Top

यहां स्कूल की दीवारें ही बन गई बच्चों की किताबें

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   14 Nov 2017 7:45 PM GMT

यहां स्कूल की दीवारें ही बन गई बच्चों की किताबेंपूर्व माध्यमिक विद्यालय, अन्नीबैजल के बच्चे।

देवांशु मणि तिवारी

अमेठी। जिले की अन्नीबैजल ग्राम सभा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को वजनदार बस्ते नहीं उठाने पड़ते हैं। स्कूल की दीवारों पर बड़े ही अच्छे ढंग से पाठ्यक्रम बनाया गया है,जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए किताबों की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय, अन्नीबैजल में कक्षा- आठ में पढ़ने वाली कामिनि मौर्या ( 13 वर्ष) की कक्षा में सौर मंडल, गणित व भौतिक विज्ञान के सूत्र व हिंदी पाठ्यक्रम की कहानियां दीवारों पर पेंट की गई हैं। कामिनी ने बताया,'' सर दीवार पर बनाई गई पेंटिंग को दिखाकर हमें पढ़ाते हैं, इससे बातें अासानी से समझ में आती हैं।''

पूर्व माध्यमिक विद्यालय, अन्नीबैजल के बच्चे।

अमेठी जिले में गौरीगंज ब्लॉक के दस सरकारी स्कूलों में बाला (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) सुविधा की मदद से कक्षा पांच से आठ तक का पूरा का पूरा पाठ्यक्रम विद्यालय की दीवारों पर बनाया गया है, जिससे स्कूल में सरकारी किताबें उपलब्ध हों या ना हों छात्रों को शिक्षा में कोई रुकावट नहीं आती है और बच्चों को भी पढ़ाई का यह तरीका पसंद आ रहा है।

बाला सुविधा के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों की दीवारों पर चित्रकारी के माध्यम से पाठ्यक्रम को पढ़ाने के बारे में गौरीगंज ब्लॉक की अन्नीबैजल पंचायत के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मो. वसीम बताते हैं, '' पूरे जिले के सरकारी स्कूलों में पिछले वर्ष कक्षा छह से लेकर कक्षा आठ तक की किताबें नहीं आई थी। ऐसे में हमने इन किताबों के आने का इंतज़ार नहीं किया और विद्यालय में बाला सुविधा के अंतर्गत दीवारों पर पाठ्यक्रम पेंट करवाया, जिससे हमें छात्रों को पढ़ाने में आसानी हो रही है।''

पूर्व माध्यमिक विद्यालय, अन्नीबैजल के बच्चे।

जिले में बाला सुविधा के अंतर्गत अभी तक गौरीगंज ब्लॉक के बाबूपुर, अन्नीबैजल, बेलखौर, टिकरिया, असैदापुर और अंबिया गाँवों के दस सरकारी स्कूलों ( आठ प्राथमिक विद्यालय और दो पूर्व माध्यमिक विद्यालय) को बाला सुविधा के अंतर्गत जोड़ा गया है। विद्यालयों में इस कार्यक्रम को लाने में मदद यहीं की स्थानीय कंपनी एसीसी सीमेंट और क्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम रही गैर सरकारी संस्था डेवलपमेंटल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन एडवांस्मेंट (देहात) कर रही हैं।

''सरकारी स्कूलों में दीवारों पर पाठ्यक्रम पेंट करवाने से छात्रों को चीज़ें आसानी से समझ आ रही हैं। जैसे कि गणित में कक्षा-पांच से ही छात्रों को कोण सिखाना शुरू कर दिया जाता है पर किताबों में सभी तरह के कोण सीखना छात्रों के लिए टेढ़ी खीर साबित होता था। ऐसे में हमने स्कूल के दरवाज़ों के नीचे ज़मीन पर चांदा ( कोण सूचक यंत्र) बनवा दिया, जिससे छात्रों दरवाज़ा खोलने पर कोण को अासानी से समझना आ गया।'' जीतेंद्र चतुर्वेदी, प्रमुख (देहात) बताते हैं।

देश से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

इन सरकारी स्कूलों में आधुनिक तरीकों से छात्रों को शिक्षा दी जा रही है और यही कारण है कि इन स्कूलों के छात्रों को कई जनपदीय और गैरजनपदीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.