देश की पहली कैपिटल गुड्स नीति को हरी झंडी, क्या होगा फायदा?

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नई दिल्ली। देश की औद्योगिक विकास फिलहाल बेहद धीमी है। रोजगार के बिना तेज विकास दर हासिल करने की बातें हो रही हैं। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने भारत में पहली बार पूंजीगत सामान उद्योग यानि कैपिटल गुड्स इंडस्ट्री के लिए नीति बनाने का एलान किया है। बुधवार को कैबिनेट ने नेशनल कैपिटल गुड्स पॉलिसी को मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य अगले दस वर्षों में इस उद्योग में निवेश को तीन गुना करके लगभग सवा दो करोड़ रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

कैबिनेट के फैसलों के बारे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बताया कि अभी देश में कैपिटल गुड्स उद्योग का उत्पादन 2.30 लाख करोड़ रुपये है। इसे वर्ष 2025 तक बढ़ाकर 7.50 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। फिलहाल, इस उद्योग में तकरीबन 84 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जबकि नई नीति का मकसद तीन करोड़ लोगों को रोजगार देने का है। निर्यात के मामले में भी सरकार ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं।

अभी कैपिटल गुड्स उद्योग के कुल उत्पाद का 27 फीसद निर्यात होता है। नई पॉलिसी के तहत इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 40 फीसद किया जाएगा। यह नीति सरकार की मेक इन इंडिया के तहत ही लागू होगी। कैपिटल गुड्स उद्योग को बढ़ावा देने से भारत में तेजी से औद्योगिकीकरण को बल मिलेगा।

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