आग का मौसम: ये सावधानियां बरतें नहीं होगा जान माल का नुकसान 

आग का मौसम: ये सावधानियां बरतें नहीं होगा जान माल का नुकसान अग्निशमन सेवा सप्ताह 14 से 20 अप्रैल तक हर साल मनाया जाता है 

बढ़ते तापमान के साथ-साथ आगजनी की घटनाएं भी बढ़ने लगती हैं। कई बार ऐसी दुर्घटनाएं प्राकृतिक होती हैं तो कईं बार इंसानी चूक से। गर्मी में खेतों में बीड़ी-सिगरेट की चिंगारी और चूल्हे की आग से किसानों की मेहनत बर्बाद हो जाती है। कई बार छोटी सी लापरवाही और भूल से आशियाना जलकर खाक हो जाता है। इससे क्षति तो होती ही है कई बार लोगों को जान भी गंवानी पड़ती है। ऐसे में अगर हम कुछ सावधानियां बरत लें तो जान-माल का खतरा टल सकता है।

14 अप्रैल वर्ष 1944 को मुंबई बंदरगाह में अचानक आग लग जाने से 66 अग्निशमन अधिकारी वीरगति को प्राप्त हुए थे। इन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और अग्नि से बचाव के उपाय बताने के लिए देशभर में राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस 14 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिवस अब एक दिन न मनाकर 14 से 20 अप्रैल तक ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ मनाया जाता है। जिसमें हर जिले में पूरे एक सप्ताह अग्निशमन विभाग जगह-जगह बैठकें करते हैं, रैलियां निकालते हैं और पम्पलेट बांटकर लोगों को आग से सुरक्षा के लिए जागरूक करते हैं।

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फायर सर्विस आबादी के अनुसार हर जिले में जगह-जगह पर दमकल गाड़ियां खड़ी करते हैं जिससे कम समय में गाड़ी पहुंचकर लोगों की मदद कर सके। हर जिले में आबादी के हिसाब से सीयूजी नम्बर दिए जाते हैं, काल आते ही गाड़ियों को गन्तव्य तक तुरंत रवाना किया जाता है। अगर किसी को सीयूजी नम्बर याद नहीं है तो डायल 100 पर काल करने से भी तुरंत मदद मिलती है, क्योंकि ये नम्बर अग्निशमन विभाग से कनेक्ट होता है।

उत्तर प्रदेश फायर सर्विसेज के निदेशक पीके राव का कहना है, “किचन की आग या शार्ट सर्किट से झुग्गी-झोपड़ी या गाँव में जब भी आग लगती है तो यह बहुत तेजी से फैलती है। कोई भी अग्नि दुर्घटना हो उसे नियंत्रित करना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए आप सभी से अनुरोध है आग न लगे इसके लिए पूरी सावधानी बरतें।”

लखनऊ मुख्यालय में स्थित अग्निशमन विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभय भान पाण्डेय ने बताया, "हर मौसम में अग्निशमन विभाग तैयार रहता है, लखनऊ जिले में आठ फायर स्टेशन हैं। जिसमें 28 अग्निशमन गाड़ियां हैं, जो किसी प्रकार की आग पर काबू पाने के लिए सक्षम हैं। जिले में 186 फायर मैन, 64 ड्राइवर और 48 लीडिंग फायर मैन हैं।’’

अग्निशमन अधिकारी शिवदरस प्रसाद माइक पर बोलते हुए छात्राओं को समझा रहे कि आग को कैसे बुझाया जाए

कानपुर देहात जिला के अग्निशमन अधिकारी शिवदरस प्रसाद का कहना है, “ज्यादातर आग घूर (गोबर का ढेर) से लगती है, इसलिए जबतक चूल्हे की राख पूरी तरह से बुझ न जाए तबतक उसे कूड़ा-करकट के ढेर में न फेकें। शौच के दौरान बीड़ी-सिगरेट बिलकुल न पिएं, अगर पीते भी हैं तो इसे पूरी तरह से बुझाकर ही फेकें।”

वो आगे बताते हैं, “जब भी किसी के खेत में आग लगे, वीडियो बनाने की बजाए तुरंत उसे सभी लोग मिलकर बुझाने में लग जाएं जिससे आग पर तुरंत काबू पाया जा सके। जहां आग लगी है वहां से दो मीटर की दूरी छोड़कर आग बुझाना शुरू करें।”

