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वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों पर ध्यान देने की है जरूरत

वर्तमान में मौजूद अध्ययन यह बतलाते हैं कि देश के ज्यादातर शहरों में यातायात, रोड और इमारत बनाने से उड़ने वाली धूल, उद्योग-धंधे, लकड़ी-कंडों व कोयले का खाना बनाने में उपयोग, कचरा जलाना वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं।

वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों पर ध्यान देने की है जरूरत

हर स्रोत से वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पर्याप्त आर्थिक मदद और सही मैनेजमेंट की आवश्यकता है। Photo: STEPS Centre, Flickr

मणि भूषण झा/ डॉ. अजय सिंह नागपुरे

कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020 में 63 % भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण में कमी आने के बावजूद भी दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 भारत के थे। ऐसे में 'राष्ट्रीय साफ़ हवा कार्यक्रम' (NCAP ) के तहत देश के 122 शहरों में 'स्वच्छ वायु के लिए योजना' (क्लीन एअर एक्शन प्लान) बनाया जा रहा है। इसके तहत वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों के लिए विशेष कार्य योजना बनाई जा रही है।

कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020 में 63 % भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण में कमी आने के बावजूद भी दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 भारत के थे। हाल ही में प्रकाशित हुई 'वर्ल्ड एअर क्वालिटी रिपोर्ट 2020 ' के मुताबिक कोरोना महामारी से दुनिया के कई शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ। उदाहरण के लिए दिल्ली की वायु गुणवत्ता में 15 % सुधार देखने को मिला। 15% गुणवत्ता में सुधार होने के बावजूद दिल्ली में वायु प्रदूषण विश्व के सभी मानकों की तय सीमा से ऊपर पाया गया। ना सिर्फ दिल्ली, बल्कि भारत के अन्य शहरों का हाल भी बुरा है। यही कारण है कि भारत के शहर विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में शीर्ष स्थान पर रहे हैं। 'राष्ट्रीय साफ़ हवा कार्यक्रम' (NCAP ) के तहत देश के 122 शहरों में 'स्वच्छ वायु के लिए योजना' (क्लीन एअर एक्शन प्लान) बनाया जा रहा है, जिसके तहत वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों के लिए विशेष कार्य योजना बनाई जा रही है।

वर्तमान में मौजूद अध्ययन यह बतलाते हैं कि देश के ज्यादातर शहरों में यातायात, रोड और इमारत बनाने से उड़ने वाली धूल, उद्योग-धंधे, लकड़ी-कंडों व कोयले का खाना बनाने में उपयोग, कचरा जलाना वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत है। देश के शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए वायु प्रदूषण के हर स्रोतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि हर स्रोत से वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पर्याप्त आर्थिक मदद और सही मैनेजमेंट की आवश्यकता है।

Photo: Vinod Kumar, Flickr

बजट 2021-22 में दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में साफ हवा के लिए वित्तीय सहायता को जारी रखा गया है। ऐसे 42 शहरों के लिए 2217 करोड़ रुपये का आवंटन इस साल के बजट में किया गया है। इसके अलावा 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' के लिए 470 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हालांकि इसका विवरण अभी तक अधिसूचित नहीं हुआ है। यह माना जा सकता है कि इस वर्ष के बजट का उपयोग पिछले वर्ष के बजट की तर्ज पर ही किया जाएगा। आम तौर पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन (AQM) के पांच प्रमुख घटक होते हैं- 'लक्ष्यों की स्थापना करना', 'गुणवत्ता और प्रदूषण के स्रोत की स्थिति का आकलन करना', 'नियंत्रण रणनीतियों को विकसित करना', 'जमीनी स्तर पर नीतियों को लागू करना', एवं 'नीतियों का समयबद्ध मूल्यांकन करना'। मुख्य रूप से बजट 2021 के तहत आवंटित राशि 2217 करोड़, वायु गुणवत्ता प्रबंधन के पहले तीन घटकों पर केंद्रित है। अमूमन यह देखा जाता है की वायु प्रदूषण के लिए बजट मापने की प्रक्रिया में अन्य घटकों के लिए किए गए अप्रत्यक्ष आवंटन को हम नजरंदाज करते हैं। इसलिए आज यह आवश्यक है कि वायु प्रदूषण के कुल बजट को मापने के लिए हमें एक समग्र दृष्टि अपनानी पड़ेगी।

