कहीं आपके ऑफिस के अंदर भी तो नहीं बढ़ रहा है वायु प्रदूषण

एक ताजा अध्ययन में कार्यालयों के भीतर वायु प्रदूषकों की उच्च सांद्रता का पता लगाने के बाद भारतीय शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया है।

Divendra SinghDivendra Singh   14 Nov 2018 12:12 PM GMT

कहीं आपके ऑफिस के अंदर भी तो नहीं बढ़ रहा है वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण की मार कार्यालयों के भीतर कार्यरत कर्मचारियों पर भी पड़ रही है। एक ताजा अध्ययन में कार्यालयों के भीतर वायु प्रदूषकों की उच्च सांद्रता का पता लगाने के बाद भारतीय शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया है।

कार्यालयों में पाए गए वायु प्रदूषकों में सूक्ष्म कण यानी पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) प्रमुख रूप से शामिल हैं। बाहरी वातावरण की तुलना में कार्यालय के अंदर पीएम-2.5 और पीएम-1 की अधिक मात्रा दर्ज की गई है। कार्यालयों में वायु प्रदूषकों का स्तर दोपहर की तुलना में सुबह और शाम को अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है।

ये भी पढ़ें : वायु प्रदूषण के कारण 89 प्रतिशत लोग बीमार या बेचैन: अध्ययन

साभार: इंटरनेट

नई दिल्ली स्थित केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में कार्यालय कक्ष, प्रयोगशाला और गलियारों में विभिन्न वायु प्रदूषकों की मात्रा का आकलन किया गया है। कार्यालयों के भीतर पीएम-10, पीएम-2.5 और पीएम-1 की अधिकतम सांद्रता क्रमशः 88.2, 64.4 और 52.7 माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज की गई हैं। गलियारे में भी इनकी अधिकतम सांद्रता क्रमशः 254.3, 209.4 और 150 माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर मापी गई है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, कार्यालयों में वायु प्रदूषकों के बढ़े हुए स्तर के लिए साफ-सफाई और निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूलकण, धूम्रपान, वाहनों का प्रदूषण और कमरों का तापमान और आर्द्रता मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। दिल्ली के एनएच-2 पर स्थित सीआरआरआई बिल्डिंग काम्पलैक्स में किए इस अध्ययन में प्रयोगशाला में वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (वीओसी) की अधिकतम सांद्रता 959.8 पीपीएम आंकी गई है। एनएच-2 भारी ट्रैफिक वाला क्षेत्र है, जहां वाहनों की आवाजाही निरंतर होती रहती है।

प्रमुख शोधकर्ता मनीषा गौर बताती हैं, "आंतरिक वायु प्रदूषण बाहरी वायु प्रदूषण के समान ही हानिकारक है। अभी इसे वैज्ञानिक अवधारणा के तौर पर परिभाषित नहीं किया जा सका है, पर पूरे विश्व में आंतरिक वायु प्रदूषण पर शोध किए जा रहे हैं। इससे निपटने के लिए प्राथमिक स्तर पर आंतरिक वायु गुणवत्ता को नियंत्रित करना आवश्यक है। प्रदूषकों के स्रोतों के प्रबंधन और हवादार बिल्डिंगों के निर्माण से प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। कार्यस्थलों और घरों में एयर प्यूरीफायर और इन्डोर पौधे लगाने से भी आंतरिक हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

ये भी पढ़ें : आपके फोन का कैमरा बताएगा कितना प्रदूषित है आपका क्षेत्र

शोधकर्ताओं के अनुसार, कार्यालयों में आंतरिक वायु प्रदूषकों के मिलने का एक प्रमुख कारण उनका वातानुकूलित होना है। एयरकंडीशनर के कारण खिड़कियां और दरवाजे लगभग पूरे समय बंद रहते हैं। इससे वहां प्राकृतिक रूप से हवा की आवाजाही नहीं हो पाती। कार्यालय सड़क के किनारे स्थित होने से बाहरी धूल और वाहनों का धुआं भी आंतरिक वातावरण को प्रदूषित करता है।

सामान्य कमरों की अपेक्षा प्रयोगशाला के भीतर वीओसी की सांद्रता बहुत अधिक पायी कई है। कार्यालयों में उपयोग होने वाले एयर एवं रूमफ्रेशनर, कीटनाशक, प्रयोगशाला के रसायन, डिटर्जेंट के अलावा प्रिंटर, फोटो कॉपी मशीन, स्कैनर, कम्प्यूटर एवं ऑफिस में प्रयुक्त लकड़ी के फर्नीचर और कमरों में सीलन के कारण आंतरिक वातावरण में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक बड़ी मात्रा में बनते हैं।

ये भी पढ़ें : प्रदूषण से बढ़ रही है बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता

पार्टिकुलेट मैटर से तात्पर्य वायु में छोड़े गए हानिकारक अति सूक्ष्मकणों से है। इन कणों का व्यास क्रमशः 10, 2.5 और 1 माइक्रो मीटर होता है। इसी आधार पर इन कणों को पीएम-10 पीएम-2.5 औरपीएम-1 में विभाजित किया गया है। वीओसी ऐसे कार्बनिक रासायनिक यौगिक होते हैं जो बहुत जल्दी वाष्पित हो जाते हैं। कुछ वीओसी मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होते हैं और वातावरण को भी हानि पहुंचाते हैं।

आंतरिक वायु प्रदूषण से खराब हो रही कार्यालयों की वायु गुणवत्ता का कर्मचारियों की उपस्थिति पर भी असर देखा जा सकता है। इस दिशा में और अधिक शोध तथा समाधान के लिए यह अध्ययन काफी सहायक साबित हो सकता है।(इंडियन साइंस वायर)

ये भी पढ़ें : मास्क छोड़िए , गाँव का गमछा प्रदूषण से आपको बचाएगा ...

ये भी पढ़ें : एयर क्वालिटी इंडेक्स की रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश के इन शहरों की हवा होने लगी जहरीली

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.