‘जिंदगी लाइव’ के जरिए सरोकार की पत्रकारिता करने वालीं ऋचा अनिरुद्ध ने दी गांव कनेक्शन को बधाई

‘जिंदगी लाइव’ के जरिए सरोकार की पत्रकारिता करने वालीं ऋचा अनिरुद्ध ने दी गांव कनेक्शन को बधाईवरिष्ठ पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध

एक ओर भारत की बेटियां अपने हौसले से देश का नाम रोशन कर रही हैं तो दूसरी ओर बेटियों को पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता है। बेटों की चाह में बेटियों को दुनिया में आने से पहले ही भ्रूण हत्या कर देने वाली बीमार मानसिकता को सिर्फ जागरूकता के जरिए ही दूर किया जा सकता है। पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध का मानना है कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की पहली कड़ी भ्रूण हत्या से जुड़ी है इसलिए गाँव से लेकर शहर तक बच्चियों और महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल दिया जाना चाहिये।

गाँव कनेक्शन के लिए उनका संदेश

ऋचा अनिरुद्ध ने गाँव कनेक्शन के 5 साल पूरा होने पर बधाई देते हुए कहा कि “मेरा गाँव कनेक्शन से लंबा और पुराना कनेक्शन है। 2012 में जब मैं लंदन में थी तब मेरे पास नीलेश मिसरा का एक मैसेज आया कि क्या आप गाँव कनेक्शन के लिए लिखना चाहेंगी? और मैंने तुरंत बिना कुछ सोचे हां कर दिया था। उसके बाद एक साल तक मैंने कॉलम लिखा जिसका नाम रखा गया "ज़िन्दगी रिचार्ज"।

कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन के साथ ऋचा अनिरुद्ध

कुछ साल बाद मैं लखनऊ आई थी, तो मैं गाँव कनेक्शन के ऑफिस भी आई थी और पूरी टीम से भी मुलाकात हुई थी। इस नाते मैं गाँव कनेक्शन को काफी अपना मानती हूँ। बहुत बारीकी से आपके प्रोजेक्ट्स देखती हूँ, आपकी रिपोर्ट्स पढ़ती हूँ। बहुत अच्छा लगता है कि यह नया प्रोजेक्ट इतना बेहतरीन काम कर रहा है। आपकी पूरी टीम को मेरी ढेर सारी बधाइयाँ और शुभकामनाएं।अभी तो सिर्फ पांच साल हुए हैं ना, अभी बहुत लंबा रास्ता बाकी है।एक एक टीम मेम्बर को बहुत बधाई, खासकर नीलेश मिसरा को।

उनकी यह स्पीच देख कर आपके अंदर भी कुछ कर गुजरने का जज्बा आ जाएगा ।

हाल में ही एक ट्वीट के द्वारा, उन्होंने स्मॉग के लिए अकेले किसान को दोष देने के बजाय प्रधानमंत्री से इसके निवारण के उपाय पूछे।

ऋचा अनिरुद्ध का जन्म 31 मई, 1975 को रीवा, मध्य प्रदेश में हुआ था। अपने बारे में बताते हुए वह कहती हैं, “मेरे पिताजी एक डॉक्टर और माँ एक गृहणी हैं। मैं जब छोटी थी तब कुछ समय तक उत्तर प्रदेश के मूढ़ा पाण्डेय के एक प्राथमिक स्वास्थय केंद्र में रही, फिर 1976-1978 में मुरादाबाद के धनौरा में भी रही। फिर 1981 में झाँसी से मेरी पढ़ाई शुरू हुई। ग्रेजुएशन के बाद मैं दिल्ली आ गई और डीडी नेशनल के एक कार्यक्रम, "अंकुर" के लिए एंकरिंग शुरू करी।

‘1997 में मेरी शादी हो गई और मैं अजमेर चली गई। वहीँ पर 1998 में मैंने एक दैनिक अखबार "दैनिक नवज्योति" में पत्रकार के रूप में ज्वाइन किया। उसके बाद 2001 में मैं दिल्ली वापस आ गई और पंडित रवि शंकर के ऑफिस में काम करने लगी। 2005 में मैंने चैनल 7 ज्वाइन किया, एक विशेष संवाददाता और न्यूज़ एंकर के रूप में और 2007 से मैंने "जिंदगी लाइव" कार्यक्रम शुरू किया। ऋचा ने बिग एफएम में भी शो होस्ट किया है।’’

देसी चीज़ों की शौक़ीन ऋचा ने अपने ट्वीट के माध्यम से देसी खाने को लोगों के साथ शेयर की।

ऋचा अनिरुद्ध ऑन स्क्रीन ही नहीं, ऑफ स्क्रीन भी अपने सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग दिखाई देती हैं। लेखन और एंकरिंग के दौरान तो वे जनहित और मानवीय मूल्यों से जुड़े मुद्दे उठाती ही हैं,इसके अलावा व्यक्तिगत रूप से भी सांस्कृतिक और समाज कल्याण संबंधी गतिविधियों में संलग्न रहती हैं। उनकी यही बात उन्हें समकालीन पत्रकारों में अग्रणी और सम्माननीय बनाती है।

जिंदगी बदलने वाला मोड़

2007 में उन्हें बहुप्रचलित शो ‘जिंदगी लाइव’ को होस्ट करने का मौका मिला और इस शो को उन्होंने अपने अभिनय से ख्याति के मुकाम तक पहुंचा दिया। साथ ही ऋचा भी पत्रकारिता जगत में एक चमकता हुआ सितारा बन गईं। ‘जिंदगी लाइव’ शो को कई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, साथ ही उन्होंने भी कई बार इसकी बेस्ट एंकरिंग का खिताब अपने नाम किया।

जिंदगी लाइव शो में एक किसान के बेटे ने आइएएस की परीक्षा कैसे उत्तीर्ण की, उस पर उनका शो देखिये, जो आपको अंदर से मोटीवेट कर देगा।

Share it
Top