जीएम बीजों के अवैध आयात पर रोक लगाए सरकार, जीएम विरोधी संगठनों ने की मांग

जीएम बीजों के अवैध आयात पर रोक लगाए सरकार, जीएम विरोधी संगठनों ने की मांगफाइल फोटो

कोएलिशन फॉर जीएम फ्री इंडिया ने विदेश व्यापार महानिदेशालय के महानिदेशक समेत तमाम सरकारी संस्थाओं को पत्र लिखकर मांग की है कि देश में जीएम बीजों के अवैध आयात को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। जीएम फ्री इंडिया ने खासतौर से ऐसे देशों से बीजों के आयात पर रोक लगाने की भी मांग की है जहां जीएम फसलों का उत्पादन होता है और सामान्य फसलों से उन्हें अलग करने या लेबल करने की कोई व्यवस्था नहीं है। कोएलिशन फॉर जीएम फ्री इंडिया देश में जिनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) फसलों का विरोध करने वाले संगठनों का समूह है। जेनेटिकली मॉडिफाइड या आनुवांशिक संशोधित फसल वे फसलें हैं, जिनके आनुवांशिक पदार्थ डीएनए में बदलाव किए जाते हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिक इनके इस्तेमाल पर एकमत नहीं हैं क्योंकि उन्हें अंदेशा है कि ये इन फसलों को खाने वाले मनुष्यों और जानवरों के आनुवंशिक पदार्थ में हानिकारक फेरबदल कर सकते हैं।

भारत में जेनेटिक फसल के नाम पर बीटी कपास की ही खेती होती है।

अपने पत्र में कोएलिशन फॉर जीएम फ्री इंडिया ने एक्सपोर्ट इंपोर्ट कमिटी की 235वीं मीटिंग का उल्लेख करते हुए लिखा है कि इसमें कमिटी ने ऐसे फैसले लिए हैं जिससे देश में जीएम फसलों के बीज आयात होने का जोखिम बढ़ गया है। मसलन,

1. अमेरिका से 30 हजार किलो मक्के के बीज आयात किए जाने की अनुमति दे दी गई है। अमेरिका में उगने वाला 90 फीसदी मक्का जीएम है।

2. ताइवान से 1200 किलो पपीते के बीजों के आयात को मंजूरी दी गई है, जबकि ताइवन अपने यहां जीमए पपीते उगाने के लिए मशहूर है और ये बीज दूसरी जगहों पर भी आयात किए गए हैं।

3. अमेरिका से 14 हजार सेब के टिशू कल्चर पौधों को आयात करने की अनुमति दी गई। सभी को पता है कि अमेरिका में जीएम सेब की खेती होती है।

ये कुछ उदाहरण पिछली मीटिंग के हैं इससे पहले की बैठकों के ब्यौरों में ऐसे ढेरों उदाहरण मिल जाएंगे। देश में प्रसंस्करण के लिए बड़ी मात्रा में आयात किए जाने वाले अनाज को लेकर निर्देश हैं कि उन्हें डिवाइटलाइज करने या उन्हें उगने से रोकने के लिए या तो बीच से अलग किया जाना चाहिए या 120 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाना चाहिए। लेकिन इन तरीकों का ठीक से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है और न ही जीएम बीजों का अवैध आयात रोका जा रहा है। ये आरोप इस तथ्य से पुष्ट होते हैं कि गुजरात में अवैध रूप से जीएम सोयाबीन की खेती की जा रही है और इसे रोकने के लिए अभी तक जिनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूवल कमिटी (जीईएसी) ने कोई कदम नहीं उठाया है।

देश में अभी तक जीएम सोयाबीन के फील्ड ट्रायल को अनुमति नहीं दी गई है, इसी से साबित होता है कि गुजरात में जीएम सोयाबीन की खेती अवैध तरीके से आयात किए गए जीएम बीजों के जरिए की जा रही है।

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पादप संरक्षण, संगरोधन और भंडारण प्राधिकारी प्रसंस्करण के लिए आयात किए जाने वाले बीजों और पादप उत्पादों में जीएम बीजों को रोक पाने में नाकाम साबित हुए हैं। दूसरे देशों में ऐसे बहुत से मामले सामने आए हैं जहां जीएम और प्रदूषित बीजों का आयात हुआ, जबकि अनुमति केवल गैर जीएम बीजों के लिए दी गई थी। इसके अलावा, पत्र में विदेश व्यापार महानिदेशालय को संबोधित करते हुए कहा गया है कि महज घोषणापत्र प्रस्तुत कर देने से ऐसे अवैध आयात नहीं रुकेंगे, जो ऐसे बीज लाने पर आमादा है वह लेकर ही आएगा। यह तभी रुक सकता है जब भारत ऐसे देशों से बीज और खाद्य पदार्थ आयात करना बंद कर दे जो जीएम फसलों और बीजों का उत्पादन करते हैं।

सीएसई के सर्वे में सामने आया कि 46 प्रतिशत आयातित खाद्य पदार्थों में जीएम फसलों के अंश मौजूद हैं।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि आयात किए गए उत्पाद जीएम मुक्त हैं ऐसी सभी फसलों, बीजों, खाद्य उत्पादों के कड़े वैज्ञानिक परीक्षण करने की जरूरत है जिनकी जीएम प्रजातियां दुनिया में पाई जाती हैं। ऐसी सभी फसलों, बीजों, खाद्य उत्पादों के कड़े परीक्षण की जरूरत है भले ही वे उन देशों से आयात की जा रही हों जहां जीएम फसलें नहीं उगाई जातीं। क्योंकि जाने अनजाने ये देश भी अपने यहां जीएम उत्पाद आयात कर सकते हैं।

चूंकि अभी दुनिया में कुछ ही फसलों की जीएम प्रजातियां विकसित की गई हैं (सोयाबीन, मक्का, कपास, कैनोला, पपीता, चुकंदर, सेब, आलू और तंबाकू) इसलिए ऐसा करने में बहुत समस्या भी नहीं होगी।

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कोएलिशन फॉर जीएम फ्री इंडिया ने अपने पत्र में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के 2016 के उस फैसले की आलोचना की है जिसमें व्यापार में आसानी के नाम पर आयात किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की खेप को खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा जांचे जाने की शर्त को हटा दिया था। नई व्यवस्था के मुताबिक, अप्रशिक्षित कस्टम अधिकारियों को यह काम सौंपा गया है। संगठन का आरोप है कि ऐसा करने से देश में अवैध रूप से आने वाले जीएम उत्पाद और तेजी से आने लगे हैं। हाल ही में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवायरनमेंट (सीएसई) बाजार में सर्वे के बाद इस नतीजे पर पहुंची कि 46 प्रतिशत आयातित खाद्य पदार्थों में जीएम फसलों के अंश मौजूद हैं।

इन सभी बातों के मद्देनजर कोएलिशन फॉर जीएम फ्री इंडिया ने सरकार से मांग की है कि:

1. ऐसे देशों से खाद्य पदार्थ और बीजों का आयात बंद किया जाए जो अपने यहां जीएम फसलें उगा रहे हैं।

2. एक मजबूत वैज्ञानिक परीक्षण व्यवस्था की स्थापना की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि प्रशिक्षित खाद्य और बीज सुरक्षा विशेषज्ञ आयातित खाद्य पदार्थों और बीजों की जांच करें। यह जांच उन देशों से आने वाले पदार्थों की भी हो जहां जीएफ फसलों की खेती नहीं होती है।

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