इन पांच महिलाओं ने लड़ी तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई

इन पांच महिलाओं ने लड़ी तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाईइन्होंने लड़ी कानूनी लड़ाई।

नई दिल्ली। ऐतिहासिक और बहु प्रतीक्षित तीन तलाक से से महिलाओं को बचाने वाला बिल लोकसभा में पेश हो गया है। तीन तलाक के खिलाफ अब नया कानून बनेगा, जिसमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान हो सकता है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को संवैधानिक बताते हुए 6 माह में सरकार को नया कानून बनाने का आदेश दिया था। अपने हक के लिए मुस्लिम महिलाओं ने लंबी लड़ाई लड़ी है। लेकिन हम आपको उन महिलाओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने इसे अंजाम तक पहुंचाने काफी संघर्ष किया। इनमें सबसे अहम नाम है उत्तराखंड की सायरा बानो का जो इस मामले को सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट लेकर गई थीं। उनके अलावा आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और अतिया साबरी भी उन महिलाओं में है जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद की। इनमें से किसी को फोन पर तलाक मिला था, किसी को स्पीड पोस्ट से, किसी को स्टांप पेपर पर तो किसी को कागज के एक टुकड़े पर।

सायरा बानो

उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली सायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। साथ ही, उनकी याचिका में मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह प्रथा को भी गलत बताते हुए उसे खत्म करनी की मांग की गई थी। अर्जी में सायरा ने कहा था कि तीन तलाक संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सायरा बानो ने टाइम्स आॅ इंडिया से बातचीत में बताया था, 'मैंने कुमायूं यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में एमए किया है। 2001 में मेरी शादी हुई। 10 अक्टूबर 2015 को पति ने मुझे तलाक दे दिया। तलाक के बाद मैं अपने पैरंट्स के साथ रह रही हूं। मेरा एक बेटा और एक बेटी है। दोनों स्कूल जाते हैं। उनका खर्चा मैं कैसे उठाऊं। मुझे लगता है कि मेरे मूल अधिकार का हनन हुआ है। अपने पैरंट्स की मदद से मैं दिल्ली आई और एडवोकेट बालाजी श्रीनिवासन से मिलकर कोर्ट में याचिका दायर की। मुझे किसी भी दूसरी महिला की तरह अपना हक चाहिए।'

आफरीन रहमान

जयपुर की 25 वर्षीय आफरीन रहमान ने भी तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने बताया था कि इंदौर में रहने वाले उनके पति ने स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक दिया है, जो सही नहीं है। आफरीन ने कोर्ट से न्याय की मांग की थी। आफरीन का आरोप था कि उनके पति समेत ससुराल पक्ष के दूसरे लोगों ने मिलकर दहेज की मांग को लेकर उनके साथ काफी मारपीट की और फिर उन्हें घर से निकाल दिया।

अतिया साबरी

यूपी के सहारनपुर की आतिया साबरी के पति ने कागज पर तीन तलाक लिखकर आतिया से अपना रिश्ता तोड़ लिया था। उनकी शादी 2012 में हुई थी। उनकी दो बेटियां भी हैं। अतिया ने आरोप लगाया था कि लगातार दो बेटियां होने से नाराज उनके शौहर और ससुर उन्हें घर से निकालना चाहते थे। उन्हें दहेज के लिए भी परेशान किया जाता था।

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गुलशन परवीन

यूपी के ही रामपुर में रहने वाली गुलशन परवीन को उनके पति ने 10 रुपये के स्टांप पेपर पर तलाकनामा भेज दिया था। गुलशन की 2013 में शादी हुई थी और उनका दो साल का बेटा भी है।

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इशरत जहां

चीन तलाक को संवैधानिकता को चुनौती देने वालों में पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहां भी शामिल थीं। इशरत ने अपनी याचिका में कहा था कि उसके पति ने दुबई से ही उन्हें फोन पर तलाक दे दिया। इशरत ने कोर्ट को बताया था कि उसका निकाह 2001 में हुआ था और उसके बच्चे भी हैं जिन्हें पति ने जबरन अपने पास रख लिया है। याचिका में बच्चों को वापस दिलाने और उसे पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि ट्रिपल तलाक गैरकानूनी है और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

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