सिकुड़ रहा है लोनार झील का क्षेत्र

सिकुड़ रहा है लोनार झील का क्षेत्रलोनार झील का क्षेत्र सिकुड़ रहा।

मुंबई (भाषा)। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित खारे पानी की झील लोनार झील का क्षेत्र धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है। इसका निर्माण 50,000 वर्ष पहले एक उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ बताया जाता है।

अनुसंधानकर्ताओं ने यह जानकारी दी। पुणे के सेंटर फॉर सिटिजन साइंस (सीसीएस) के शोधकर्ताओं की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय भू-विरासत स्मारक के तौर पर अधिसूचित इस झील की परिधि पिछले तीन साल में 100 मीटर तक कम हुई है।

झील का 'औसत व्यास ' लगभग 1.2 किलोमीटर है। विकास के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि आसपास के क्षेत्रों में कृषि और गैर कृषि गतिविधियों के लिए पानी के उपयोग के कारण जलस्तर में कमी आ रही है। सीसीएस टीम 2003 के बाद से ही इंटर यूनिवर्सिटी फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के साथ लोनार झील का अध्ययन कर रही है।

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मुंबई से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लोनार झील एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल होने के साथ ही दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित करती है। सीसीएस शोधकर्ताओं की टीम का नेतृत्व करने वाले मयुरेश प्रभुणे ने कहा कि 2014 के बाद से अब तक झील की बाहरी सीमा सिकुड़कर 100 मीटर तक कम हो गयी है।

उन्होंने कहा ' 'इसके किनारों से 100 मीटर की दूरी पर कई कुएं हैं। लोनार झील पर्यावरण की दृष्टि से एक संवदेनशील क्षेत्र है लेकिन इसके पास में ही कई खानपान की जगहें और कुएं हैं। ' ' उन्होंने बताया ' 'इन गतिविधियों का सामूहिक प्रभाव है कि इसके भंडारण में तेजी से कमी आई है।

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