बढ़ता तापमान गेहूं किसानों के लिए बन सकता है नया सिरदर्द 

बढ़ता तापमान गेहूं किसानों के लिए बन सकता है नया सिरदर्द विपणन वर्ष 2018-19 में  सरकार ने गेहूं खरीद का अनुमानित लक्ष्य रखा 3.2 करोड़ टन।

वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम में एक डिग्री तापमान में बढ़ने पर एक प्रति हेक्टेयर एक क्विंटल तक गेहूं की पैदावार घट जाती है।

उत्तर भारत में तेज़ी से बढ़ रहा तापमान, गेहूं किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार पांच से छह मार्च तक उत्तर पश्चिम भारत के साथ-साथ देश के दूसरे इलाकों में तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा। तेज़ी से बढ़ती गर्मी गेहूं की बालियों की बढ़वार पर बुरा असर डाल सकती है, इससे किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।

उत्तर- पूर्वी भारत में बढ़ती गर्मी से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान होने की बात कहते हुए डॉ. बीएस त्यागी, प्रमुख वैज्ञानिक भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल (हरियाणा) ने बताया, '' उत्तर पूर्वी भारत में इस वर्ष ठंड जल्द खत्म हो जाने और बढ़ती गर्मी के कारण गेहूं का दाना छोटा हो सकता है। इससे गेहूं की पैदावार घट सकती है।''

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मौसम विभाग की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक 23 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में दिन और रात दोनों का ही तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस ऊपर रिकॉर्ड किया जाएगा। बढ़ते तापमान के कारण दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में ठंड का असर कम पड़ जाएगा।

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इफेक्ट अॉफ टर्मीनल हीट के कारण घट सकती है गेहूं की पैदावार।

'' जिन किसानों ने 20 दिसंबर से पहले गेहूं की बुवाई कर दी है, उन्हें बढ़ते तापमान से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। गर्मी बढ़ने से गेहूं का दाना छोटा रह जाने की समस्या सबसे अधिक उन किसानों को होगी, जिन्होंने जनवरी में गेहूं की बुवाई है।''

खाद्य मंत्रालय भारत सरकार के मुताबिक विपणन वर्ष 2018-19 में अनुमानित गेहूं का खरीद का लक्ष्य 3.2 करोड़ टन निर्धारित किया है। यह खरीद का लक्ष्य, विपणन वर्ष 2017-18 के की तीन करोड़ 8.2 लाख टन की वास्तविक खरीद के मुकाबले, कहीं अधिक है। ऐसे में बढ़ती गर्मी सरकार के गेहूं खरीद का लक्ष्य हासिल करने में बड़ी बाधा बन सकती है।

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तेज़ी से बढ़ते तापमान के कारण इस वर्ष यूपी में गेहूं की पैदावार में कमी आने की आशंका बनारस हिंदु विश्व विद्यालय के कृषि विज्ञान विभाग के कृषि वैज्ञानिकों ने भी जताई है। बीएचयू के प्रमुख कृषि विशेषज्ञ डॉ. साकेत कुशवाहा बताते हैं, '' तापमान बढ़ने से गेहूं में इफेक्ट अॉफ टर्मीनल हीट की परेशानी बढ़ जाती है। इससे मौसम में एक डिग्री तापमान में बढ़त होने के कारण एक कुंतल प्रति हेक्टेयर गेहूं की पैदावार घट जाती है। इफेक्ट अॉफ टर्मीनल हीट के कारण गेहूं की पैदावार में भारी गिरावट हो सकती है। ''

बीएचयू के कृषि विज्ञान विभाग के मुताबिक इस बार यूपी में फरवरी के महीने की शुरूआत से ही ठंड कम पड़ गई है। ठंड में कमी आने के कारण गेहूं की बालियां 90 दिनों में पकने की जगह 70 दिनों में ही पक जाएंगी, इससे गेहूं की फलियों में दाना अच्छा नहीं होगा।

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