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देश से वर्ष 2025 तक टीबी का होगा सफाया, प्रधानमंत्री ने कमर कसी

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   13 March 2018 4:38 PM GMT

देश से वर्ष 2025 तक टीबी का होगा सफाया, प्रधानमंत्री ने कमर कसीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत से वर्ष 2025 तक तपेदिक रोग (टीबी) के सफाए के लिए आज एक अभियान की शुरुआत की। विश्वभर से टीबी के खात्मे के लिए तय की गई समय-सीमा वर्ष 2030 है। इस प्रकार भारत पांच वर्ष पहले ही भारत से टीबी खात्म कर लेगा।

दिल्ली में टीबी खात्मा शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू किया। इसमें टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना के तहत गतिविधियां होंगी ताकि इस रोग के वर्ष 2025 तक सफाए के लिए मिशन के रूप में आगे बढ़ा जाए।

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मोदी ने कहा, विश्वभर में टीबी के उन्मूलन के लिए वर्ष 2030 का लक्ष्य तय किया गया है। मैं यह घोषणा करना चाहता हूं कि हमने इस रोग के भारत से सफाए के लिए पांच वर्ष पहले, वर्ष 2025 की समयसीमा तय की है। उन्होंने स्थिति का विश्लेषण करने और तौर तरीके बदलने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि टीबी पर रोक लगाने के प्रयासों के अब तक सफल परिणाम सामने नहीं आए हैं और टीबी के देश से सफाए में राज्य सरकारों की अहम भूमिका है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट की मानें तो टीबी के कारण प्रत्येक तीन मिनट पर दो लोगों की मौत होती है। टीबी के बारे में जागरूक करने के लिए हर वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि इस दिशा में उन टीबी फिजिशियन और कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है जिनके संपर्क में मरीज सबसे पहले आता है। टीबी के भारत से सफाए में राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने बताया कि मैंने सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख इस मिशन से जुड़ने को कहा है। इससे सहयोगात्मक संघवाद की भावना को बल मिलेगा।

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टीबी मुक्त भारत अभियान टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (एनएसपी) की गतिविधियों को मिशन मोड में आगे बढ़ाएगा। अगले तीन वर्षों में तपेदिक रोग के उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना को 12 हजार करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक मरीज को गुणवत्ता संपन्न रोग निदान, उपचार और समर्थन मिल सके।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में संक्रामक रोगों में सबसे ज्यादा लोग टीबी से प्रभावित हैं और इससे प्रभावित होने वाले सर्वाधिक लोग गरीब हैं। रोग के सफाए की दिशा में उठाया गया हर एक कदम का सीधा संबंध उन लोगों के जीवन से है। इस सम्मेलन में शरीक होने के लिए विश्वभर के नेता राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में जुटे हैं। इस सम्मेलन की मेजबानी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय डब्ल्यूएचओ और स्टॉप टीबी पार्टनरशिप के साथ मिलकर कर रहा है।

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भारत में वर्ष 2015 में टीबी (तपेदिक) से मरनेवालों की संख्या 4,80,000 थी, जो वर्ष 2014 में इस रोग से हुई 2,20,000 मौतों के दोगुनी से भी ज्यादा थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में यह सबसे घातक और संक्रामक रोग है। वर्ष 2015 में देश में टीबी के 28 लाख नए मामले सामने आए, जबकि 2014 में नए मामलों की संख्या 22 लाख थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा टीबी के मामले भारत में पाए जाते हैं। वर्ष 2016 में 17 लाख लोगों की मौत की वजह टीबी थी।

यह सम्मेलन सितंबर 2018 में टीबी विषय पर होने वाली संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय बैठक के लिए मंच तैयार कर देगा। वर्ष 1997 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के अंतर्गत दो करोड़ से अधिक टीबी रोगियों का इलाज किया गया है।

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बजट 2018-19 में टीबी रोगियों के पोषण के लिए सरकार ने सहायता स्वरूप 600 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की है। देश में जिन भी टीबी रोगियों का इलाज चल रहा है, उन्हें 500 रुपए प्रति माह दिए जाएंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व को वर्ष 2035 और भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य रखा है।

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