चालू वित्त वर्ष 2019-20 में 5 % रह सकती है आर्थिक विकास दर, 11 साल में सबसे कम

चालू वित्त वर्ष 2019-20 में 5 % रह सकती है आर्थिक विकास दर,  11 साल में सबसे कम

चालू वित्त वर्ष 2019-20 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पांच फीसदी रहने का अनुमान है जो पिछले 11 साल में सबसे कम है। सांख्यिकी मंत्रालय (सीएसओ) के जारी आंकड़ों के अनुसार जीडीपी 5 फीसदी रह सकती है जो बीते साल 2018-19 में 6.8 फीसदी थी। वहीं ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 4.9 फीसदी रह सकती है जो इससे पहले 2018-19 में 6.6 फीसदी थी। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने भी दिसंबर 2019 में 5 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया था। मौजूदा वित्त वर्ष 31 मार्च को खत्म होगा।

सीएसओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट की वजह विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर घटना है। कृषि, बिजली, गैस और जलापूर्ति जैसे क्षेत्रों की वृद्धि दर भी नीचे आयेगी। जबकि खनन, लोक प्रशासन और रक्षा जैसे क्षेत्रों की वृद्धि दर में सुधार की संभावना व्यक्त की गई है। मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर के 2019-20 में 2% बढ़ने की उम्मीद है, जबकि पिछले वर्ष में यह 6.9% थी। केंद्र ने जीडीपी पर पहला पूर्वानुमान चालू वर्ष के 9 महीने के आंकड़ों पर आधारित है। सरकार बजट पेश करने के बाद एक और पूर्वानुमान जारी करेगी।

देश की आर्थिक स्थिति कैसी है और आने वाले समय कैसी रहेगी इसका अनुमान जीडीपी के आंकड़ों से ही लगाया जाता है। भारत में जीडीपी के आंकड़ों की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही के आधार पर होती है।

कृषि, खनन, मैन्युफैक्चरिंग, बिजली, कंस्ट्रक्शन, व्यापार, रक्षा और अन्य सेवाओं के प्रदर्शन के आधार पर आंकड़ें जारी किये जाते हैं। और इसे संबंधिक मंत्रालयों से जुटाने के बाद सरकारी संस्था केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) जारी करता है।

सांख्यिकी मंत्रालय की पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें


सांख्यिकी मंत्रालय (सीएसओ) ने मंगलवार सात जनवरी को जारी पहले एडवांस एस्टीमेट के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सुस्त रिकवरी होने या एकदम नहीं होने के आसार हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि अगर पहली छमाही में 4.8 रही जीडीपी ग्रोथ दूसरी छमाही में 5.2 फीसदी रहती है तो पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में आर्थिक विकास की दर 5 फीसदी हो सकती है जो कि वित्तिय वर्ष 2020 के आर्थिक सर्वे में अनुमानित 7 फीसदी की विकास दर से काफी कम है।

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इससे पहले एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी दिसंबर 2019 में अर्थव्यवस्था के वृद्धि दर अनुमान में कटौती की थी। अपने बयान में उन्होंने कहा था कि वर्ष 2019-20 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद में बढ़त 5.1 फीसदी तक रहेगी। एडीबी ने कहा कि नौकरियों के सृजन की सुस्त रफ्तार और खराब फसल की वजह से ग्रामीण इलाकों की हालत खराब होने की वजह से उसे अपने अनुमान में कटौती करनी पड़ी।

पी चिंदबरम ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिंदबरम ने विकास दर पांच फीसदी रहने के अनुमान को लेकर मौजूदा सरकार पर निशाना साधा है। अपने ट्वीवट में उन्होंने लिखा है, " कल जारी की गई राष्ट्रीय आय 2019-20 के अग्रिम अनुमान भाजपा सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था की उपेक्षा और कुप्रबंधन की कहानी कहते हैं. पांच फीसदी की अनुमानित वार्षिक वृद्धि अतिशयोक्तिपूर्ण है. पहली छमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.75 फीसदी थी तो यह विश्वास करना मुश्किल है कि दूसरी छमाही में यह 5.2 फीसदी होगी।"

एक और ट्वीट में उन्होंने दावा किया, "प्रमुख क्षेत्र पांच फीसदी से कम दर पर विकसित होंगे। वास्तव में यह 3.2 फीसदी से अधिक नहीं होगी। इनमें कृषि, खनन, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र शामिल हैं। इस प्रकार, सभी रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्र 3.2 फीसदी या उससे कम की दर से ही बढ़ेंगे। सरकार का दावा है कि लाखों नौकरियां पैदा हो रही हैं, यह एक बड़ा जुमला है।"

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