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प्रधानमंत्री के भाषण की 15 बड़ी बातें, जानिए किन दो पूर्व पीएम को किया याद, कृषि कानून और डेयरी सेक्टर का क्या है कनेक्शन?

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राज्यसभा में 1 घंटा 16 मिनट का भाषण दिया, उनके भाषण के केंद्र में कोरोना, किसान, कृषि कानून, किसान आंदोलन और आत्मनिर्भर भारत रहे। कृषि क़ानूनों की चर्चा में उन्होंने पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री और चौधरी चरण सिंह का जिक्र किया। पढ़िए पीएम मोदी के भाषण की 15 बड़ी बातें

प्रधानमंत्री के भाषण की 15 बड़ी बातें, जानिए किन दो पूर्व पीएम को किया याद, कृषि कानून और डेयरी सेक्टर का क्या है कनेक्शन?राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 1 घंटा 16 मिनट दिया भाषण, जानिए क्या था उसमें खास

राज्यसभा में पीएम मोदी ने अपनी बात की शुरुआत कोरोना महामारी और उससे निपटने में देश की उपलब्धियों से की। लेकिन इसके बाद, कृषि कानून उनके भाषण का केंद्र रहे। कृषि क़ानूनों को उन्होंने छोटे किसानों की किस्मत बदलने वाला बताया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने ये कहा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर 15 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 25 पार्टियों के 50 से ज्यादा सांसदों ने भाग लिया।

1.मंडियां अधिक आधुनिक बनें, अधिक प्रतिस्पर्थी बनें, इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है। एमएसपी थी, एमएसपी है और एमएसपी रहेगी। जिन 80 करोड़ लोगों को सस्ते में राशन दिया जाता है, वो जारी रहेगा।


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2.देश को आगे बढ़ाने के लिए गरीबी से मुक्त करना होगा। हमारी सरकार ने अब तक 10 करोड़ से ज्यादा किसानों को पीएम किसान योजना का लाभ दिया है, 41 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खुले हैं, 2 करोड़ से ज्यादा घर बने हैं, 8 करोड़ से अधिक मुफ़्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं।

3. 1970-71 में कृषि जनगणना में 33% किसान ऐसे थे जिनके पास ज़मीन 2 बीघे से कम थी, 18 फीसदी किसानों के पास 2 से 4 बीघे (आधा हेक्टेयर से एक हेक्टेयर तक) ज़मीन थी, ये 51 फीसदी किसान थे। ये चाहे कितनी भी मेहनत करे, अपनी छोड़ी सी ज़मीन पर इनकी गुजर ईमानदारी से हो नहीं सकती है। किसानों की दयनीय स्थिति से चौधरी चरण सिंह हमेशा चिंतित रहते थे।

4.जिनके पास 1 हेक्टेयर तक ज़मीन थी, ऐसे किसान 1971 में 51 फीसदी थे वो आज 68 फीसदी हैं। यानि देश में ऐसे किसानों की संख्या संख्या बढ़ रही है जिनके पास बहुत थोड़ी ज़मीन है। आज लघु और सीमांत किसानों को मिलाएं तो 86 फीसदी है, जिसके पास 2 हेक्टेयर से कम ज़मीन है। ऐसे किसानों की संख्या 12 करोड़ है। क्या देश की इन किसानों के प्रति कोई ज़िम्मेदारी हैं? क्या हमने कभी कभी हमारी योजनाओं के केंद्र में इन किसानों को रखा? चौधरी चरण सिंह इन सवाल का जवाब हमारे लिए छोड़ गए हैं। हमें सब मिलकर खोजना होगा।

5.चुनाव के दौरान कर्ज़माफी कार्यक्रम चलाए जाते हैं। लेकिन छोटे किसानों को उनका लाभ नहीं मिल पाता है। क्योंकि वो कर्ज़ नहीं लेता, कर्ज़ तो दूर उसका बैंक खाता नहीं होता। पहले की फसल बीमा योजना भी उन्हीं किसानों के लिए होती थी जो बैंक से लोन लेते थे। बड़े किसान ट्यूबवेल लगवा लेते थे, उन्हें बिजली भी मुफ्त मिल जाती थी लेकिन छोटे किसान को पानी तक कई बार ख़रीदना पड़ता था। यूरिया के लिए डंडे खाने पड़ते थे।

6.2014 के बाद हमने कुछ परिवर्तन किया, हमने फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाया ताकि छोटा किसान भी उसका फायदा ले सके। पिछले 4-5 साल में 9 हजार करोड़ रुपए, क्लेम के रुप में किसानों को मिले हैं। ये कर्ज़माफी से बहुत बड़ा आंकड़ा है। छोटे किसान के हाथ में किसान क्रेडिट दिया, मछली पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड दिया। पौने दो करोड़ किसानों तक दायरा बढ़ चुका है। राज्यों की मदद से इसे और आगे बढ़ाएंगे।

7.पीएम किसान योजना के तहत 10 करोड़ किसान परिवारों को लाभ मिल चुका है। बंगाल में राजनीति आड़े न आती वो किसान भी जुड़ जाते और तो ये संख्या कहीं और ज्यादा होती। अब तक पीएम किसान योजना के तहत एक लाख 15 हजार करोड़ रुपए इन किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं।

