ग्रामीण इलाकों में दंत चिकित्सा व्यवसाय को बढ़ावा दे रही सरकार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने दंत स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में जागरुकता बढ़ाने पर जोर दिया और इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का जिक्र किया है

ग्रामीण इलाकों में  दंत चिकित्सा व्यवसाय को बढ़ावा दे रही सरकारप्रतीकात्मक तस्वीर साभार: इंटरनेट

नई दिल्ली। राज्यसभा ने सोमवार को दंत चिकित्सक संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें दंत चिकित्सा कानून 1948 में संशोधन करके भारतीय दंत चिकित्सा परिषद को और प्रभावी बनाने का प्रावधान किया गया है। उच्च सदन में विधेयक पर हुयी संक्षिप्त चर्चा में विभिन्न दलों के सदस्यों ने देश में दंत चिकित्सकों को बेहतर बनाने की जरूरत पर बल दिया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने कहा, " जब भारतीय दंत चिकित्सा परिषद बनी तब दंत चिकित्सकों के पंजीकरण के लिये एक रजिस्ट्री भी बनी। इसमें दो खंड थे जिसमें खंड क में योग्यता प्राप्त डाक्टर होते थे और खंड ख में ऐसे डाक्टर होते थे जो विभाजन के बाद भारत आए थे और जिनके पास डिग्री नहीं थी लेकिन वे प्रैक्टिस करते थे। 1972 के बाद से खंड ख में किसी दंत चिकित्सक का पंजीकरण नहीं हुआ है।"

ये भी पढ़ें:दस मिनट के अंदर सेंसर बताएगा किस वजह से आपको हुआ हार्ट अटैक

मंत्री ने दंत स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में जागरुकता बढ़ाने पर जोर दिया और इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का जिक्र किया। उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

हर्षवर्धन ने कहा कि उनका मंत्रालय राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य नीति के संबंध में एक प्रारूप तैयार कर रहा है। विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार दंत चिकित्सा अधिनियम 1948 की धारा तीन के तहत भारत में दंत चिकित्सा शिक्षा और दंत चिकित्सा व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिये भारतीय दंत चिकित्सा परिषद का प्रावधान किया गया है।

ये भी पढ़ें:ऐसा क्या है सहजन में जो इसे बनाता है ख़ास

प्रतीकात्मक तस्वीर साभार: इंटरनेट

विधेयक में यह उपबंध है कि परिषद, भारतीय दंत चिकित्सा रजिस्टर के रूप में ज्ञात दंत चिकित्सकों का रजिस्टर बनायेगी जिसमें दंत चिकित्सकों की सभी राज्य रजिस्टर की प्रविष्टियां होंगी। दंत चिकित्सा के व्यवसाय को भाग क और भाग ख में रखने का उल्लेख है। इसमें कहा गया है कि वर्ष 1972 के बाद कोई व्यक्ति भाग ख में पंजीकृत नहीं किया गया है। भाग क में पंजीकृत 2.7 लाख पंजीकृत डाक्टरों की तुलना में भाग ख में लगभग 950 दंत चिकित्सक हैं।

विधेयक पर हुयी चर्चा में भाग लेते हुए अन्नाद्रमुक के नवनीत कृष्णन ने दंत चिकित्सकों को नीट परीक्षा से छूट दिए जाने की मांग की। वहीं तृणमूल कांग्रेस के शांतनु सेन ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी दंत चिकित्सकों की नियुक्ति किए जाने की मांग की।


जद (यू) के रामनाथ ठाकुर ने भी विधेयक का समर्थन किया। बीजद के प्रसन्ना आचार्य ने कहा कि कई कानून पुराने हो गए हैं, उन्हें समाप्त कर दिया जाना चाहिए। माकपा सदस्य के सोमप्रकाश ने कालेजों में पर्याप्त सुविधाओं की जरूरत पर बल दिया जबकि टीआरएस के केशव राव और और वाईएसआर कांग्रेस विजय साई रेड्डी ने परिषद में राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने पर बल दिया।

ये भी पढ़ें: उत्तराखंड में लचर स्वास्थ्य सेवाएं, न डॉक्टर हैं न दवाएं


More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top