महाराष्ट्र में भारी ओलावृष्टि से 2 की मौत, फसलों को भारी नुकसान

महाराष्ट्र में भारी ओलावृष्टि से 2 की मौत, फसलों को भारी नुकसानफोटो ट्वीटर से साभार

नागपुर (आईएएनएस)। फसलों का ठीक दाम न मिलने से किसान वैसे ही मरने को विवश हैं, ऊपर से मौसम की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। देश के कई हिस्सों में हुई बे-मौसम बारिश ने खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद कर दी हैं।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ इलाके में रविवार को हुई बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि में दो लोगों की मौत हो गई और खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। प्रदेश के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, जालना, बीड, अमरावती, बुल्धाना, वाशिम, अकोला और आसपास के इलाकों में ओलावृष्टि से गेहूं, अंगूर, चना और आम की फसलों को जबर्दस्त क्षति पहुंची है। जालना व कुछ अन्य हिस्सों पर महज 15 मिनट तक ओलावृष्टि हुई लेकिन इतने में ही ऐसा दृश्य सामने आया कि हरे-भरे खेत कश्मीर की घाटी की तरह जैसे बर्फ की चादर से ढंक गए।

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किसानों ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से चना, नारंगी, केला, ज्वार व अन्य फसलें तबाह हो गईं। कुछ जगहों पर टेनिस की गेंद के आकार के ओले पड़े, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान वाशिम के यमुना हुमबड़ और जालना के नामदेव शिंदे (70)के रूप में हुई है। वाशिम में दो लोग घायल भी हुए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद सक्रियता दिखाई और राज्य के कृषि मंत्री ने सभी किसानों को उनकी तबाह हुई फसलों के लिए मुआवजा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों से सोमवार को इस संबंध में बैठकें होने वाली है।

विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल (कांग्रेस) और धनंजय मुंडे (एनसीपी) ने सरकार से सर्वेक्षण करवाकर किसानों को जल्द मुआवजा देने की मांग की है। विपक्ष ने सरकार से मार्च होने वाले बजट सत्र के पूर्व मुआवजा देने को कहा है। पुणे स्थित भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम पूर्वानुमान के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को बेमौसम बारिश होने की चेतावनी दी थी।

आपको बता दें कि उत्तर भारत में भी आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का अनुमान मौसम विभाग ने लगाया है।

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