वर्तमान भारतीय राजनीति की ताकतवर महिलाएं

वर्तमान भारतीय राजनीति की ताकतवर महिलाएंराजनीति में संसद से लेकर सड़कों तक रहा है महिलाओं का बोलबाला ।

लखनऊ। भारतीय राजनीति में काफी समय में आधी आबादी का दखल रहा है। 70 सालों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं ने अपनी सफलता का परचम लहराया है। वर्तमान दौर में भी भारतीय राजनीति में महिलाएं अग्रणी हैं। भारत में राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय स्तर के कुछ मुख्य राजनीतिक दल ऐसे हैं जिनका पूरा नेतृत्व और नियंत्रण महिलाओं के हाथ में रहा है और कुछ का अभी भी है। स्वतंत्रता से पहले ही देश में पहली बार 1917 में महिलाओं को राजनीति में भागीदारी की मांग उठी थी, जिसके बाद वर्ष 1930 में पहली बार महिलाओं को मताधिकार मिला। हमारे देश में महिलाएं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, लोकसभा में विपक्ष की नेता और लोकसभा अध्यक्ष के साथ-साथ अन्य कई महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों पर आसीन रही हैं। आइए जानते हैं वर्तमान भारत की प्रमुख महिला राजनेताओं के बारे में …

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सोनिया गांधी

गांधी परिवार की इस बहू ने जब 1997 में कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी संभाली तब कांग्रेस बिखरी हुई थी। 1999 के लोकसभा चुनाव में सोनिया ने कांग्रेस को एक करने का प्रयास किया। हालांकि इन चुनावों में कांग्रेस को सत्ता नहीं मिली और सोनिया गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर चुनी गईं, लेकिन आने वाले चुनावों के लिए सोनिया ने कांग्रेस को जोड़ा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए जनसमर्थन हासिल किया। 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की और केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में संप्रग की सरकार बनी। सोनिया गांधी 1997 से आज तक कांग्रेस अध्यक्ष हैं। यह कांग्रेस पार्टी के 125 सालों के इतिहास में पहला मौका है, जबकि कोई इतने लंबे समय तक अध्यक्ष पद पर बना रहा।

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सुषमा स्वराज

आपातकाल के बाद उन्होंने दो बार हरियाणा विधानसभा का चुनाव जीता और चौधरी देवी लाल की सरकार में से 1977 से 79 के बीच राज्य की श्रम मन्त्री रह कर 25 साल की उम्र में कैबिनेट मन्त्री बनने का रिकार्ड बनाया था। भाजपा में राष्ट्रीय मन्त्री बनने वाली पहली महिला सुषमा के नाम पर कई रिकार्ड दर्ज़ हैं। वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने वाली पहली महिला हैं, वे कैबिनेट मन्त्री बनने वाली भी भाजपा की पहली महिला हैं। वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमन्त्री थीं और भारत की संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार पाने वाली पहली महिला भी वे ही हैं। वर्ष 2014 में वे विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा की सांसद निर्वाचित हुई हैं और उन्हें भारत की पहली महिला विदेश मंत्री होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है।

निर्मला सीतारमन

वर्तमान में भारत की रक्षामंत्री हैं। सितंबर 2017 में रक्षा मंत्री बनने से पहले वे भारत की वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार) तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री रह चुकी हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबद्ध हैं तथा पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। निर्मला सीतारमन भारत की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री हैं, हालांकि इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए अतिरिक्त कार्यभार के रूप में यह मंत्रालय संभाला था। निर्मला सीतारमन 2003 से 2005 तक राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या रह चुकी हैं। वे सितंबर03-2017 तक भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता के साथ-साथ भारत की भारत की वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार) तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री रहीं हैं और सितंबर 03-2017 को नरेंद्र मोदी की सरकार में उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया।

मायावती

मायावती एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ हैं और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमन्त्री रह चुकी हैं। वे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें भारत की सबसे युवा महिला मुख्यमंत्री के साथ-साथ सबसे प्रथम दलित मुख्यमंत्री भी होने का श्रेय प्राप्त है। वे चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और उन्होंने सत्ता के साथ-साथ आनेवाली कठिनाइओं का सामना भी किया है। उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक स्कूल शिक्षिका के रूप में की थी लेकिन कांशी राम की विचारधारा और कर्मठता से प्रभावित होकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। उनका राजनैतिक इतिहास काफी सफल रहा और 2003 में उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव हारने के बावजूद उन्होने सन 2007 में फिर से सत्ता में वापसी की। अपने समर्थको में बहन जी के नाम से मशहूर मायावती 13 मई 2007 को चौथी बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमन्त्री बनीं और पूरे पाँच वर्ष शासन के पश्चात सन 2012 का चुनाव समाजवादी पार्टी से हार गयीं।

