कॉस्मेटिक के इस्तेमाल में बढ़ रही पुरुषों की भागीदारी

कॉस्मेटिक के इस्तेमाल में बढ़ रही पुरुषों की भागीदारीपुरुषों में भी सुंदरता को लेकर बढ़ रही जागरुकता।

लखनऊ। महिलाओं की तरह पुरुषों में भी सुंदर दिखने की चाहत तेजी से बढ़ रही है और यही कारण है कि कई तरह के ब्यूटी प्रोडेक्ट का इस्तेमाल शहरों के साथ गाँवों में भी तेजी से बढ़ा है। इसी के कारण स्किन केयर बाजार में पिछले पांच वर्षों में 42 फीसदी का इजाफा हुआ है।

लखनऊ के बक्शी तालाब के अटेसुआ गाँव के बब्लू बाजपेई (25 वर्ष) बताते हैं, “मैं डीओ, क्रीम और हेयरजेल का इस्तेमाल करता हूं। कॉलेज जाना होता है इसलिए लुक अच्छा होना भी जरूरी होता है।” इन उत्पादों की जानकारी कहां से मिली पूछने पर बब्लू बताते हैं, “टीवी पर तरह तरह की क्रीम के ऐड हीरो लोग करते हैं उसी से पता चलता है कि ये क्रीम सिर्फ हम लड़कों के लिए है।”

साल 2016 की एसोचैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सौंदर्य उत्पाद का बाजार 6.5 अरब डॉलर का है जो मध्य वर्ग की बढ़ती आय से साल 2025 तक 20 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय पुरुषों में सौंदर्य के प्रति बढ़ती जागरूकता से पिछले पांच सालों में सौंदर्य प्रसाधन का बाजार 42 फीसदी से अधिक बढ़ा है।

द बॉडी शॉप के प्रमुख (प्रशिक्षण) शिखी अग्रवाल का मानना है कि अब पुरुष बेसिक शेविंग क्रीम और शैम्पू से आगे बढ़कर हेयर केयर, दाढ़ी केयर, इत्र, एक्सेसरीज जैसे कई उत्पादों का खूब उपभोग कर रहे हैं।

उन्होंने बताया, "इधर कुछ सालों से पुरुषों ने यह स्वीकार करना शुरू दिया है कि बेसिक स्किन केयर और मेकअप का रोजाना इस्तेमाल उनके स्किन को स्वच्छ और तंदुरुस्त रखने के लिए बेहद जरूरी है। कार्यस्थल की प्रतिद्वंद्विता ने भी उन्हें दूसरे से अधिक आर्कषक और सुंदर दिखने के लिए प्रेरित किया है। "

पुरूषों में आए इस बदलाव का कारण बताते हुए लखनऊ की मनोवैज्ञानिक डॉ शाजिया सिद्दिकी बताती हैं, “सुदंर दिखने की चाहत की पीछे फैशन इंडस्ट्री का एक बड़ा रोल है। अब आदमी को भी ये लगता है कि सब कर रहे हैं तो वो पीछे क्यों रहे। दूसरा गोरेपन और फिट रहने की चिंता अब पुरूषों को भी परेशान करने लगी है। इसलिए वो भी इन उत्पादों का इस्तेमाल करने लगे हैं।”

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बॉलीवुड सेलेब्रिटी भी पुरुषों में सौंदर्य के प्रति जागरूकता लाने में बड़ा योगदान दे रहे हैं। शाहरुख खान और जॉन अब्राहम आलोचनाओं के बावजूद लगातार गोरेपन की क्रीम का विज्ञापन कर रहे हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री सोहन राम यादव बताते हैं, “सुंदरता का पैमाना हमारे यहां गोरेपन से तय कर दिया गया है जो कि बहुत गलत हैं अब इसमें विज्ञापनों का विशेष महत्व वो दिखाते हैं कि पुरुषों की त्वचा अलग है वो ये क्रीम अगर लगातार इतने दिन तक लगाएंगें तो गोरे और अच्छे दिखने लगेंगे। कॉलेज और ऑफिस जाने वाले युवा अब अपने सेहत और शरीर को लेकर जागरूक हो रहे हैं इसलिए वो जिम और ब्यूटी प्रोडेक्ट का तेजी से इस्तेमाल करने लगे हैं।”

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डॉ यादव आगे बताते हैं, “ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन उत्पादों की पहुंच आसानी से उपलब्ध है। हर छोटे मोट जनरल स्टोर पर आपको पुरुषों के लिए विशेष क्रीम, डियो आदि मिल जाएंगे। उपलब्धता आसान होने के लिए चलते उपयोगिता भी बढ़ रही है।”

गोण्डा जिले से लगभग 54 किमी दूर उत्तर दिशा में रमईपुर गाँव के प्रतीक सिंह (27 वर्ष) बताते हैं, “आज के समय में पर्सनालिटी बहुत जरूरी है फिट और अच्छा कौन नहीं दिखना चाहता ऐसे में तरह- तरह की क्रीम और प्रोडेक्ट लोग खरीदते हैं जो इसमें उनकी मदद करें।” अब वो समय भी गया जब लड़के सिर्फ बाल कटाने सैलून जाते थे अच्छा दिखने के लिए वो हेयर, फेस मसाज और फेशियल भी कराते हैं। प्रतीक ने आगे बताया।

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