खेती किसानी

मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र और यूपी के कई इलाकों में ओलावृष्टि , फसल देख सदमे में किसान

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में रविवार को भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों को ओले से नुकसान हुआ है। ओलों और तेज हवाओं से गेहूं की तैयार खड़ी फसल गिर गई है। देश के कई हिस्सों में सोमवार को भी बारिश जारी है।

महाराष्ट्र के कुछ हस्सिों में रविवार को बेमौसम ओलावृष्टि और भारी बारिश होने के चलते दो लोगों की जान चली गई है। और फसलों को नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि बारिश संबंधी घटनाओं के कारण दो महिलाएं घायल भी हुयी हैं। उधर मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि किसानों को परेशान होने की जरुरत नहीं, उनके नुकसान की भरपाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार बारिश और ओलों से सबसे ज्यादा नुकसान मध्य प्रदेश में हुआ है। एमपी में भोपाल समेत हरदा, सीहोर, देवास, बैतुल, शिवपुरी, भिंड, सिवनी, रायसेन, छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में भारी बारिश होने के साथ ओलावृष्टि से किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। खासकर चने, गेहूं और मसूर की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचा है।

मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के प्रवक्ता भगवान सिंह मीना ने ‘गाँव कनेक्शन’ को फोन पर बताया, “ओलावृष्टि से गेहूं की बालियां पूरी तरह बिखर गई हैं। चने की खड़ी गिल्ठियां भी नीचे गिर गई हैं। पकने वाली फसल भी गिर गई है। कई जगह किसानों को खेत काटने की नौबत नहीं आएगी। मोटे अनुमान के मुताबिक करीब 75 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।”

मौसम की मार उत्तर प्रदेश के किसानों पर भी पड़ी है। उत्तर प्रदेश में भी कुछ इलाकों में तेज हवा के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई है। इस वक्त सरसों पक रही है तो चना और मसूर में फलियां पड़ रही थी, जिन्हें काफी नुकसान पहुंचा है। औरैया के बीहड पट्टी में यमुना किनारे बसा गाँव खानपुर के किसान अब्दुल रसीद (45 वर्ष) बताते हैं, “मैंने पांच बीघा खेत में चना बोया था, बारिश के साथ ओले गिरने से फसल आधी नष्ट हो गई है। अब तो फसल पर हुआ खर्चा भी निकलना मुश्किल दिखाई दे रहा है।” वहीं, इसी जिले के गाँव पैगंबरपुर के किसान सरोज कुमार (38 वर्ष) ने बताया, “सरसों में फली आ गई थी, जो तेज हवा चलने से गिर गई है।”

उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में रविवार को घने बादल छाए रहे। इन घने बादलों को देखकर किसान चिंता में हैं। बाराबंकी जिले के सिद्धौर ब्लॉक के अजमल पट्टी गाँव के किसान जैनेन्द्र अवस्थी बताते है, "हमें डर है कि अगर यहां ओलावृष्टि होती है तो सरसों, गेहूं, चने समेत सभी फसलों को भारी नुकसान होगा।” वहीं, हैदरगढ़ ब्लॉक के तारागंज के किसान नीरज मिश्रा बताते हैं, "इस बरसात से किसान काे सिर्फ नुकसान ही होगा। मौसम को देखते हुए यहां भारी बारिश हो सकती है।"

मध्य प्रदेश में बारिश के साथ जमकर गिरे ओले।

मौसम की बेरुखी का खामियाजा महाराष्ट्र के किसान भी भुगत रहे हैं। महाराष्ट्र के जलाना जिले में काफी नुकसान की खबर है। रविवार सुबह बारिश से जिन किसानों की फसलें बच गई हैं, वो भी डरे हुए हैं। मौसम विभाग ने आऩे वाले 2 दिनों में मौसम बारिश की आशंका जताई है।

आने वाले दिन में बारिश की आशंका

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर के पास एक पश्चिमी विक्षोभ अधिक सक्रिय है, दूसरी ओर दक्षिणी राजस्थान और गुजरात में चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हो गया है, ऐसे स्थिति में दोनों के प्रभाव से उत्तर पश्चिम भारत के ज्यादातर इलाकों में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग की मानें तो 11 से 14 फरवरी के बीच जम्मू कश्मीर से लेकर मध्य भारत में मध्य प्रदेश और पूर्व में बिहार तक तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं, ओडिशा और पश्चिम बंगाल पर हवाओं में एक विपरीत चक्रवाती क्षेत्र बन गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है। ऐसे में देश के ज्यादातर राज्यों में बारिश की अच्छी संभावना है।

गेहूं की बिखरी बालियां दिखाता एक किसान।

मौसम खराब होने की नहीं दी जानकारी

हालांकि मध्य प्रदेश के लोग मौसम विभाग से नाराज नजर आ रहे हैं। भगवान सिंह मीना ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “मध्य प्रदेश के मौसम विभाग पर ताला लगा देना चाहिए क्योंकि किसानों को दो दिन में मौसम खराब होने की जानकारी नहीं दी गई। अगर जानकारी दी गई होती तो किसान पहले से फसल की व्यवस्था रखता। पिछले दो साल से ऐसा सामने आ रहा है और नुकसान सिर्फ किसानों को उठाना पड़ रहा है।”

सोशल मीडिया पर सरकार से लगाई गुहार

देश के कई राज्यों के किसानों ने सोशल मीडिया पर अपने इलाके में ओले और बारिश से हुए नुकसान की फोटो और वीडियो पोस्ट करते हुए सरकार से तुरंत सहायता की मांग की। मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी किसान चौधरी करण पड़ोदा गाँव कनेक्शन से बताते हैं, “ओलावृष्टि और भारी बारिश से किसानों को जो नुकसान हुआ है, इसके लिए सरकार जल्द बीमा कंपनियों को सक्रिय करें और किसानों को नुकसान की भरपाई करवाए।“ आगे कहा, “बैंक से अपने आप बीमा की किश्त किसानों के खातों से कट जाती है। अब देखना होगा कि वक्त आने पर उस बीमा का फायदा किसानों को होता है या नहीं।“

वहीं, नोएडा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता गौरव शर्मा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि अब सरकार की बारी है और देखना होगा कि बीमा योजना का लाभ सरकार किसानों को देती है या नहीं।“ वहीं छत्तीसगढ़ से सोमवीर दुहन ने रविवार की दोपहर फेसबुक पर लिखा, मध्य प्रदेश में भारी बारिश से किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है, छत्तीसगढ़ में बारिश शुरू हो गई है, हम दुआ करते हैं कि छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से मध्य प्रदेश जैसा हाल न हो।”

भारी बारिश सभी फसलों के लिए नुकसानदायक

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के प्रमुख प्रो. अविजीत सेन गाँव कनेक्शन’ से फोन पर बताते हैं, “देश में कृषि का करीब 65 फीसदी असिंचित क्षेत्र है, ऐसे में अगर हल्की बारिश या रुक-रुक कर बारिश होती है तो फसलों के लिए लाभदायक है, मगर यदि इस समय ओलावृष्टि और भारी बारिश होती है तो निश्चित रूप से रबी, दलहन सभी फसलों के लिए नुकसानदायक है। भारी बारिश, तेज हवाओं से खड़ी फसलें गिर जाएंगी।” वो आगे बताते हैं, “इसका असर रबी की ज्यादातर फसलों पर देखने को मिलेगा, गेहूं, चना, सरसों और दलहन के उत्पादन में कमी आ सकती है।

( इऩपुट- औरैया से इश्तियाक खान )