जान लेते सीवर : अब आंध्र प्रदेश में गई 7 सफाई मजदूरों  की जान

जान लेते सीवर : अब आंध्र प्रदेश में गई 7 सफाई मजदूरों  की जानआंध्र प्रदेश में हुआ दुखद हादसा। 

अमरावती (आंध्र प्रदेश)। सीवर ने भारत में फिर मजदूरों की जान ली है। आंध्र प्रदेश में सीवर की सफाई के दौरान कम से कम 7 मजदूरों की दम घुटने की मौमत हो गई।

ये दर्दनाक घटना शुक्रवार की सुबह राज्य के पल्लानेरु मंडल में हुई, जब एक मजदूर सफाई करने उतरा। जहरीली गैस से बेहोश होने पर उसे बचाने के लिए 7 अऩ्य मजूदर और कर्मचारी भी सीवर मे उतरे, लेकिन वो भी बेहोश हो गए। घटनास्थल पर मौजूद लोगों और कर्मचारियों ने उन्हें बाहर निकाला। जिसमें 4 लोगों की मौके पर जबकि 3 ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं राज्य सरकार ने दुख जताया है। लेकिन आंध्र प्रदेश भारत का कोई पहला राज्य नहीं है, देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में अक्सर इन मौतों की ख़बर आती है।

दिल्ली में पिछले वर्ष सीवर की मजदूरों से सफाई पर बैन लगा दिया था। ये फैसला अगस्त 2017 में लिया गया था, क्योंकि उस दौरान कुछ ही दिनों में 10 मजदूरों की मौत हुई थी। नियमत अगर कोई मजदूर सीवर में उतरता है तो उसके लिए विशेष पोषाक होनी चाहिए, जिसमें सूट, मास्क और गैंस सिलेंडर आदि शामिल हैं, लेकिन ऐसा होता कहीं नहीं है। देशभर में हर साल हजारों की संख्या सफाई कर्मचारियों की उपकरणों की कमी के कारण मौत हो जाती है।

सीवर की सफाई करता कर्मचारी। फाइल फोटो

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उत्तर प्रदेश की ऐशबाग की सुपर कॉलोनी में रहने वाले ज्यादातर परिवार सफाई का काम करते हैं। पिछले दिनों एक रिपोर्ट के सिलसिल में गांव कनेक्शन के रिपोर्टर से मिले जितेंद्र कुमार बताते हैं, पिछले कई सालों में हमारे कई साथियों की जान जा चुकी है। बावजूद इसके हमें बिना टोपी और जूते के नाले में उतारा जाता है।’ हालांकि इसी दौरान जलकल विभाग के तत्कालीन जीएम ने गांव कनेक्शन को अपना अलग ही तर्क दिया। “ सुरक्षा उपकरण कई कर्मचारियों के पास है। हमने हिदायत दे रखी है कि बिना सुरक्षा कवच सीवर में न उतरें लेकिन उनकी ऐसे ही जाने की आदत पड़ी है।

द हिन्दू अख़बार में छपे पत्रकार एस आनंद के लेख “डेथ्स इन द ड्रेंस” के अनुसार देश में हर रोज दो से 3 मजदूबों की मौत मेनहोल की सफाई के दौरान होती है। सफाई आंदोलन से जुड़े राज वाल्मिकी बताते हैं, देश में मनुअल स्कैंवेजर एंड रिहैबिलिटेशन एक्ट 2013 के अनुसार किसी भी कर्मचारी से किसी में रुप में मैला साफ नहीं कराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दिया है कि किसी भी हालत में किसी भी व्यक्ति को सीवर में न भेजा जाए लेकिन ऐसा होता नहीं है।

मैला उठाने वाले कर्मचारियों के नियोजन और उनके पुनर्वास अधिनियम 2013 के अनुच्छेद 6 के अनुसार सीवर की सफाई के लिए किसी भी प्रकार का ठेका अमान्य है। अगर किसी व्यक्ति को मजबूरी में सीवर या नाले में उतारा जाए तो उसे जीवन रक्षक उपकरण दिए जाएं लेकिन ऐसा होता नहीं है।

जलकल विभाग, लखनऊ के जनरल मैनेजर एस के वर्मा बताते हैं, "सुरक्षा के इंतजार सभी कर्मचारियों को दिए गए है। हमारे यहां कर्मचारियों को आदत पड़ गयी बिना सुरक्षा इंतजार के जाने की तो वो सुरक्षायंत्र लगाते नहीं है। हम उनको बार-बार हिदायत देते है कि बिना सुरक्षा कवच के वो सीवर में ना उतरे। इससे उनकी जिंदगी को ही खतरा होगा।"

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