आस्था और प्रकृति का संगम है छठ महापर्व

मुनिया देवी की तरह देश की लाखों महिलाओं की आस्था का महापर्व छठ बिहार, यूपी, झारखंड समेत पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।

Neetu SinghNeetu Singh   2 Nov 2019 4:03 PM GMT

लखनऊ। "छठी मइया की पूजा करने से हर संकट से मुक्ति मिलती है। घर में खुशहाली और समृद्धि आती है। हम 40 साल से ये व्रत रख रहे हैं। छठ मइया की कृपा से हमारे बेटा-पतौह (बहु) नाती-पोता सब खुश हैं।" लखनऊ के लक्ष्मण मेला छठ घाट पर पूजा कर रही मुनिया देवी (80 वर्ष) ने बताया।

मुनिया देवी की तरह देश की लाखों महिलाओं की आस्था का महापर्व छठ बिहार, यूपी, झारखंड समेत पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। मुनिया मूल रूप से बलिया की रहने वाली हैं पिछले कई वर्षों से लखनऊ में अपने बेटे बहु के साथ रहती हैं। छठ मइया की गीत गाने के बाद बोली, "हम लोग कहीं भी रहें पर छठ में पूरा परिवार एक साथ रहता है। जब गाँव में रहते थे तो महीनों पहले घाटों की सफाई शुरू कर देते थे। रंगाई-पुताई करके अच्छे से सब अपना-अपना पूजा का स्थल सजाते थे लखनऊ में भी यही करते हैं।"

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लखनऊ के लक्ष्मण मेला छठ घाट पर पूजा करती महिलाएं

छठ महापर्व पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल दिवाली की चतुर्थी को नहाए-खाय से हो जाती है। अगले दिन खरना फिर षष्ठी शाम और सप्तमी सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देकर छठ पूजा की समाप्ति हो जाती है। महिलाएं 36 घंटे निर्जला व्रत परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। सप्तमी सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही पानी पीती हैं। इस पर्व का प्रकृति से गहरा रिश्ता है क्योंकि व्रत से लेकर पूजा तक जितनी सामग्री इस्तेमाल की जाती है सब प्रकृति से जुड़ी है। इस पर्व की पूजा मन्दिरों में न होकर नदी, तालाब के किनारे प्रकृति की गोद में होती है। फल और पूजा की सामग्री रखने के लिए बांस की डलिया या सूप का उपयोग होता है। पूजा में महिलाएं ठेकुआ, मालपुआ, खीर, खजूर, चावल के लड्डू, चूरा और 36 किस्म के फलों का उपयोग करती हैं।

छठ महापर्व पर हजारों की संख्या में इकट्ठा हुए लोग

भोजपुरी समाज के लिए छठ का पर्व बेहद खास होता है। भोजपुरी समाज के अध्यक्ष प्रभुनाथ राय ने कहा कि लक्ष्मण मेला घाट पर पिछले 34 साल से छठ पूजा का आयोजन किया जा रहा है। आज प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छठ पूजा घाट पर पहुंचकर सभी को इस महापर्व की बधाई और आपस में मिलजुल कर रहने की शुभकामनाएं दीं। योगी आदित्यनाथ ने कहा, "जिस तरह से दिवाली पर अयोध्या में सभी ने मिलकर एक साथ दिए जलाए उसी प्रकार आप सब अलग-अलग शहरों से आकर यहाँ छठ पर्व मना रहे हैं। यह एकता और सामूहिकता का उत्सव है। आप सब आपस में मिलजुल कर रहें यही हमारी शुभकामना है।"


बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ पूजा कृषक सभ्यता का महापर्व माना जाता है। इस समय खेतो में लहलहाती धान की फसल की पीली-पीली बालियाँ देखकर किसान मन प्रकृति के प्रति कृतज्ञता से झुक जाता है। सूर्य ऊर्जा का अच्छा श्रोत माना है इस पर्व में सूर्य देवता की ही पूजा होती है। छठ पर्व आने के महीनों पहले लोग नहरों, तालाबों की साफ़-सफाई में जुट जाते हैं। पूजा के दिन इसके किनारे घंटों बैठकर पूजा अर्चना कर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। ये पूजा विभिन्न घाटों पर सामूहिक रूप से होती हैं यहाँ ऊँच-नीच छोटे-बड़े का भेदभाव मित जाता है।


घाट पर पूजा कर रहीं देवरिया जिले की सुधा चौबे (35 वर्ष) ने बताया, "बचपन में शौक से माँ के साथ घाट पर जाते थे। शादी के बाद खुद व्रत रखने लगे। हमारी तीन बेटियां हैं छठ मइया की कृपा से एक बेटा हुआ है। इससे बड़ा पर्व हमारे लिए कोई नहीं। इस व्रत को करने से हर संकट खत्म हो जाते हैं।" सुधा चौबे की तरह हजारों महिलाएं अपनी-अपनी आस्थाओं के सतह लक्ष्मण मेला छठ घाट छठ पूजा में शामिल हुईं।

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