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कोरोना काल में न छूटे बच्चों की पढ़ाई, टीवी और स्पीकर के जरिए गाँव के मोहल्लों में पढ़ा रहा यह शिक्षक

कोरोना काल में स्कूल बंद होने के बावजूद शिक्षक अशोक लोधी के प्रयासों से गाँव के अलग-अलग मोहल्लों में करीब 270 बच्चों को पढ़ने का मौका मिल रहा है।

Tameshwar SinhaTameshwar Sinha   13 Oct 2020 11:08 AM GMT

कोरिया (छत्तीसगढ़)। मोटरसाइकिल की बेक सीट पर एलईडी टीवी, बॉक्स में माइक और सबसे ऊपर रखे स्पीकर में बजता संगीत, इन दिनों छत्तीसगढ़ के एक प्राथमिक पाठशाला के शिक्षक अशोक लोधी की मोटरसाइकिल ऐसी ही नजर आती है। जब गाँव के मोहल्लों से यह मोटरसाइकिल निकलती है तो स्पीकर पर बजते गाने को सुनकर बच्चे दौड़े चले आते हैं।

कोरोना काल के समय में बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को गांवों के खुले मैदानों या सरकारी भवनों में सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए बच्चों को पढ़ाने के निर्देश दिए थे। मगर बच्चों को पढ़ाने के लिए अशोक लोधी एक कदम आगे बढ़कर सामने आये।

अशोक लोधी ने अपने स्कूल से सिर्फ पहले से लगा एलईडी टीवी साथ लिया और 21 हजार रुपये स्वयं खर्च करके इन्वर्टर, बैटरी, माइक और स्पीकर की व्यवस्था की ताकि गाँव के बच्चों को पढ़ाया जा सके। इन सभी चीजों को अपनी मोटरसाइकिल पर सेट किया और अब वो टीवी और स्पीकर के जरिये बच्चों को गाँव के अलग-अलग मोहल्लों में पढ़ा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के विकासखंड बैकुंठपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर संकुल केंद्र सारा है। इस संकुल की प्राथमिक शाला फाटपानी में अशोक लोधी शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। इन दिनों अशोक गाँव में बच्चों को न सिर्फ टीवी में वीडियो दिखा कर पढ़ाते हैं, बल्कि कार्टून भी दिखाते हैं। इसलिए गांव में लोग उन्हें सिनेमा वाले बाबू के नाम से भी बुलाने लगे हैं।

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के विकासखंड बैकुंठपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर संकुल केंद्र सारा में बच्चों को पढ़ाते शिक्षक अशोक लोधी। फोटो : गाँव कनेक्शन

गाँव में शिक्षक अशोक लोधी से पढ़ने 10 वर्षीय छात्र दीपक सिंह बताते हैं, "हमको टीवी देख कर पढ़ना अच्छा लगता है और यहाँ हम लोग हिंदी, अंग्रेजी, गणित सभी विषय पढ़ते हैं, हमारे गुरुजी हमारे पास खुद आकर हमें पढ़ाते हैं। बहुत अच्छा लगता है और हम लोग टीवी देख कर जल्दी सीखते भी हैं।"

खास बात यह भी है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से ऐसे समय में बच्चों के लिए पढ़ई तुहर दुआर और दीक्षा नाम से कुछ मोबाइल ऐप भी बनाये गए हैं। मगर कई बच्चे ऐसे हैं जिनके पास स्मार्ट फ़ोन नहीं हैं और वो इन ऐप के जरिये नहीं पढ़ पाते। मगर अशोक लोधी के प्रयासों से इन्हीं मोबाइल ऐप्स की बदौलत ये बच्चे अब वीडियो देख कर पढ़ाई कर पाते हैं और उन्हें अपने सभी विषयों की विषय वस्तु मिल जाती है।

गाँव में ऐसी मोहल्ला क्लास में अपने बच्चे को पढ़ा रहे अभिभावक रघुनाथ सिंह 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "हमारे गाँव में अशोक लोधी जी सिनेमा वाले बाबू बुलाए जाने लगे हैं, मैं उनको धन्यवाद देता हूँ कि टीवी के जरिये गाँव के मोहल्लों में आकर पढ़ाते हैं, इससे बच्चों की पढ़ाई भी हो जाती है और उनका मनोरंजन भी हो जाता है।"

टीवी के माध्यम से पढ़ाई कर रहे गाँव के बच्चे। फोटो : गाँव कनेक्शन

अच्छी बात यह भी है कि कोरोना काल में स्कूल बंद होने के बावजूद शिक्षक अशोक लोधी के प्रयासों से गाँव के अलग-अलग मोहल्लों में करीब 270 बच्चों को पढ़ने का मौका मिल रहा है। इन मोहल्ला क्लास के जरिये वे अपने सभी विषय पढ़ पा रहे हैं।

'गाँव कनेक्शन' से बातचीत में शिक्षक अशोक लोधी बताते हैं, "यह आईडिया इसलिए आया क्योंकि बच्चों का टीवी और मोबाइल में रुझान ज्यादा होता है, और बच्चे मनोरंजन करते हुए कार्टून के माध्यम से पढ़ेंगे, साथ ही सोशल डिसटन्सिंग का भी पालन हो सकेगा, बच्चों और अभिभावकों का हम पर विश्वास होता है, इसलिए मैंने ऐसा किया।"

"जब मोटरसाइकिल पर पहली बार मुझे गाँव वालों ने देखा, तो बच्चों के अभिभावकों ने पूछा और देख कर मेरे प्रयासों की सराहना भी की, ऐसे दौर में नए प्रयासों की जरूरत है, और शिक्षक भी नए प्रयासों को अपनाएं और बच्चों को पढ़ायें।"

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