बुंदेलखंड को सूखे से राहत दिला सकता है इजराइल, राजदूत ने मांगी रिपोर्ट

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यूपी के बुंदेलखंड जिले में सूखा झेलने वाले लोगों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदि‍त्यनाथ ने इजराइल के राजदूत से मुलाकात कर पानी की समस्‍याओं पर बात की। सीएम ने कहा कि भारत व इजराइल के संबंध बहुत पुराने हैं। इस संबंध को उत्तर प्रदेश और मजबूत करना चाहता है। इस दौरान राजदूत ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लिए जल संरक्षण तथा भूगर्भ जल रीचार्जिंग के संबंध में रिपोर्ट तैयार करने का सुझाव दिया है।

गौरतलब है कि इजरायल जल प्रबंधन के मामले में दुनिया में सिरमौर है। यह देश जिस पानी का इस्तेमाल करता है उसमें से 94 फीसदी पानी रिसाइकल किया जाता है। ऐसे में यूपी में इसका प्रयोग कर जल का साफ कर फ‍िर से अपने प्रयोग में लिया जा सकता है।

इजराइल के राजदूत रोन मलका ने गुरुवार देर शाम लोक भवन में मुख्यमंत्री योगी आदि‍त्यनाथ से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की कृषि, जल संरक्षण एवं रीचार्जिंग, पेयजल आपूर्ति, जल पुनर्चक्रण, सिंचाई, पुलिस आधुनिकीकरण, खाद्य प्रसंस्करण आदि क्षेत्रों में इजराइली अनुभव तथा तकनीक के इस्तेमाल से काफी लाभ उठाया जा सकता है।


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उन्होंने कहा कि इजराइली तकनीक का इस्तेमाल करते हुए जल आपूर्ति के पायलट प्रोजेक्ट चलाए जाएं। उन्होंने पुलिस आधुनिकीकरण में इजराइली तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अत्याधुनिक कण्ट्रोल रूम और कमाण्ड सि‍स्टम स्थापित करने पर भी बल दिया।

एक सरकारी प्रवक्ता ने देर रात एक बयान मे बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने इजराइल के राजदूत को कृषि प्रबन्धन, कृषि विपणन, रक्षा कोरीडोर, सिंचाई एवं फसल प्रबन्धन, भूगर्भ जल, कौशल विकास, डेयरी, अवस्थापना विकास, अंतर्देशीय जल मार्ग, एक्सप्रेस-वे नि‍र्माण में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया था। इन क्षेत्रों में इजराइल की तकनीक और उनके अनुभव से काफी लाभ उठाया जा सकता है। इनमें भारत और इजराइल के सहयोग से उत्तर प्रदेश बड़े पैमाने पर लाभान्वित हो सकता है।

इस अवसर पर इजराइल के राजदूत ने कहा कि भारत इजराइल का सामरिक (स्ट्रैटिजिक) भागीदार है। उनका देश भारत की हर संभव सहायता करेगा। इजराइल उत्तर प्रदेश में एक फ्लैगशिप प्रोग्राम स्थापित करना चाहता है। उत्तर प्रदेश के विभि‍न्न क्षेत्रों में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए उनका देश तत्पर है।

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उन्होंने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लिए जल संरक्षण तथा भूगर्भ जल रीचार्जिंग के सम्बन्ध में व्यापक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड की भौगोलिक परि‍स्थितियां और जल स्रोतों की स्थिति इजराइल से काफी मिलती-जुलती हैं। ऐसे में इजराइल बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जल की उपलब्धता बढ़ाने, भूगर्भ जल की रीचार्जिंग तथा अन्य जल स्रोतों के रख-रखाव में काफी मदद कर सकता है।


इजराइल के राजदूत ने कहा कि उनका देश उपलब्ध जल का 94 प्रतिशत रीसाइकिलिंग इत्यादि से इस्तेमाल में लाता है, अर्थात वहां पर जल की बर्बादी लगभग न के बराबर है। उन्होंने सितम्बर, 2019 में तेल अवीव में होने वाले रक्षा सम्मेलन तथा नवम्बर, 2019 में इजराइल में जल संरक्षण पर आयोजित होने वाले सम्मेलन में भाग लेने के लिए मुख्यमंत्री योगी को आमंत्रित किया।

इजराइल ऐसे बचाता है पानी...

इंडिया वाटर पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसा इजरायल ने पानी बचाने के लिए कई छोटे-बड़े उपाय किए हैं, जिनमें से कुछ राष्ट्रीय स्तर पर तो कुछ स्थानीय स्तर पर किए गए हैं। कम पानी में काम चलाने के लिए देश के लगभग हर विभाग ने दिशा निर्देश बनाए हैं। इजरायल के विभिन्न नगर निकायों के ऊपर जल के दुरूपयोग व प्रदूषण पर कड़ी नजर रखने का जिम्मा है।

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ड्रेनेज की सफाई के लिए टैक्स लगाने की व्यवस्था है। फैक्ट्रियों में लवणों का उपयोग सीमित मात्रा में ही किया जा सकता है। सिंचाई में भी रिसाइकिल किए जल के उपयोग का निर्देश है। इतना ही नहीं इजरायल में सिंचाई में उपयोग किया जाने वाला 75 प्रतिशत पानी का फिर से इस्तेमाल होता है।

पानी के कड़े प्रबंधन के बदौलत ही इजरायल अपनी आवश्यकता का 93 प्रतिशत खाद्यान्न खुद ही उपजाता है। जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। इस प्रकार कुछ ही जगहों पर समुद्र तटों, नदियों व झीलों में तैरने की इजाजत है।

खारे पानी को पेयजल में बदलने के मामले में इजरायल दुनिया का अग्रणी देश है। ऐसे प्लांट भारत में पहले से हैं, लेकिन इजरायली तकनीक कहीं ज्यादा उन्नत है। इजरायल ने ऐसा संयंत्र तैयार किया है जो गंदे खारे पानी को पेयजल में बदल सकता है। इजरायल ने हवा से पानी बनाने की तकनीक पर भी विशेषज्ञता हासिल कर ली है। सौर ऊर्जा का प्रयोग करके यहां हवा की नमी से पीने का पानी बनाया जाता है। (इनपुट भाषा)

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