भूख से मौतों का मुद्दा: अदालत ने केन्द्र व आप सरकार से मांगा जवाब

भूख से मौतों का मुद्दा: अदालत ने केन्द्र व आप सरकार से   मांगा जवाब

नयी दिल्ली (भाषा)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर केन्द्र और आप सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी तथा देश के अन्य हिस्सों में भूख से लोगों विशेषकर बच्चों की मौतों से संबंधित मुद्दों पर गौर करने के लिए उन्हें निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की पीठ ने गृह मंत्रालय और नयी दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करके याचिका में उठाए गए मुद्दे पर उनकी राय पूछी। इस जनहित याचिका में दावा किया गया है कि कुपोषण और भूख से मौत की घटनाएं झुग्गियों में रहने वालों में ज्यादा होती हैं क्योंकि इनमें से कई के पास सस्ती दर वाला खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए राशन कार्ड नहीं हैं।


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ग्लोबल हंगर इंडेक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में जहां करीब 50 लाख बच्चे कुपोषण के चलते जान गंवाते हैं, वहीं गरीब देशों में 40 प्रतिशत बच्चे कमजोर शरीर और दिमाग के साथ बड़े होते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में 85 करोड़ 30 लाख लोग भुखमरी का शिकार हैं। अकेले भारत में भूखे लोगों की तादाद लगभग 20 करोड़ से ज्यादा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन यानी एफएओ की एक रिपोर्ट बताती है कि रोजाना भारतीय 244 करोड़ रुपए यानी पूरे साल में करीब 89060 करोड़ रुपये का भोजन बर्बाद कर देते हैं।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास विभागों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाए।

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अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 15 फरवरी 2019 की तारीख तय की है। अदालत ने यह आदेश वकील मनीष पाठक द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया जिन्होंने दावा किया कि झुग्गियों में रहने वाले गरीब परिवारों के पास पते के सबूत की कमी के कारण अक्सर राशन कार्ड नहीं होते। याचिका में कहा गया कि यह उन्हें सस्ती दर वाला खाद्यान्न देने से इंकार करने का आधार नहीं होना चाहिए।

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