करुणानिधि: जिन्होंने खुद लिखी अपने जीवन की स्क्रिप्ट

करुणानिधि कभी तमिल फिल्मों में स्क्रिप्ट लिखा करते थे। स्क्रिप्ट लिखते-लिखते फिल्मी अंदाज में ही उनके राजनीति करियर की शुरुआत होती है।

करुणानिधि: जिन्होंने खुद लिखी अपने जीवन की स्क्रिप्ट

दक्षिण की राजनीति का सूर्य आज अस्त हो गया है। तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे एम करुणानिधि का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उन्होंने मंगलवार शाम 6:10 बजे अंतिम सांस ली।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के 94 वर्षीय सुप्रीमो करुणानिधि को पिछले महीने अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरू में तो इलाज घर पर ही हो रहा था लेकिन स्थिति ज्यादा नाजुक होने के बाद उन्हें कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस समय कावेरी अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में कहा गया था कि बढ़ती उम्र के कारण ही करुणानिधि की तबीयत बिगड़ी है. उन्हें बार-बार बुखार आ रहा है।

कावेरी अस्पताल की ओर से मंगलवार को 6:40 बजे जारी किए गए प्रेस रिलीज के अनुसार, करुणानिधि ने 6:10 बजे अंतिम सांस ली।


करुणानिधि कभी तमिल फिल्मों में स्क्रिप्ट लिखा करते थे। स्क्रिप्ट लिखते-लिखते फिल्मी अंदाज में ही उनके राजनीति करियर की शुरुआत होती है। 1969 से लेकर 1977 का समय ऐसा था जब तमिलनाडु की राजनीति की चर्चा बिना करुणानिधि के संभव ही नहीं थी। करुणानिधि पिछले 62 वर्षों से कोई चुनाव नहीं हारे थे और वे थिरुवारुर सीट से एमएलए थे।

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मुथुवेल करुणानिधि का जन्म 3 जून, 1924 को तिरुवरूर जिले के तिरुकुवालाई गांव में हुआ था। जिस घर में उनका जन्म हुआ था उसे म्यूजियम में बदल दिया गया है जहां इंदिरा गांधी की तस्वीर सबसे ऊपर है। करुणानिधि का परिवार आर्थिक रूप से बहुत पिछड़ा था। लेकिन करुणानिधि मेधावी थे।

करुणानिधि पारंपरिक रूप से संगीत वाद्वयंत्र नादस्वरम बजाने वाले समुदाय से आते थे। लेकिन उन्होंने अपनी जाति की वजह से इस क्षेत्र में कदम नहीं रखा। जातिवाद से तंग आकर उन्होंने राजनीति की तरफ रुख कर लिया। पहले वे पेरियार के आत्मसम्मान आंदोलन से जुड़े और द्रविड़ लोगों के आर्यन ब्राह्मणवाद के खिलाफ आंदोलन में शामिल हो गए।


1937 में जब हिंदी को तमिलनाडु में अनिवार्य भाषा के तौर पर शामिल किया जा रहा था तब उन्होंने इसका जोरदार विरोध किया था। तब उनकी उम्र मात्र 14 साल थी। इस छोटी उम्र में ही उन्होंने राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी थी।

करुणानिधि ने तीन शादी की थीं। पहली पत्नी का नाम पद्मावती अम्माल था। जिनसे उन्हें एक बेटा हुआ जिसका नाम एमके मुथू था। लेकिन दुखद रूप से दोनों की ही जल्द मौत हो गई। इसके बाद उनकी शादी दयालु अम्मा से हुई. जिनसे इस कपल को चार बच्चे हुए, एमके अलागिरि, एमके स्टालिन, एमके तमिलारसु और सेल्वी. उनकी तीसरी पत्नी का नाम राजाथिअम्माल हैं, जिनसे उन्हें एक बेटी (कनिमोझी) हैं।

करुणानिधि ने द्रविड़ आंदोलन के लिए एक छात्र संगठन बनाया था लेकिन वह डीएमके की ही राजनीति में सक्रिय रहे। साल 1957 में वह पहली बार कुलीथलाई विधानसभा से सदन पहुंचे। उस वक्त उनकी उम्र 33 साल थी। साल 1967 में वह तमिलनाडु सरकार में मंत्री बनाए गए। लेकिन साल 1969 में डीएमके अध्यक्ष अन्नादुरई की मृत्यु हुई तो वह राज्य के सीएम बने। साल 1969 से 2011 के बीच करुणानिधि 5 बार मुख्यमंत्री बने। वह 10 बार डीएमके के अध्यक्ष बने। इतना ही नहीं 1957 से लेकर 2016 तक वह 13 बार विधायक बने। वह एक ऐसे शख्स हैं जिन्होंने अपने राजनैतिक करियर में एक भी चुनाव नहीं हारे।

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