हमेशा अटल और गोपाल दास नीरज को दोस्ती की दास्तान याद दिलाते रहेंगे पीलीभीत के ये भवन

उत्तर प्रदेश के एक आई.ए.एस ने अनोखे अंदाज में दी स्व. अटल बिहारी बाजपेयी को अंतिम श्रद्धांजलि, नई पहल करने के लिए जाने जाते है ये यूपी के ये आईएएस...

हमेशा अटल और गोपाल दास नीरज को दोस्ती की दास्तान याद दिलाते रहेंगे पीलीभीत के ये भवन

पीलीभीत। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और साहित्यकार, शिक्षक और कवि गोपाल दास "नीरज" की दोस्ती के चर्चे आपने जरुर सुने होंगें। दोनों ही अब इस दुनिया में नहीं है। आज अटल बिहारी बाजपेयी की अस्थिया गोमती में विसर्जन के लिए लखनऊ लायी जा रही है। पुरे देश ने स्व.अटल जी के निधन के चलते शोक का माहौल है। सभी देश के इस महान नेता को प्रति संवेदना और श्रद्धांजलि अर्पित कर रहें हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश के एक सीनियर आईएस ने अनोखे अंदाज में अटल जी को श्रद्धांजलि दी है,जो हमेशा अटल बिहारी बाजपेयी और गोपाल दास "नीरज" के दोस्ती के दास्तान को बयान करती रहेगी।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और महाकवि गोपाल दास "नीरज" अच्छे और आत्मीय मित्रों में से रहें। जानकारी के अनुसार अटल बिहारी बाजपेयी और गोपाल दास "नीरज" कानपुर के डीएवी कालेज में अगल–बगल,के कमरों में रहा करते थे।

ऐसा कहा जाता हैं, कि कभी किसी अवसर पर ज्योतिष के जानकर गोपाल दास "नीरज" ने अटल बिहारी बाजपेयी से कहा था कि "ग्रहों का कुछ ऐसा योग है,कि मेरी मृत्यु के 30 दिनों के भीतर ही आपको भी आना होगा "अब इसे संयोग कहे या गोपाल दास "नीरज" का अटल बिहारी से आत्मीय लगाव या उनके ज्योतिष ज्ञान का सही होना की, 19 जुलाई 2018 को गोपाल दास नीरज के दुनिया छोड़ने के ठीक 28 दिन बाद ही 16 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी अनंत के साथ एकाकार हो गये।

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उत्तर प्रदेश के एक आईएएस ने अटल और नीरज के नाम पर किया भवनों का नामकरण

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के जिलाधिकारी डॉ अखिलेश कुमार मिश्रा ने इन दोनों विभूतियों को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कलेक्ट्रेट पीलीभीत के दो भवनों का नामकरण गोपाल दास "नीरज" भवन, और "अटल भवन" के नाम से किया हैं।

जिलाधिकारी डॉ. अखिलेश मिश्रा ने बताया, कि दोनों ही महान व्यक्तित्व हमारे देश का गौरव हैं, और दोनों लोग आपस में अभिन्न और आत्मीय मित्र थे। उनकी यादगार हमेशा बनी रहे और इस कार्यालय में बैठने, आने-जाने वाले लोगों को इनसे निरंतर प्रेरणा मिलती रहें,इस सोच के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पीलीभीत के दो भवन जो अगल-बगल हैं, इनमे से एक का नामकरण गोपाल दास "नीरज "के नाम पर हो चुका है।पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर गोपाल दास "नीरज के बगल वाले भवन जिसमे जुवेनाइल कोर्ट चलता है ,का नामकरण "अटल भवन "के नाम पर किया गया हैं।

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अपने मिलनसार अंदाज और नई पहल करने के लिए जाने जाते है ये आई.ए.एस

पीलीभीत के जिलाधिकारी डॉ. अखिलेश मिश्रा 2009 बैच के आईएस अफसर है। साथ ही एक अच्छे लेखक भी है। साऊथ एशिया की सबसे बड़ी सर्वे कम्पनी एसी-नेलशन के सर्वे के अनुसार डॉ अखिलेश की लिखी पुस्तक "यूं ही" हाल की ऑनलाइन सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताब है। पीलीभीत में डॉ. अखिलेश द्वारा जनपद के छात्रो ,समाजसेवियों की एक डिजिटल सेना बनाई गयी है ,जो जिलाधिकारी को सीधे रिपोर्ट करते है। साथ ही डॉ अखिलेश ने जनपद में साइबर क्राइम और सोशल मीडिया सुरक्षित प्रयोग के लिए जागरूकता अभियान भी चलां रहें हैं।पालीथीन बंदी का अभियान चलाते हुए डॉ. अखिलेश मिश्रा द्वारा "पालीथिन दान" कार्यक्रम भी चर्चा में रहा।

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चार्ज लेते ही शुरू कराया गोमती पुनरुद्धार का कार्य

डॉ.अखिलेश मिश्रा ने बताया, कि बहुत से लोग ऐसे भी है, जिन्हें ये पता ही नहीं होगा कि गोमती का उद्गम स्थल पीलीभीत हैं। पीलीभीत में चार्ज लेने के दौरान पीलीभीत के लोगों द्वारा गोमती को बचाने का प्रयास चल रहा था। इसे देखने के लिए गोमती नदी के उद्गम स्थल का दौरा किया। गोमती उद्गम स्थल की जमींन पर किसानों ने अवैध कब्जे किये हुए थे। सबसे पहले उस जमीन को खाली कराया गया। उद्गम स्थल पर गोमती की चौड़ाई महज आठ से दस फिट बची थी, साथ ही जलस्तर भी तेजी से घट रहा था। जिसके लिए 9 विभागों को 5 किमी नदी को विभिन्न मदों के अंतर्गत खुदवाने का काम दिया गया साथ ही पीलीभीत के लोगों को श्रमदान के लिए बुलाया गया जिसमें करीब 10 हजार लोगों ने श्रमदान किया।

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नदी को आस्था और धर्म साथ जोड़ा और पर्यटन स्थल का रूप दिया गया

डॉ. अखिलेश आगे बताते है, कि "हमारे परम्परा में नदियों को माँ का दर्जा दिया जाता है, नदी के किनारे 45 हजार की संख्या में वृक्षारोपण कराने के साथ ही उसे शारदा नहर की सब–नहर से उसमे पानी की व्यवस्था, भूजल का स्तर जो नीचे जा रहा था, एक से ढेड़ मीटर खुदवाया गया। और बारिश का पानी नदी में जाये इसकी व्यवस्था की गयी हैं। उद्गम स्थल को पर्यटन के रूप में विकसित करने के साथ ,गोमती उद्गम स्थल जाने के लिए बस सेवा भी शुरू की गयी है। साथ ही वहां पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी शुरू किया गया है।प्रयास है की गोमती की धारा अनवरत बनी रहें"।

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