किसान का दर्द : यूपी में पैदा हुए आलू का एक फीसदी भी नहीं खरीद पाई सरकार

किसान का दर्द :  यूपी में पैदा हुए आलू का एक फीसदी भी नहीं खरीद पाई सरकारआलू उत्पादन व निर्यात और खपत कम होने से किसानों की हालत खराब है।

उत्तर प्रदेश में इस साल रिकॉर्ड 155 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकार की तरफ से मात्र 12 हजार 937 कुंतल आलू की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई। जो कि एक फीसदी से भी कम है।

लखनऊ। प्रदेश में बढ़ते आलू उत्पादन व निर्यात और खपत कम होने से किसानों की हालत खराब है। सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए आलू खरीदने की बात कही थी, लेकिन अफसरों की हीलाहवाली से लक्ष्य का एक प्रतिशत भी खरीद नहीं हो पाई। किसानों को मंडियों में औने-पौने दाम पर आलू को बेचना पड़ा।

उत्तर प्रदेश में इस साल रिकॉर्ड 155 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकार की तरफ से मात्र 12 हजार 937 कुंतल आलू की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई। 23 रुपए किलो आलू का बीज खरीदकर बुवाई करने वाले किसानों को बचा आलू 2-3 रुपए प्रति किलो के रेट में बेचना पड़ा।

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गोरखपुर जिले के खजनी ब्लॉक के डांगीपार गाँव के योगेन्द्र यादव ने 20 बीघे में आलू की खेती की थी, लेकिन स्थिति यह है कि वह कर्ज में डूब गए। योगेन्द्र यादव ने कहा, ‘’एक बीघे आलू की खेती करने में 10 हजार रुपए लागत आई, लेकिन मंडी में एक बीघे में पैदा हुए आलू की कीमत मात्र पांच से छह हजार रुपए मिली। इतना घाटा सहकर अब आगे खेती करने की हिम्मत नहीं है,’’।

प्रदेश में वर्ष 2017 में 6 लाख 25 हजार हेक्टेयर में आलू उत्पादन हुआ और आलू के अनुमानित लक्ष्य 147 लाख मीट्रिक टन रखा गया था, लेकिन अनुमान से ज्यादा 155 लाख टन उत्पादन हुआ। वहीं यूपी में साल 2015-16 में 6 लाख 12 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी और उत्पादन 141.29 लाख मीट्रिक टन हुआ था।

कोल्ड स्टोरेज तो हैं, लेकिन उनमें आलू रखने की जगह नहीं है।

किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक लाख टन आलू खरीदने का फैसला किया था। सरकार ने चार एजेंसियों उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक सहकारी विपणन संघ, यूपी एग्रो, पीसीएफ और उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड को किसानों से 487 रुपए प्रति कुंतल की दर से आलू खरीदने का आदेश दे दिया था, लेकिन यह एजेंसियां कुल उत्पादन का एक प्रतिशत भी नहीं खरीद पाईं।

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उत्तर प्रदेश उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने आलू की पैदावार बढ़ाने और किसानों को उचित मूल्य मिलने के लिए बने आलू मिशन के उप निदेशक धर्मेन्द पांडेय ने कहा, ‘’सरकार की एजेंसियों की तरफ से किसानों से पर्याप्त मात्रा में आलू खरीदने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सरकारी क्रय केन्द्रों में किसानों ने आलू बेचने में उत्साह नहीं दिखाया।’’

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लेकिन किसान आलू मिशन के उप निदेशक की बात से इत्तेफाक नहीं रखते। आगरा जिले के चौगान गाँव के किसान ओमवीर कहते हैं, ‘’सरकार ने आलू का जो न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया था, उस रेट में आलू बेचने पर लागत ही हमारी नहीं निकल रही थी।’’ आलू की बुवाई, खुदाई और मजदूरी की लागत ही 500 रुपए प्रति कुतंल से ज्यादा है।

किसानों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वह अपना आलू कोल्ड स्टोरेज में रखना भी चाहते हैं, लेकिन कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की जो क्षमता है वह पहले ही फुल हो चुकी है। कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने का किराया प्रति कुंतल 220 रुपए है, लेकिन किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर कोल्ड स्टोरेज वाले 300 से लेकर 350 रुपए ऐंठते हैं। प्रदेश में 2100 से ज्यादा कोल्ड स्टोरेज हैं जिसमें 130 लाख टन आलू भंडारण की क्षमता है। ऐसे में चाहकर भी किसान अपना आलू यहां पर भंडारण नहीं कर पाते हैं।

आलू किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने और आलू की खेती के विकास, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए साल 2014 में आलू विकास नीति बनाई गई थी। जिसमें प्रदेश में बीज एवं खाने के आलू का समुचित भंडारण सुनिश्चित करना था। साथ ही प्रदेश से बाहर विपणन और निर्यात के बाजार विकास को प्रोत्साहित करना था। इसके अलावा आलू आधारित प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना करके आलू किसानों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन तीन साल बाद भी इस योजना पर कोई काम ही नहीं हुआ है।

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आलू उत्पादन में सबसे आगे फर्रूखाबाद जिले के चंदौरा गाँव के किसान राय सिंह ने बताया, ‘’इस बार आलू की खेती से बड़ा नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करने में एक-दो साल लग जाएंगे।’’ भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता आलोक वर्मा ने बताया, ‘’प्रदेश में आलू की बंपर पैदावार के बाद भी आलू किसान बर्बाद है। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य 487 रूपए प्रति कुंतल की दर से आलू खरीदने की जो घोषणा हुई थी लेकिन किसानों से आलू खरीद हुई ही नहीं।’’

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