ममता बनर्जी

ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर 1970 में शुरू हुआ, जब वे कांग्रेस पार्टी की कार्यकर्ता बनीं। 1976 से 1980 तक वे महिला कांग्रेस की महासचिव रहीं। 1984 में ममता ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर लोकसभा सीट से हराया। उन्हें देश की सबसे युवा सांसद बनने का गौरव भी प्राप्त हुआ। उन्हें अखिल भारतीय युवा कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। मगर 1989 में कांग्रेस विरोधी लहर के कारण जादवपुर लोकसभा सीट पर ममता को मालिनी भट्टाचार्य के खिलाफ हार का स्वाद चखना पड़ा। पश्चात 1991 का चुनाव उन्होंने कलकत्ता दक्षिण संसदीय सीट से लड़ा और जीता भी। उन्होंने दक्षिणी कलकत्ता (कोलकाता) लोकसभा सीट से माकपा के बिप्लव दासगुप्ता को पराजित किया और वर्ष 1996, 1998, 1999, 2004 व 2009 में वह इसी सीट से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुईं। 1991 में कोलकाता से लोकसभा के लिए चुनी गईं। नरसिम्हा राव सरकार में मानव संसाधन विकास, युवा मामलों और महिला एवं बाल विकास विभाग में राज्यमंत्री बनीं। नरसिम्हां राव सरकार में खेल मंत्री बनाई गईं। इससे पहले वे केन्द्र में दो बार रेलमंत्री बन चुकी हैं। रेलमंत्री बनने वाली वे पहली महिला थीं। वे केन्द्र में कोयला, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री, युवा मामलों और खेल तथा महिला व बाल विकास की राज्यमंत्री भी रह चुकी हैं। वर्ष 2012 में टाइम पत्रिका ने उन्हें विश्व के 100 प्रभावी लोगों की सूची में स्थान दिया था।

सुमित्रा महाजन

सुमित्रा महाजन वर्तमान में लोकसभा स्पीकर हैं। उन्होंने 1989 के आम चुनाव में पहली बार लोकसभा चुनाव में भाग लिया और उन्होंने कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्राकाश चंद्र सेठी को हराया। इससे पहले इंदौर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से वो लगातार तीन विधान सभा चुनाव हार चुकी थीं। सुमित्रा महाजन 2002 से 2004 तक केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में शामिल थीं। उन्हें मानव संसाधन, संचार तथा पेट्रोलियम मंत्रालय का काम दिया गया था। वो प्रथम महिला हैं जो कभी लोकसभा चुनावों में पराजित नहीं हुई। वो आठ बार लोकसभा चुनाव जीतने वाली प्रथम महिला सांसद हैं।

वसुंधरा राजे

राजे को 1984 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया था। इसके बाद 1985-87 के बीच राजे भाजपा युवा मोर्चा राजस्थान की उपाध्यक्ष रहीं। 1987 में वसुंधरा राजे राजस्थान प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष बनीं। उनकी कार्यक्षमता, विनम्रता और पार्टी के प्रति वफादारी के चलते 1998-1999 में अटलबिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में राजे को विदेश राज्यमंत्री बनाया गया। वसुंधरा राजे को अक्टूबर 1999 में फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री के तौर पर स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। भैरोंसिंह शेखावत के उपराष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें राजस्थान में भाजपा राज्य इकाई का अध्यक्ष बनी। वर्तमान में वे राजस्थान की मुख्यमंत्री हैं।

महबूबा मुफ़्ती

भारतीय राजनीतिज्ञ तथा जम्मू और कश्मीर की तेरहवीं और एक महिला के रूप में राज्य की प्रथम मुख्यमंत्री हैं। महबूबा मुफ्ती से पूर्व वर्ष 1980 में सैयदा अनवरा तैमूर किसी भरतीय राज्य (असम) की पहली मुस्लिम मुख्यमंत्री बनी थीं। इस प्रकार वे देश के किसी राज्य की दूसरी मुस्लिम मुख्यमंत्री हैं। वे अनंतनाग से लोकसभा सांसद है। साथ ही जम्मू और कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की राजनेत्री और अध्यक्षा तथा जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की पुत्री हैं। पिता की बीमारी के बाद एम्स, दिल्ली में मृत्यु हो जाने के बाद वो जम्मू और कश्मीर की मुख्यमंत्री बनी हैं। महबूबा मुफ़्ती जम्मू और कश्मीर की पहली महिला राजनेत्री हैं।

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