परिवहन, नगरीय ठोस अवशेष का जलना, घरेलू खाना बनाने के लिए लकड़ी, गोबर, उपलों का उपयोग इत्यादि भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं और इनके निवारण हेतु जमीनी स्तर पर नीतियों को तत्काल लागू करने की आवश्यकता है। अधिकांश विशेषज्ञ की सिफारिशों के मुताबिक सार्वजनिक-यातायात की व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए एवं प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियों को सड़क से हटाना चाहिए। बजट 2021 में सार्वजनिक बस यातायात व्यवस्था को बढ़ाने एवं सुगम बनाने के लिए अभिनव पीपीपी मॉडल शुरू करने की पहल की गई है। इसके तहत 20,000 से अधिक बसों को संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है और सरकार ने 18,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा निजी वाहनों के लिए 20 साल और वाणिज्य वाहनों के लिए 15 साल की अवधि में एक फिटनेस परीक्षण हो, ऐसी प्लानिंग की गयी है। हाल ही आए वाहन स्क्रैपिंग नीति के पहले ड्राफ्ट के तहत पुराने वाहनों के एवज में वाहन कंपनियां ग्राहकों को नए वाहन की खरीद पर करीब पांच प्रतिशत की छूट देंगी। छूट के अलावा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर ग्रीन टैक्स और अन्य शुल्क के प्रावधान हैं।

शहरों में PM 2.5 उत्सर्जन में नगरीय ठोस अवशेष (MSW) जलने का 5 से 26 प्रतिशत का योगदान है। ऐसे में इसके लिए उचित कचरा प्रबंधन की जरूरत है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) पर बजट आवंटन के प्रावधानों से विशेष कर कचरा प्रथकी-करण करके और सिंगह यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाकर वायु प्रदूषण उत्सर्जन को काफी कम करने की योजना बनायी गयी है।

Photo: Vinod Kumar, Flickr

'निर्माण और पुराने आधारिक संरचना के तोड़फोड़ की गतिविधियां भी वायु प्रदूषण का एक अन्य महत्वपूर्ण स्रोत है। बजट 2021 में इन दोनों को भी स्वच्छ भारत मिशन आवंटन के अंदर शामिल किया गया है। इससे निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों से वायु प्रदूषण के उत्सर्जन में कमी आएगी। इन क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के अंदर 1,41,678 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाना महत्वपूर्ण है।

देश भर के वायु प्रदूषण के कारकों में 'घरेलू खाना पकाने लिए उपयोग की जाने वाली लकड़ी, गोबर के कंडे तथा कोयले का सबसे अधिक योगदान है। अध्ययनों और विभिन्न योजनाओं द्वारा सुझाए गए समाधान के अनुसार लकड़ी, गोबर के कंडे तथा कोयला की जगह एलपीजी गैस के उपयोग से इस प्रदूषण को कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से रसोई गैस को निम्न आय वाले घरो में बढ़ते उपयोग ने अन्य लाभों के साथ-साथ घरेलू वायु प्रदूषण को कम किया है। बजट 2021 के अंदर उज्ज्वला योजना को अतिरिक्त एक और करोड़ लोगों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

देश को 2022 तक अक्षय ऊर्जा के 175 गीगावॉट के अपने लक्ष्य को पूरा करने की उम्मीद है। बजट 2021 में भारत के सौर ऊर्जा निगम और भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी को वित्तीय सहायता मुहैया कराई गई है। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा की पर दृश्य को और बेहतर बनाने के लिए एक अलग राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन शुरू किया जा रहा है। अक्षय ऊर्जा ज्यादा से ज्यादा होने से जीवाश्म ईंधन पर कम बोझ होगा, जिससे न केवल भारत को पेरिस समझौते के तहत अपने अंतरराष्ट्रीय वादों को निभा पाने में मदद मिलेगी, बल्कि वायु प्रदूषण को भी कम करने में भी महत्वपूर्ण मदद मिलेगा।

अकसर ऐसा देखा गया है की आवंटित राशि पूरी तरह से खर्च नहीं हो पती है और यह आज भी एक चुनौती है। नगर निकायों के पास उचित क्षमता वाले लोगों की कमी होने एवं 'यथास्थिति वादी' कर्मचारियों' का होने की वजह से उपलब्ध धन के बावजूद अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं।

हमारी सलाह है कि पर्यावरण विज्ञान और इंजीनियरिंग प्रशिक्षित पीएचडी और प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्रों का सहयोग लेकर वायु प्रदूषण के खिलाफ चल रही शहरों की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। वर्तमान कर्मचारियों के कौशल विकास के साथ-साथ, शहर के प्रत्येक विशिष्ट कार्य के लिए बजट में उचित आवंटन का होना बहुत आवश्यक है। यह मानना सरासर गलत है कि वायु प्रदूषण एक शहरी समस्या है और इससे पहले की ग्रामीण इलाकों में भी हालात ख़राब हों, हमें जरूरी कदम उठाने चाहिए।

बजट 2021 में स्वच्छ हवा पर उचित ध्यान दिया गया है, जो बहुत आवश्यक भी है। अतीत की कई योजनाओं को जारी रखा गया है और कई नई योजनाओं की शुरुआत की गई है। कुल मिलाकर बजट 2021 वायु प्रदूषण को कम करने के लक्ष्य को लेकर केंद्रित है। समस्या की व्यापकता को समझने और हल करने के लिए 2021 के बजट में एक वृहद दृष्टिकोण अपनाया गया है।

(ये लेखक मणि भूषण झा और डॉ अजय सिंह नागपुरे के निजी विचार हैं।)

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