गंगा की तलहटी लगातर हो रही है ऊंची, डूब सकते हैं काशी के घाट

गंगा की तलहटी लगातर हो रही है ऊंची, डूब सकते हैं काशी के घाटगंगा के घाटों के किनारे कछुआ सेंचुरी में बालू खनन पर रोक लगाई गई थी।

वाराणसी। गंगा के घाटों के किनारे कछुआ सेंचुरी में बालू खनन पर रोक लगाई गई थी। इस कारण गंगा पार रेत के टीले बन गए हैं और नदी का तल ऊंचा हो गया। इससे घाटों की तरफ गंगा का पानी मुड़ गया है और काशी के घाटों के डूबने का खतरा और बढ़ गया है।

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बनारस के घाटों पर बढ़ रही गहराई को दर्शाते हुए उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया था कि नदी के एक ओर तल पर अधिक मात्रा में रेत जमा होने के कारण किनारों पर गहराई बढ़ रही है। काशी के घाटों पर 20 वर्ष पहले जो गहराई 12 से 15 मीटर रहा करती थी। वो अब 20 से 25 मीटर हो गई है। इससे घाटों के डूबने का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट के बावजूद आज तक रेत के टीलों को हटाने का काम नहीं शुरू हो पाया है।

गंगा एक्शन प्लान के तहत काशी के रामनगर किले से लेकर मालवीय पुल तक बनाई गई कछुआ सेंचुरी का क्षेत्रफल कुल सात किलोमीटर का है। सेंचुरी क्षेत्र में बालू खनन पर रोक लगाई गई थी। बनारस के अस्सी इलाके के रहने वाले धर्मेंद्र तिवारी (48 वर्ष) बताते हैं, ‘’ कछुआ सेंचुरी नदी के दूसरी ओर से शुरू हो जाती है। सेंचुरी बनने से सात किमी. मालवीय पुल तक खनन पर रोक लगा दी गई है। खनन ना होने से गंगा के जलप्रवाह के साथ आने वाली बालू एकतरफ जमा हो रही है। इससे नदी के दूसरी तरफ रेत के छोटे पहाड़ बन रहे हैं।’’

वाराणसी में गंगा के प्रवाह के कारण घाटों को हो रहे नुकसान का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट यह बताती है कि गंगा नदी में रामनगर से लेकर राजघाट तक बनाई गई कछुआ सेंचुरी का निर्धारण गलत था।


नाविकों की रोज़ी-रोटी पर पड़ेगा असर

सेंचुरी क्षेत्र से यहां पर स्थानीय नाविकों की रोज़ीरोटी पर काफी असर पड़ा है। 12 वर्षों से बनारस के मानमंदिर घाट पर नाव चला रहे जगदीश निषाद (54 वर्ष) बताते हैं, ‘’गंगा की गंदगी घटी हो या ना हो, यहां आज तक हमने एक कछुआ नहीं देखा है।’’ जगदीश आगे बताते हैं कि सेंचुरी बहुत बड़े क्षेत्र में फैली है, जहां तक सेंचुरी बनाई गई है, वहां तक कोई भी नाव नहीं चला सकता है।

इस क्षेत्र में सर्वाधिक हलचल रहती है, ऐसी जगह पर किसी वन्य जीव के संरक्षण की कल्पना नहीं की जा सकती है। कछुआ सेंचुरी के कारण रेत खनन पर रोक लगाए जाने से रेत के टीले बनने की समस्या पर वाराणसी जिले के मेयर राम गोपाल मोहले ने बताया, ‘’हाईकोर्ट के आदेश पर सेंचुरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के खनन की रोक लगाई गई है। यहां पर जमा रेत हटाने की बात कई बार प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर हाईकोर्ट में उठाई गई है। हाईकोर्ट से आदेश मिलते ही जमा रेत को हटवाने का काम शुरू करा दिया जाएगा।’’

इन घाटों पर ख़तरा: गंगा के तल पर अधिक मात्रा में रेत जमा होने के कारण सबसे अधिक खतरा राजघाट, अस्सीघाट, तुलसीघाट, भदैनीघाट और जानकी घाटों को है। इन घाटों पर गहराई लगातार बढ़ रही है। जहां एक तरफ कछुआ सेंचुरी बनने से लोगों में घाटों के डूबने का डर है।

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