अगर ये तरीके अपनाएं तो नहीं लगेगी आग

  1. बिस्तर पर लेटकर बीड़ी-सिगरेट न पिएं। शौच के दौरान बीड़ी-सिगरेट न पिएं। जलते हुए बीड़ी-सिगरेट के टुकड़े को पैर से कुचलकर पूरी तरह से बुझाकर की फेकें।
  2. हुक्का पीने के बाद चिलम की आग को पूरी तरह से बुझाकर फेकें।
  3. किसान जब भी खेत में खलिहान या कटी हुई फसल का ढेर बनाएं तो वहां बिजली के तारों से दूरी जरुर रहे।
  4. खेत का खरपतवार तबतक न जलाएं जबतक आसपास दूसरे की सूखी फसल खड़ी हो। अगर बगीचा पास में है तो सूखे पत्ते में आग न लगाएं।
  5. खलिहान और फूस के मकान रेलवे लाइन से कम से कम 100 फीट की दूरी पर हों।
  6. बिजली के तार के नीचे ट्रांसफार्मर के पास खलिहान न लगाएं और न ही फूस के छप्पर बनाएं।
  7. पुआल और गोबर के कंडे सूख जाने के बाद रहने की जगह से 100 फीट की दूरी पर ढेर लगाएं।
  8. जलती हुई लालटेन और ढिबरी में मिट्टी का तेल खत्म होने पर न डालें। लालटेन और ढिबरी को बुझाने के बाद ठंडा हो जाने पर ही मिट्टी का तेल डालें।
  9. चूल्हे की जलती हुई बची लकड़ी को बुझाकर अलग रखें। गर्म राख को पूरी तरह से ठंडा करके किसी गड्ढे में डालें। कूड़े के ढेर और गोबर के घूर पर इसे कतई न फेकें।
  10. खेत में फूस उस समय जलाएं जब आसपास सूखी फसल न खड़ी हो और हवा न चल रही हो।
  11. ट्रैक्टर की चिंगारी से खलिहान को बचाए।
  12. शादी समारोह या किसी त्यौहार में खलिहान और फूस के आसपास कोई आतिशबाजी न चलाएं
  13. लैम्प, लालटेन और ढिबरी को सुरक्षित स्थान पर ही टांगे, छप्पर के पास बिलकुल न टांगें।

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रसोईघर में आग से ऐसे करें सुरक्षा

  1. निर्धारित समय पर गैस में लगे रबर के पाइप को बदल दें।
  2. गैस लीक करने पर किचन में बिजली के स्विच को ऑन-ऑफ़ न करें।
  3. गैस का सिलेंडर हमेशा खड़ा रखें। खाना बनाने के तुरंत बाद गैस का रेगुलेटर बंद कर दें।
  4. जलते हुए स्टोव में मिट्टी का तेल न डालें।
  5. भोजन बनाते समय अपने शरीर के कपड़ों का प्रयोग चूल्हे पर चढ़े बर्तनों को उतारने के लिए न करें।
  6. खाना बनाते समय साड़ी के आंचल या दुपट्टा को बांध कर रखें। जिससे स्टोव या चूल्हे ही लपटें इसमें न लग सकें।
  7. रसोई घर की छत टीन से बनाएं अगर फूस का छप्पर है तो मिट्टी का लेप जरुर करें।

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ग्रामीण इन बातों का रखें ध्यान

  1. गर्मियों में जानवरों को छप्पर में लोहे की जंजीर से न बांधें। कमजोर रस्सी और कमजोर खूटे का प्रयोग करें जिससे अगर कभी आग लग जाए तो जानवर आसानी से भाग सकें।
  2. कपड़े में आग लगने पर भागें नहीं बल्कि जमीन पर लेटकर या कम्बल डालकर बुझाएं।
  3. माचिस बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  4. भोजन बनाने के बाद चूल्हे के ईधन को पूरी तरह से बुझा दें।
  5. मोमबत्ती, चिराग और अंगीठी का इस्तेमाल अगर करना पड़े तो उसका उपयोग सुरक्षित और खुले स्थान पर ही करें।
  6. घर में बिजली के कटे-फटे तारों को तुरंत बदल दें। एक ही प्लग पर बहुत सारी चीजें न लगाएं।
  7. कार्यालय और घरों में बिजली स्टोव, आयरन प्रेस का इस्तेमाल करने के तुरंत बाद प्लग से हटा दें।
  8. गैस सिलेंडर के लीकेज का थोड़ा भी आभास हो तो आसपड़ोस की अंगीठी तुरंत बुझवा दें। जबतक घर का वायुमंडल शुद्ध न हो जाए तबतक दियासलाई न जलाएं। लीक करने वाले सिलेंडरों को तुरंत खुले स्थान पर निकाल कर बाहर रख दें।
  9. एक ही कमरे में गैस, अंगीठी और बिजली का स्टोव न जलाएं।

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आग को बुझाने के लिए अपनाएं ये कुछ तरीके

  1. गर्मी के दिनों में गाँव के सूखे तालाबों को नहर या ट्यूबवेल से पानी भरकर रखें। अगर कभी आग लग जाए तो जरूरत पड़ने पर इस पानी से आग को बुझाया जा सके।
  2. गाँव के तालाब या पानी के जो भी संसाधन हैं वहां ऐसा रास्ता हो जिससे फायर बिग्रेड की मशीने व यंत्र आसानी से पहुंच सकें।
  3. खलिहान हमेशा तालाब या पानी के साधनों के नजदीक लगाएं जिससे अगर कभी आग ल्ल्ग जाए तो बुझाने में मदद मिल सके।
  4. खलिहान के पास पानी से भरे घड़े और मिट्टी के ढेर हमेशा तैयार रखें।
  5. अगर फसल में आग लग जाए तो दो मीटर की दूरी छोड़कर ट्रैक्टर दौड़ा दें आग पर काबू हो जाएगा।
  6. जिधर से फसल जल चुकी है आगर वहां से न बुझाएं, कुछ दूरी से आग बुझाना शुरू करें।
  7. किसी भी हरे पेड़ की डाली से जलती हुई फसल को कई लोग एक साथ फुर्ती से कई बार पीटें जिससे आग बुझ जायेगी, इसे बीटिंग मैथड कहा जाता है।

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