इस गाँव में एचआईवी टेस्ट पास करने के बाद ही शादी

Basant KumarBasant Kumar   16 April 2017 1:15 PM GMT

इस गाँव में एचआईवी टेस्ट पास करने के बाद ही शादीहिजरे बाजार गाँव

लखनऊ। ग्रामीण भारत की अनोखी तस्वीर पेश कर रहा महाराष्ट्र का हिजरे बाजार गाँव। इस गाँव के 20 से अधिक किसान करोड़पति हैं। इतना ही नहीं किसी दूसरे गाँव में अगर लड़की की शादी होती है तो उस लड़के का ग्रामसभा एचआईवी टेस्ट कराती है।

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का हिवरे बाज़ार गाँव 1989 से पहले सूखे से त्रस्त, पानी को तरसता और पलायन के लिए जाना जाता था। इस गाँव के आधे से ज्यादा पुरुष और महिलाएं मुंबई और पुणे में रोजगार के लिए चले जाते थे, लेकिन आज यह गाँव दूसरे गाँव के लोगों को रोजगार दे रहा है।

इस गाँव में 20 से ज्यादा किसान करोड़पति हैं.

राज्यसभा में पिछले दिनों कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि 2016 में महाराष्ट्र में करीब 1000 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ के 2015 में छपी रिपोर्ट के अनुसार बीते 20 साल में महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा 63,318 तक पहुंच गया है। 2014 में देश भर में किसानों की कुल आत्महत्या में 45 फ़ीसदी से ज़्यादा मामले यहीं दर्ज़ किए गए।

गाँव में शिक्षा को लेकर काफी जागरूकता फैली है। आज हमारे गाँव में 45 लोग शिक्षक, 68 लड़के आज सेना में, 3 डॉक्टर है। कई छात्र इंजीनियर भी हैं। हमारा गाँव शौच मुक्त हो गया। हमारा गाँव आर्थिक रूप के साथ-साथ समाजिक स्तर पर भी बहुत जागरूक है। यहाँ सिर्फ एक मुस्लिम परिवार है जिसके लिए गाँव भर के लोगों ने मिलकर मस्जिद का निर्माण कराया है।
पोपटराव पवार, प्रधान

ग्रामसभा को गाँव की लड़कियों ने पत्र लिखकर मांग की थी कि उनकी शादी गाँव से बाहर होती है। लड़का शराब पीता हो या उसे कोई बीमारी हो इससे हमारी ज़िन्दगी खराब हो जाएगी, इसके लिए भी कुछ किया जाए। इस पर ग्रामसभा ने तय किया कि गाँव में किसी भी लड़की की शादी होगी तो पहले दुल्हे की एचआईवी टेस्ट होगा।

एचआईवी टेस्ट पॉजिटिव होने पर शादी नहीं होती है। इस गाँव में भी 1989 से पहले शराब बनती थी और लोग हमेशा शराब के नशे में रहते थे, लेकिन आज गाँव में गिने-चुने लोग ही शराब पीते हैं। गाँव में साल में दो बार ग्रामसभा की तरफ से हरेक व्यक्ति की पूरे शरीर की जाँच की जाती है और उन्हें कोई बीमारी हो तो इलाज कराया जाता है।

पोपटराव पवार, जिन्होंने बदली गाँव की तस्वीर

किसान विजय ने बताया, “पोपटराव पवार ने पहला काम जल संचय और बारिश के कारण मिट्टी के बहाव को रोकने का किया। पहाड़ों पर भी बारिश का पानी रोकने का काम हुआ। इसके बाद बावड़ी में साल भर पानी रहने लगा, लेकिन पानी कब और कैसे इस्तेमाल करना है यह ग्राम सभा तय करती है। 1989 में पोपटराव पवार निर्विरोध ग्रामसभा के प्रधान बने और उसके बाद अब तक निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने जाते हैं।”

पोपटराव पवार (57 वर्ष) बताते हैं कि ‘‘गाँव में शिक्षा को लेकर काफी जागरूकता फैली है। आज हमारे गाँव में 45 लोग शिक्षक, 68 लड़के आज सेना में, 3 डॉक्टर है। कई छात्र इंजीनियर भी हैं। हमारा गाँव शौच मुक्त हो गया। हमारा गाँव आर्थिक रूप के साथ-साथ समाजिक स्तर पर भी बहुत जागरूक है। यहाँ सिर्फ एक मुस्लिम परिवार है जिसके लिए गाँव भर के लोगों ने मिलकर मस्जिद का निर्माण कराया है। ’’

गाँव में सिर्फ एक मुस्लिम परिवार है जिसके लिए गाँव भर के लोगों ने मिलकर मस्जिद का निर्माण कराया है।
पोपटराव पवार, प्रधान

पोपटराव पवार आगे बताते हैं मैं शहर से गाँव में रुकने के बारे में सोचकर नहीं आया था, लेकिन 1989 में जब गाँव आया तो सरपंच का चुनाव लड़ा और जीत गया। उसके बाद गाँव में बहुत बदलाव हुआ। हमने जलग्राम योजना अभियान शुरू किया। देखते-देखते गाँव के लोग भी साथ आते गए और आज मेरा गाँव काफी बदल गया है। आज गाँव में खेती और डेयरी फॉर्म से किसान करोड़पति है। लोग खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं।

महिलाओं के लिए जन्नत है यह जगह

महिलाओं के लिए जन्नत है यह जगह

गाँव की रहने वाली सुनीता पवार बताती हैं कि यह गाँव महिलाओं के लिए बहुत खूबसूरत जगह है। गाँव में पुरुषों को महिलाओं के बराबर हक देते हुए कई अहम ज़िम्मेदारी दी गई है। गाँव में पानी नल योजना महिलाएं चलाती है। इस योजना के तहत घर- घर में कब और कितना पानी देना है, इसकी ज़िम्मेदारी महिलाओं पर होती है।

सुनीता पवार आगे बताती हैं कि ग्रामसभा ने तय किया है कि अगर किसी महिला के लगातार दो बेटी होने पर दूसरी बेटी की पढ़ाई-लिखाई और शादी की ज़िम्मेदारी ग्रामसभा की होगी।

हिवरे बाजार को आदर्श ग्राम को लेकर कई सम्मान मिल चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक बार अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस गाँव की तारीफ किया था।

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