8.शरद पवार जब कृषि मंत्री थे उन्होंने कृषि सुधारों की वकालत की थी, कांग्रेस ने भी वकालत की थी। पिछले 2 दशकों से कृषि सुधारों की चर्चाएं चल रही है। मैं दावा नहीं कर सकता कि मेरी सोच बहुत बढ़िया है, आज के समय जो ठीक लगा, आगे जरुरत पड़ने पर जोड़ेंगे।

9.दूध और डेयरी कारोबार किसी बंधन में नहीं है। न दूध न पशुपालक। दूध के क्षेत्र में दो हैं प्राइवेट कंपनियां और कॉपरेटिव काम करते हैं। एक बेहतरीन सप्लाई चेन बनी है। क्या पशुपालकों की डेयरी और उनके पशुओं पर किसी का कब्जा हो गया। हमारे देश में डेयरी का योगदान कृषि अर्थव्यवस्था में कुल 28 फीसदी से ज्यादा है। करीब करीब 8 लाख करोड़ रुपयों का कारोबार है, जितने रुपयों का दूध होता है उतना कारोेबार तो अनाज और दालों को मिलाकर होता है। पशुपालक को आज़ादी मिली है, अनाज और दालें पैदा करने वाले किसानों को आज़ादी क्यों नहीं मिलनी चाहिए।

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10.वो दिन याद कीजिए जब हरित क्रांति की बात होती थी, हरित क्रांति के दौरान जो आशंकाएं सामने आईं, आंदोलन हुए वो देखने लायक थे। कृषि सुधार के सख्त फैसले लेने में शास्त्री जी का ये हाल था कोई कृषि मंत्री बनने को राज़ी नहीं था। सी सुब्रमण्यम को शास्त्री जी ने मंत्री बनाया था। हरित क्रांति का योजना आयोग ने विरोध किया था। लेकिन देश की भलाई के लिए शास्त्री जी आगे बढ़े। लेफ्ट वाले उस वक्त भी कहते थे कि ये अमेरिका के इशारे पर काम कर रहे। कांग्रेस को अमेरिका का एजेंट कहते थे वो जैसे आज हमें कह रहे हैं। कृषि सुधारों को छोटे किसानों को बर्बाद करने वाला बताया गया था। लेकिन पहले शास्त्री फिर और उनके बाद की सरकारों ने काम किया और जो हम पी-480 गेहूं मंगाकर खाते थे आज अपने देश की मिट्टी में अपने किसान की उगाई चीजें खाने लगे।

11.हर कानून में 2-4 साल में बदलाव होते ही हैं। हर सरकार ने अच्छे सुझावों को स्वीकार किया है। देश को आगे बढ़ाने के लिए अच्छे सुझावों के साथ हम सबको आगे बढ़ना होगा। कृषि क्षेत्र की समस्याओं को खत्म करने के लिए आज नहीं तो कल ये करना ही होगा।

12.कृषि मंत्री जी लगातार बात कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों से मेरी प्रार्थना है। आंदोलन करना आप का अधिकार है, लेकिन इन बुजुर्ग लोगों को घर ले जाइए। आंदोलन खत्म कीजिए, मिलकर चर्चा करें, रास्ते खुले हैं, ये मैने पहले भी कहा है, आज सदन के माध्यम से भी कह रहा है। कृषि सुधारों को एक मौका देना चाहिए कि देश आगे बढ़ता रहे। जो कमी है ठीक करेंगे, जो ढिलाई है उसे टाइट करेंगे।

13.आबादी बढ़ रही है। ज़मीन छोटी हो रही है। ऐसी स्थिति में कुछ ऐसा करना होगा कि किसानी पर बोझ कम हो। किसान परिवार के लोग दो वक्त की रोटी कमा सकें। डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने की जरुरत है। इसलिए हमने खुरपका और मुंहपका के लिए अभियान चलाया है। मत्स्य के लिए अलग योजना बनाई है। शहद पर काम शुरु किया। सोलर पंप से बिजली उत्पादन, माइक्रो इरीगेशन को आगे बढ़ाया।

14.हम ये न भूले कि पंजाब के साथ क्या हुआ? बंटवारा हुआ, सबसे ज्यादा झेला पंजाब ने। 84 के दंगों में सबसे ज्यादा आंसू बहे पंजाब के। कुछ लोग हमारे, हमारे सिख भाइयों के मन में गलत चीजें भरने में लगे हैं। ये देश हर सिख के लिए गर्व करता है। देश के लिए उन्होंने क्या नहीं किया। गुरुओं की महान परंपरा की ज़मीन है पंजाब।

15.कुछ शब्दों से हम लोग बहुत परिचित है श्रमजीवी, बुद्धिजीवी, लेकिन मैं देख रहा हूं पिछले कुछ समय से इस देश नई जमात पैदा हुई है, नई बिरादरी पैदा हुई है वो है आंदोलनजीवी। वकीलों का आंदोलन है वहां नजर आएंगे, स्टूडेंट आंदोलन है वहां नजर आएंगे, मज़दूरों के आंदोलन में नजर आएंगे। कभी पर्दे के आगे कभी पर्दे के पीछे। एक पूरी टोली है जो आंदोलनजीवी है। आंदोलन के बिना जी नहीं सकते। आंदोलन से जीने के रास्ते खोजते रहते हैं। देश आंदोलनजीवी लोगों से बचे।

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