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ऑनलाइन पढ़ाई के दिख रहे साइड इफ़ेक्ट, बच्चों में बढ़ रहीं सिरदर्द और आँखों में जलन की शिकायतें

कोरोना महामारी की वजह से अभी भी स्कूल बंद हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लास ही सहारा है। मगर लम्बे समय से जारी बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई से उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

Mohit SainiMohit Saini   31 July 2020 8:12 AM GMT

मोहित सैनी / दीपक राठी

शामली (उत्तर प्रदेश)। "ऑनलाइन पढ़ाई में कांसेप्ट क्लियर नहीं हो पाता है, समझ नहीं आता, ऊपर से लगातार मोबाइल देखते रहो तो सिरदर्द होने लगता है, आँखों में भी दर्द होता है, फिर इंटरनेट की भी बहुत प्रॉब्लम है, इंटरनेट की तो सबसे ज्यादा," इस बार बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहीं छात्रा अनुष्का सिंह (14 वर्ष) कहती हैं।

अनुष्का जैसा हाल बोर्ड की तैयारी कर रहे आदित्य शर्मा का भी है। आदित्य का कहना है कि ऑनलाइन क्लासेस से उतना फायदा नहीं है, जितना स्कूल में जाकर होता था। ऐसे में लगातार मोबाइल देखने से बच्चों में सिरदर्द और आँखों में जलन की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

डॉक्टर्स भी मानते हैं कि ऑनलाइन क्लासेज की वजह से बच्चों में अब साइड इफेक्ट्स सामने आ रहे हैं। आँखों की समस्या के साथ सिरदर्द और मानसिक रूप से तनाव की भी समस्या बच्चों को घेर रही हैं। वहीँ बच्चों पर ऑनलाइन क्लास का दबाव ज्यादा है।

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में रहने वाले 12वीं क्लास के छात्र आदित्य शर्मा बताते हैं, "फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स मतलब पांच-छह क्लास ऑनलाइन चलती हैं, कभी नेटवर्क की प्रॉब्लम है, कभी वीडियो क्लियर नहीं आता, कई माता-पिता तो ऐसे हैं जो मोबाइल भी नहीं जुटा पाते हैं, ऊपर से सही से पढ़ाई भी नहीं होती, बस फॉर्मेलिटी है कि पढ़ाई हो रही है। हमें बोर्ड की परीक्षा देनी है इस बार, अभी ऑनलाइन क्लास से समझते तो हैं, मगर उतना क्लियर नहीं हो पाता है।"

कोरोना महामारी की वजह से अभी भी स्कूल पूरी तरह से बंद हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लास ही सहारा है। मगर लम्बे समय से जारी बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई से उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। इसके अलावा बीमारियों को भी दावत दे रहे हैं।

बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई, उन पर बढ़ रहे दबाव और सबसे बड़ा उनके हाथों में मोबाइल देने से माता-पिता भी परेशान हैं। फोटो : गाँव कनेक्शन

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण राय 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "अगर आप लगातार स्क्रीन टकटकी लगाकर देखते रहते हैं तो आँखों में नमी कम हो जाती है, इसका दो प्रभाव पड़ते हैं, एक तो आपको धुंधला दिखाई देगा और दूसरा आँखों में जलन होने लगती है।"

डॉ. राय कहते हैं, "अगर आखों पर दबाव बढ़ता था तो सिर्फ आँखों में ही तनाव नहीं बढ़ता, बल्कि सिर की मासपेशियों में भी दबाव पड़ता है जिसकी वजह से सिर में भी लगातार भारीपन से बना रहता है, यह सिर्फ आँखों पर असर है, दूसरा असर यह है कि जैसे बच्चे जब स्कूल जाते हैं तो चार-पांच घंटे बाद इंटरवल होता है जिसमें वो लंच करते हैं, खेलते-कूदते हैं, मगर ऑनलाइन पढ़ाई से खेलना बंद हो गया है, इसकी वजह से बच्चों में तनाव बढ़ता है।"

बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई, उन पर बढ़ रहे दबाव और सबसे बड़ा उनके हाथों में मोबाइल देने से माता-पिता भी परेशान हैं।

ऑनलाइन क्लासेज के बावजूद बच्चों को समझने में आ रही मुश्किलें। फोटो : गाँव कनेक्शन

ऑनलाइन कक्षा में पढ़ने वाली एक बच्ची की माँ भावना शर्मा 'गाँव कनेक्शन' से बताती हैं, "मोबाइल फोन के ज्यादा उपयोग से बच्चों की आँखें कमजोर होने लगी हैं और हमें ना चाहते हुए भी अपने बच्चों को स्मार्ट फोन देना पड़ता है। मिडिल क्लास के माता-पिता सक्षम भी नहीं है, वहीं हम हमेशा बच्चे के पास भी बैठे नहीं रह सकते, डर भी रहता है कि बच्चे मोबाइल में सोशल साइट्स में कुछ गलत चीज न देखें।"

दूसरी ओर एक ओर छात्र के पिता दीपक शर्मा कहते हैं, "स्कूल वाले कोई लिंक भेजते हैं और बच्चों को लाइक या शेयर करने के लिए कहते हैं, उससे बच्चे के सामने क्या लिंक खुलता है और वे क्या देखते हैं और उसे देखने से बच्चे की क्या मनोवृति बनेगी ये सोचकर हम खुद परेशान रहते हैं कि इस तरह से बच्चे का करियर कैसे बनेगा।"

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