महिला किसानों के नाम रहा स्वराज यात्रा का तीसरा दिन

किसानों व ग्रामीणों के अधिकारों के लिए एक जुलाई को शुरू हुई स्वराज यात्रा तीसरे दिन महिला किसानों के नाम रही है। यात्रा में महिला किसानों के हक की बात की गई।

महिला किसानों के नाम रहा स्वराज यात्रा का तीसरा दिन

हरियाणा। किसानों व ग्रामीणों के अधिकारों के लिए एक जुलाई को शुरू हुई स्वराज यात्रा तीसरे दिन महिला किसानों के नाम रही है।


दूसरे दिन 14 गाँवों की यात्रा के बाद हरजीपुर गाँव में रात्रि विश्राम के बाद तीसरे दिन की यात्रा शुरू हुई। हरजीपुर गाँव से शुरू हुई ये यात्रा खोरी स्टेशन, गुमिना, पीथडावास, मैलावास, घामलावास, ठोठवाल, नंगली गोघा, गोलियाका, रज़ियाका, पूंसिका, बधराना गाँव होते हुए बेरवाल गाँव में समाप्त होगी।

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव के नेतृत्व में चल रही इस यात्रा में पदयात्री प्रतिदिन 20 से अधिक किलोमीटर की दूरी तय कर गाँव-गाँव जा रहे हैं। ग्रामीण भारत ,खेत, किसान, नौजवान की दुश्वारियों को रेखाँकित करते चल रही इस यात्रा में आज के दिन को महिला किसानों को समर्पित करते हुए महिला किसान दिवस के रूप में मनाया।

आंकड़ों के अनुसार देश में 70% से अधिक महिलाएं खेती के कामों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित हैं परंतु देश में कभी भी किसानों की पहचान के रूप में महिला किसानों को स्थान नहीं मिला। स्वराज यात्रा का आज का पूरा दिन महिला किसानों को समर्पित रहा। आज की यात्रा में बड़ी संख्या में महिला किसानों ने भागीदारी की, यात्रा का नेतृत्व किया तथा जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों और परेशानियों को प्रमुखता से सबके सामने रखा। अधिकतम महिला किसानों ने गांव में बढ़ रहे नशाखोरी की समस्या को प्रमुखता से उठाया।

सुबह पीठड़ावास गांव में हुई महिला किसानों की एक बड़ी सभा के दौरान गांव में शराब के बढ़ते असर को बताते हुए एक महिला रो पड़ी, जब उन्होंने बताया कि पहले उनके पति को शराब की लत थी अब उनका बेटा भी इस लत का शिकार हो चुका है। दक्षिण हरियाणा के अधिकतम गांव में शराब की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है।

डांगावास गांव में चल रही सभा के दौरान सरपंच जगदीश जी ने महिलाओं की मांग का समर्थन करते हुए यह कहा कि अगली ग्राम सभा की मीटिंग में वह गांव के पास के ठेके को बंद कराने के लिए प्रस्ताव पास करेंगे और इस प्रस्ताव की प्रति पूरे गांव की दीवारों पर चस्पा करेंगे। गांव में शराब को लेकर एक अघोषित गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है


स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने महिला किसानों के बारे में बोलते हुए कहा, "खेती के काम का शोध बताता है कि खेत में होने वाला 70% काम औरत करती है, और आदमी सिर्फ 30% करते हैं। जबकि सरकारी आंकड़ों में हरियाणा में काश्तकारों में महिलाओं की संख्या सिर्फ 27% है। खेती की जमीन में मालिक के तौर पर सिर्फ 12.05% औरतों का नाम दर्ज है। यह किसी से उसका वाजिब हक छीनने जैसा है।"

जय किसान आंदोलन के अध्यक्ष अविक साहा ने महिला किसानों की सभा को संबोधित करते हुए कहा, "मेरी नजर में खेत-खलियान में काम करने वाली हर महिला, भारत माता के समान है। इस स्वराज यात्रा के माध्यम से भारत के गांव, खेत, किसान, नौजवान की दुश्वारियों को एक संगठित आंदोलन का रूप देते हुए, स्वदेश की संस्कृति जानने-समझने की चेष्टा है। "

यात्रा को स्थानीय स्तर पर व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। स्थानीय लोगों के साथ इस यात्रा में देश के अन्य प्रदेशों के किसान भी शामिल हैं। आविक साहा राष्ट्रीय संयोजक जय किसान आंदोलन, के पी सिंह बेंगलूर, लिंगराज उड़ीसा, अरुल अरूमुगम, कामरेड दलीप सिंह, सरदार परमजीत सिंह तमिलनाडु, अजित सिंह उत्तरप्रदेश, इंद्रनील बिस्वास पश्चिम बंगाल, रमन रंधावा गंगा नगर राजस्थान, आलोक कुमार बिहार, मंजिर हुसैन दिल्ली समेत भारत के विभिन्न हिस्सों से आए स्वराज के साथी शामिल है।

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यात्रा के दौरान ठोठवाल गाँव में अलग नजारा दिखा, जहां पर महिलाएं कुर्सी पर बैठीं और पुरुष जमीन पर। यात्री अपने बनाये नियमानुसार दो लाइन बनाकर चलते हैं जिससे आमजन को कोई तकलीफ़ ना हो। स्वराज यात्रा हर गाँव में "त्रिवेणी" यानि पीपल, नीम और बरगद के पौधे लगा रहे है।



यात्रा के दौरान योगेन्द्र यादव ने देश व खेती-किसानी और गाँव के लिए अपना कीमती 2 साल देने के लिए तैयार स्वराज योगियों को शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा, " आपका दो साल गाँव और देश की बेहतरी के लिए होगा।" हर उम्र के लोगों में स्वराज योगी बनकर देश के लिए कुछ करने का उत्साह दिखाई पड़ा, महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

'स्वराज यात्रा' नाम का ये कार्यक्रम 1 जुलाई से 9 जुलाई तक रेवाड़ी के अलग-अलग गाँवो से होते हुए अपने अंतिम पड़ाव चिल्हड़अड्डा पहुंचेगी। यात्रा के दौरान ग्रामीण अंचल की दुश्वारियों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, ग्रामीण युवाओं की समस्याओं से रूबरू होने के साथ ही उनके मुद्दों पर गाँवों में चौपाल भी आयोजित होगी। स्वराज यात्रा संघर्ष के साथ साथ रचनात्मक संदेश भी देगी। यात्रा का प्रत्येक दिन एक थीम आधारित भी है मसलन पानी के जोहड़ (तालाब) बचाना, गांवों के पास से शराब के ठेके हटाएं जाएं, फ़सल बीमा भंडाफोड़ दिवस, महिला किसान दिवस आदि।








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