बाकी के 8657 करोड़ जमा करने के लिए सहारा ने मांगा दो माह का वक्त, सेबी ने किया विरोध

बाकी के 8657 करोड़ जमा करने के लिए सहारा ने मांगा दो माह का वक्त, सेबी ने किया विरोधसहारा प्रमुख पर उच्च न्यायालय सख्त।

नई दिल्ली। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सहारा प्रमुख सुब्रत राय की ओर से पेश की गई दलील में बताया कि 24000 करोड़ राशि में करीब 16 हजार करोड़ रुपये जमा करा चुके है। बाकी के 8657 करोड़ जमा करने के लिए 2 महीने का समय दिया जाए। सेबी ने इसका विरोध किया। चीफ जस्टिस ने कहा कि आपकी मांग पर हम आदेश जारी करेंगे।

शाम को सुप्रीम कोर्ट का आदेश जारी करते हुए कहा कि अगर सहारा प्रमुख सोचते हैं कि वो कानून के साथ खेल सकते हैं तो वो गलत इंप्रेशन में है। कोर्ट कोई प्रयोगशाला नहीं, जहाँ बच्चे खेलने आते है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेबी सहारा मामले में अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि एंबी वैली की नीलामी की प्रक्रिया जारी रहेगी। कोर्ट ने कहा कि सहारा प्रमुख को नवंबर के दो महीने पोस्ट डेटेड चेक के लिए वक्त दिया जाना कानून का मखौल उड़ाना होगा।

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कोर्ट ने कहा, सहारा प्रमुख कोर्ट को एक प्रयोगशाला की तरह ट्रीट कर रहे हैं। संभवत वो सोच रहे है कि वेंटिलेटर पर जितना समय चाहे रह सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें अच्छी तरह से की सलाह दी गई होगी कि इंसान अगर वेंटिलेटर पर जाता है तो लंबे समय तक बना नहीं रह पाता। एक समय ऐसा आता है कि वो अचैतन्य हो जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे में हम आदेश देते हैं कि एंबी वैली की नीलामी प्रक्रिया जारी रहेगी। एंबी वैली की नीलामी होने के दौरान कोई पक्ष मामले की सुनवाई की मांग कर सकता है।

10 और 11 अक्टूबर को एंबी वैली की नीलामी होगी। सहारा समूह को किसी तरह की रियायत देने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऑफिशियल लिक्विीडेटर द्वारा एंबी वैली की नीलामी प्रक्रिया पर बदलाव करने से इंकार किया है।

एक नजर सहारा और सेबी विवाद पर

  • साल 2009 में सहारा समूह की कंपनी सहारा प्राइम सिटी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानि सेबी के समक्ष आईपीओ यानि प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव रखा। सरल शब्दों में सहारा समूह निवेशकों के लिए शेयर बाज़ार में उतरना चाह रहा था।
  • साल 2009 में सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाऊसिंग इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने भी कंपनी रजिस्ट्रार के पास आईपीओ (रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस) की अर्ज़ी दाखिल की। सेबी के पास प्रोफेशनल ग्रुप फॉर इन्वेस्टर प्रोटेक्शन की तरफ से सहारा की दो कंपनियों के खिलाफ कथित तौर पर गैर-क़ानूनी तरीके से निवेशकों के साथ आर्थिक लेन-देन की शिकायतें पहुंची।
  • साल 2010 में नेशनल हाउसिंग बैंक के ज़रिए एक व्यक्ति रौशन लाल ने भी सेबी के पास सहारा समूह के ख़िलाफ़ ऐसी ही शिकायत दर्ज की। इसके बाद सेबी ने इन शिकायतों पर पहले सहारा समूह के इन्वेस्टमेंट बैंकर इनम सेक्युरिटीज़ और फिर बाद में सीधे सहारा से जवाब माँगा।
  • बाद की जांच में ये बात सामने आई कि सहारा समूह ने 50 से अधिक निवेशकों से धन जुटाने के लिए जो तरीका अपनाया था उसके लिए सेबी की आज्ञा लेनी अनिवार्य थी जिसका पालन नहीं किया गया। जबकि सहारा के मामले में करोड़ों निवेशकों से धन जुटाया गया था। ये मामला जनवरी माह का है। नवंबर में सेबी ने सहारा की दो कंपनियों के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि निवेशकों से जुटाया गया धन वापस किया जाए।
  • जून 2011 में अपने पहले सुनाए गए फैसले पर सेबी ने पक्की मुहर लगाई जबकि सहारा ग्रुप ने सेक्यूरिटीस ऐपिलेट ट्राईब्यूनल में जाकर इस फैसले का विरोध किया।
  • अक्टूबर 2011 में सेक्यूरिटीस ऐपिलेट ट्राईब्यूनल ने सेबी के आदेश को सही ठहराते हुए सहारा की दोनों कंपनियों से तीन करोड़ निवेशकों के 25,781 करोड़ रुपए लौटाने को कहा।
  • अगस्त 2012 में सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। न्यायालय ने भी सहारा से निवेशकों के 24,000 करोड़ रुपए सेबी में जमा करवाने का आदेश दिया।
  • दिसंबर 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह से इस राशि को तीन किस्तों में जमा करवाने के लिए कहा जिसमे से 5,120 करोड़ रुपए की राशि तुरंत जमा करानी थी।
  • फरवरी 2013 में जब सहारा दो बची हुई किस्तें जमा कराने में असफल रहा तब सेबी ने सहारा समूह के बैंक खाते फ्रीज़ करने और जायदाद को ज़ब्त करने के आदेश जारी किए। अप्रैल 2013 में सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को सेबी ने तलब किया और वे उसके समक्ष हाज़िर हुए।
  • जुलाई 2013 में सेबी ने सहारा ग्रुप के ख़िलाफ़ आदेश पालन न करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। सुब्रत रॉय को देश छोड़कर जाने की इजाज़त नहीं।
  • 20 फरवरी, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय को पेश होने का फरमान जारी किया।
  • 26 फरवरी 2014 को जब सुब्रत रॉय अदालत में हाज़िर नहीं हुए तब सुप्रीम कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ गैर-ज़मानती वारंट जारी किया। सहारा प्रमुख ने अपनी माँ की बीमारी को मौजूद न होने की वजह बताया।
  • 28 फरवरी 2014 को सुब्रत रॉय को लखनऊ में गिरफ़्तार करके 4 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेजा गया।
  • मार्च 2014 को सुब्रत रॉय को ज़मानत पर रिहा करने से अदालत का इनकार।
  • सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद सुब्रत राय को 6 मई, 2016 को अपनी मां की अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए चार हफ्ते का परोल दिया था। तब से अब तक कई बार उनके परोल को बढ़ाया गया है।

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