• खिचड़ी खाने और पतंग उड़ाने तक ही सीमित नहीं है मकर संक्रांति पर्व

    हमारे घरों में वर्षों से मनाए जा रहें रीति-रिवाज़ और लोक पर्व (क्षेत्रीय त्योहार) भी अपने भीतर अलग-अलग कहानियां समेटे हुए हैं। इन कहानियों के पीछे कोई दंतकथा या फिर कोई इतिहास जुड़ा होता है। गाँव कनेक्शन आने वाले दिनों में आपको ऐसे ही लोक पर्वों की झलक दिखाएगा। हमारी विशेष सीरीज़ मेरी मिट्टी, मेरे...

  • सुरबग्घी का खेल : क्या आपने खेला है देसी चाइनीज चेकर ?

    आज मोबाइल फोन के बढ़ते चलन से ग्रामीण क्षेत्रों में युवा मिट्टी से जुड़े खेलों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसा ही एक खेल ' सुरबग्घी ' भी है, जो समय के साथ साथ गाँवों में अपनी पहचान खोता चला जा रहा है। खेल जो कहीं खो गए ... सेगमेंट में आज इस खेल से जुड़ी अपनी यादें बता रहे हैं देवांशु मणि...

  • बाल दिवस : यूपी के स्कूलों में चल रहे मीना मंच ने बदल दी हजारों की जिंदगी

    लखनऊ। कसमंडी खुर्द गाँव में लोग अपनी बेटियों को स्कूल नहीं भेजते थे। लेकिन मीना मंच से जुड़े बच्चों ने कई लोगों को समझा-बुझा कर उन्हें अपनी बेटियों को स्कूल भेजने के लिए राज़ी करवा लिया।मलिहाबाद ब्लॉक का कममंडी खुर्द गाँव मुस्लिम बाहुल्य है। यहां पर अधिकतर घरों में लड़कियों की शादी कम उम्र में ही...

  • बाल दिवस : अपने परिवार से लड़कर बहनों का स्कूल में कराया दाखिला

    लखनऊ। घरवालों ने जब बेटियों को पांचवीं पास करने के बाद स्कूल जाने से मना कर दिया, तो विपिन (10 वर्ष) ने अपने माता-पिता से झगड़ा कर लिया। विपिन चाहता था कि उसकी बहनें भी उसी की तरह आगे पढ़ें। थोड़े दिन के झगड़े के बाद आखिरकार परिवार वालों को झुकते हुए विपिन की बात माननी ही पड़ी। लखनऊ के बख्शी का...

  • बे-पटरी हो गई है महिला ट्रैकमैनों की जिंदगी

    लखनऊ। ''अरे ओ मैला उठाने वाली, इधर देख '' सामने गुज़रती हुई ट्रेन में बैठे एक लड़के ने जब कविता (29 वर्ष) को यह बोला , तो कविता उसे चाह के भी कुछ नहीं कह पाई। उस दिन ट्रेन उसके सामने से गुज़र गई पर कविता आज तक उस लड़के की बात का जवाब नहीं दे पाई है। कविता रेल विभाग में ट्रैकमैन के पद पर तैनात है और...

  • डबलिंग इनकम : खस के साथ बथुआ या इकौना की खेती कर किसान बढ़ा सकते हैं आमदनी

    पिछले एक दशक से औषधीय फसलों की खेती के बढ़ते चलन के कारण किसान खेतों में पारंपरिक फसलों की जगह कई एरोमैटिक (औषधीय) फसलें उगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। अगर आप के पास कम खेत हैं और आप कम समय में अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो ख़स के साथ बथुआ की सहफसली खेती अपके लिए एक बेहतर विकल्प है।सीतापुर जिले...

  • आठवीं पास खेती का चाणक्य : देखिए इस किसान की सफलता की कहानी 

    गुलाम मोहम्मद ने 30 साल पहले अपनी खेती की शुरुआत 5 एकड़ ज़मीन से की थी, आज उनकी खेती 20 एकड़ से ज़्यादा है। उनके खेतों में उगाए गए केला, टमाटर, खरबूज, तरबूज की मांग हैदराबाद , बंगाल से लेकर काठमांडू तक है।किसान गुलाम मोहम्मद भले ही आठवीं पास हैं , लेकिन उनकी जानकारी कृषि वैज्ञानिकों को भी हैरान कर...

  • ट्रे -एग्रीकल्चर और फूड प्रोसेसिंग तकनीक बढ़ा रही किसानों की आमदनी 

    फल और सब्जियों की खेती कर रहे किसानों के लिए अपनी फसल को सीधे तौर पर मंडी में बेच देने से अच्छा होता है उसका कोई उत्पाद बनाकर बाज़ार में बेचना। मध्य प्रदेेश में उज्जैन के कृषि विज्ञान केंद्र की मदद से ग्रामीण महिलाओं और किसानों को फल न सब्जियों से प्रोसेस्ड फूड बनाकर उन्हें बाज़ार में ज़्यादा...

Share it
Top