्यान।

स्कूलों में चलने वाली मिड डे मील योजना का पैसा प्रधानाध्यापक और प्रधान के ज्वाइंट एकाउंट में आता है। जिसमें दोनों की साझेदारी से ही राशन, मसाला और ईंधन आता है लेकिन बीते और आगामी चुनावों में दोनों ही व्यस्त हैं, जिसके कारण योजना ठप पड़ी है।

रायबरेली से लगभग 40 किमी दूर अमावां ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल अमावां में मिड डे मील नहीं बन रहा। वहां के छात्र प्रदीप सोनकर (12 वर्ष) बताते हैं, ''हम लोगों को तो दो महीने हो रहे हैं अब खाना नहीं मिलता स्कूल में। टीचर जी ने कह दिया है कि इस महीने भी घर से टिफिन लेकर आना है, स्कूल में खाना नहीं बनेगा। अब तो स्कूल भी तीन बजे तक है तो घर से ही खाना लेकर आते हैं।" रायबरेली के हरचंदपुर, राही, शिवगढ ब्लॉक भी ऐसे हैं जहां मिड डे मील नहीं बन रहा।

स्कूलों में मिड डे मील न बनने से अभिवावकों में भी नाराजगी है। गोण्डा से लगभग 37 किमी दूर परसपुर गांव में रहने वाली सुनीता देवी (35 वर्ष) के दो बच्चें प्राइमरी स्कूल में पढऩे जाते हैं। स्कूल में पिछले महीने भी खाना नहीं मिल रहा था और इस महीने भी नहीं मिल रहा। वो बताती हैं, ''ये गलत है कि चुनाव की वजह से बच्चों को भूखा रखें उनको क्या लेना-देना चुनाव से। ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि न स्कूल पर असर पड़े न पढ़ाने वालों पर, आते हैं न खाना मिलता है तो बच्चों के स्कूल जाने का फायदा ही क्या।"

इस बारे में जब प्रधान राजन सिंह से बात की तो उन्होंने कहा, ''इधर तो चुनाव करीब आ रहे हैं हमारा पूरा फोकस उसी पर है इसलिए कुछ समय तक ये परेशानी रहेगी, उसके बाद तो सब पहले जैसा ही होगा।"

शाहजहांपुर जिले के जैती ब्लॉक के खेड़ा बझेड़ा गाँव में भी बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल रहा जिसके वजह से बच्चों की उपस्थिति कम हुई है। यहीं हाल बलरामपुर के पचपेड़वा ब्लॉक का है वहां के बहूटी और बैरीहवां प्राथमिक स्कूल में भी खाने की व्यवस्था बंद पड़ी है।

एक झलक 

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 1,14,256 प्राथमिक विद्यालय, 54,155 उच्च प्राथमिक विद्यालय मिड डे मील योजना से आच्छादित हैं। इनमें प्राथमिक में 133.72 लाख व उच्च में 57लाभान्वित हो रहे हैं।

प्राथमिक स्तर पर

3.74 रुपए प्रति छात्र और उच्च में 5.74 रुपए प्रति छात्र कनर्वजन दर है।

योजना के तहत सरकार किचन शेड के लिए 85000 प्रति विद्यालय और किचन उपकरण के लिए 5000 रुपए प्रति विद्यालय उपलब्ध कराती है। वर्तमान में लगभग 1,12,723 विद्यालयों में किचेन शेड बने हैं।

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